“अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने रूसी तेल खरीद पर भारत समेत देशों पर 500% तक टैरिफ लगाने वाले बिल का समर्थन किया है, जिससे भारत के आयात पर असर पड़ सकता है; भारत अमेरिका से सालाना 38.99 अरब डॉलर का सामान आयात करता है, जिसमें बादाम, व्हिस्की, एयरक्राफ्ट और मिनरल फ्यूल प्रमुख हैं; इस फैसले के पीछे रूस पर प्रतिबंधों को मजबूत करना और व्यापार असंतुलन सुधारना मुख्य कारण हैं।”
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक बिल का समर्थन किया है, जिसमें रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 500% तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है। इस बिल में भारत, चीन और ब्राजील को स्पष्ट रूप से नामित किया गया है, जो भारत के लिए बड़ा जोखिम पैदा कर सकता है। भारत रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदकर अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी करता है, लेकिन यह फैसला उस पर रोक लगाने का प्रयास है।
ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि रूस पर लगे प्रतिबंधों को मजबूत करने के लिए ऐसे देशों पर दबाव जरूरी है जो रूसी तेल खरीदकर मॉस्को की अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहे हैं। इसके अलावा, अमेरिका भारत से व्यापार असंतुलन पर नाराज है, जहां भारत अमेरिकी सामानों पर उच्च टैरिफ लगाता है, जैसे Harley-Davidson मोटरसाइकिल पर 100% तक। ट्रंप ने इसे ‘प्रतिशोधी’ नीति बताते हुए कहा है कि अगर भारत अपनी टैरिफ नीतियां नहीं बदलता, तो अमेरिका भी वैसा ही करेगा।
भारत अमेरिका से विभिन्न उत्पाद आयात करता है, जो कुल 38.99 अरब डॉलर के हैं (2024 डेटा के अनुसार)। इनमें उपभोक्ता वस्तुओं से लेकर औद्योगिक सामग्री शामिल है। यदि 500% टैरिफ लागू होता है, तो कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिससे महंगाई बढ़ेगी और सप्लाई चेन प्रभावित होगी।
प्रमुख आयात उत्पाद और उनका प्रभाव:
बादाम (Almonds): भारत अमेरिका से सालाना करीब 1 अरब डॉलर के बादाम आयात करता है, मुख्य रूप से California से। यह भारत की कुल बादाम जरूरत का 80% हिस्सा है। टैरिफ से कीमतें 5-6 गुना बढ़ सकती हैं, जो त्योहारों और ड्राई फ्रूट बाजार को प्रभावित करेगा।
व्हिस्की (Whiskey): अमेरिकी bourbon और अन्य spirits का आयात लगभग 200 मिलियन डॉलर का है। भारत में पहले से ही 150% टैरिफ है, लेकिन नया फैसला इसे और महंगा बना सकता है, जिससे प्रीमियम liquor बाजार सिकुड़ेगा।
एप्पल और अन्य फल: Washington state से apples का आयात 300 मिलियन डॉलर से अधिक है। टैरिफ से घरेलू फल बाजार में उछाल आ सकता है, लेकिन उपभोक्ताओं को महंगे विकल्प मिलेंगे।
एयरक्राफ्ट और डिफेंस उपकरण: Boeing विमानों और सैन्य सामग्री का आयात 5 अरब डॉलर से ऊपर है। यह रक्षा सौदों को प्रभावित कर सकता है, हालांकि रणनीतिक छूट संभव है।
मिनरल फ्यूल और केमिकल्स: कच्चा तेल, LNG और organic chemicals का आयात 11 अरब डॉलर से अधिक है। यह ऊर्जा क्षेत्र को झटका दे सकता है।
भारत-अमेरिका आयात का ब्रेकडाउन (2024-2025 अनुमानित डेटा):
| श्रेणी | आयात मूल्य (अरब डॉलर) | प्रमुख उत्पाद | संभावित टैरिफ प्रभाव |
|---|---|---|---|
| मिनरल फ्यूल्स | 11.5 | Crude oil, LNG | ऊर्जा लागत में 400-500% वृद्धि |
| मशीनरी और इलेक्ट्रिकल | 7.2 | Optical instruments, machinery | औद्योगिक उत्पादन में देरी |
| एयरक्राफ्ट | 5.1 | Boeing planes | विमानन क्षेत्र पर दबाव |
| केमिकल्स | 4.8 | Organic chemicals | फार्मा और प्लास्टिक उद्योग प्रभावित |
| फल और नट्स | 1.5 | Almonds, apples | उपभोक्ता कीमतों में तेज उछाल |
| स्पिरिट्स और beverages | 0.2 | Whiskey | लग्जरी गुड्स बाजार सिकुड़ना |
ट्रंप का यह फैसला रूस-यूक्रेन संघर्ष से जुड़े प्रतिबंधों का विस्तार है, जहां अमेरिका चाहता है कि सहयोगी देश रूसी तेल से दूर रहें। भारत ने अब तक रूस से 20% से अधिक कच्चा तेल खरीदा है, जो सस्ता होने से अर्थव्यवस्था को फायदा पहुंचाता है। हालांकि, ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर भारत खरीद नहीं रोकता, तो टैरिफ बढ़ाए जाएंगे।
भारत सरकार अब वैकल्पिक स्रोत तलाश रही है, जैसे सऊदी अरब और UAE से तेल आयात बढ़ाना। साथ ही, द्विपक्षीय बातचीत से छूट की कोशिश हो रही है। यदि बिल पास होता है, तो भारत के निर्यात पर भी असर पड़ेगा, क्योंकि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है (86.5 अरब डॉलर)।
ट्रंप फैसले के मुख्य कारण:
रूसी तेल खरीद पर रोक लगाना, ताकि रूस की आय कम हो।
व्यापार असंतुलन सुधारना, जहां अमेरिका का घाटा 50 अरब डॉलर से अधिक है।
उच्च भारतीय टैरिफ का जवाब, जैसे मोटरसाइकिल और डेयरी पर।
रणनीतिक दबाव, ताकि भारत अमेरिकी नीतियों का साथ दे।
आर्थिक प्रतिशोध, जैसा कि ट्रंप ने चुनाव अभियान में वादा किया था।
यह स्थिति भारत को अपनी व्यापार नीतियां पुनर्विचार करने पर मजबूर कर सकती है, जिसमें घरेलू उत्पादन बढ़ाना और नए बाजार तलाशना शामिल है।
Disclaimer: यह समाचार रिपोर्ट स्रोतों से प्राप्त जानकारी और टिप्स पर आधारित है।