“व्यापार मंत्री पीयूष गोयल ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को किसानों के हित में बताते हुए कहा कि यह कृषि और डेयरी क्षेत्रों को अधिक अवसर और आय प्रदान करेगा, जबकि एमएसएमई, इंजीनियरिंग, कपड़ा, रत्न-आभूषण, चमड़ा और समुद्री उत्पादों जैसे निर्यात-उन्मुख क्षेत्रों को बड़े बाजारों तक पहुंच मिलेगी। समझौते से भारत के औद्योगिक सामानों पर टैरिफ 13.5% से घटकर 0% हो जाएगा, जिससे श्रम-गहन उद्योगों में निवेश और रोजगार बढ़ेगा।”
समझौते की मुख्य विशेषताएं भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के अंतिम चरण में पहुंचने के साथ, मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि यह समझौता भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों को मजबूत करेगा। समझौते में पारस्परिक टैरिफ कटौती शामिल है, जहां अमेरिका ने अधिकांश भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ को 50% से घटाकर 18% करने का फैसला किया है। इससे भारत के निर्यात में 20-25% की वृद्धि की संभावना है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां श्रम लागत कम है और वैश्विक मांग अधिक। गोयल ने जोर दिया कि समझौता वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (GVCs) में भारत की भागीदारी बढ़ाएगा, जिससे निवेश में $500 बिलियन का प्रवाह संभव हो सकता है अगले पांच वर्षों में। समझौते के तहत, संवेदनशील क्षेत्रों जैसे कृषि और डेयरी को अमेरिकी आयात से पूरी तरह संरक्षित रखा गया है, लेकिन निर्यात अवसरों को बढ़ावा दिया जाएगा। उदाहरण के लिए, भारतीय डेयरी उत्पादों को अमेरिकी बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी, जहां मांग में 15% की वार्षिक वृद्धि दर्ज की जा रही है। इसी तरह, कृषि क्षेत्र में जैविक उत्पादों और प्रसंस्कृत खाद्यों के निर्यात को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे किसानों की आय में 10-15% का इजाफा हो सकता है।
क्षेत्र-विशिष्ट लाभ रत्न-आभूषण क्षेत्र, जो भारत के निर्यात का 14% हिस्सा है, इस समझौते से सबसे अधिक लाभान्वित होगा। अमेरिका में भारतीय जेम्स और ज्वैलरी की मांग पहले से ही $10 बिलियन से अधिक है, और टैरिफ कटौती से यह आंकड़ा 2027 तक $15 बिलियन तक पहुंच सकता है। गोयल ने कहा कि यह क्षेत्र एमएसएमई-आधारित है, जहां 50 लाख से अधिक लोग रोजगार पाते हैं, और समझौता इन इकाइयों को तकनीकी उन्नयन के लिए अमेरिकी निवेश आकर्षित करेगा। कपड़ा और परिधान क्षेत्र में, जो अमेरिका को $8 बिलियन का निर्यात करता है, टैरिफ में कमी से निर्यात 30% बढ़ सकता है। समझौते में शामिल प्रावधानों से भारतीय टेक्सटाइल कंपनियां अमेरिकी ब्रांड्स जैसे Nike और Gap के साथ साझेदारी कर सकेंगी, जिससे उत्पादन क्षमता में विस्तार होगा। चमड़ा और फुटवियर उद्योग, जो पहले से ही वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी है, को $2 बिलियन अतिरिक्त निर्यात का अवसर मिलेगा, खासकर पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों में। कृषि क्षेत्र को बूस्टर डोज मिलने का मतलब है कि संरक्षण के साथ-साथ निर्यात प्रोत्साहन। उदाहरणस्वरूप, भारतीय फल-सब्जियां और प्रसंस्कृत कृषि उत्पादों पर अमेरिकी टैरिफ घटने से निर्यात $5 बिलियन तक बढ़ सकता है। गोयल ने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने हमेशा कृषि और डेयरी क्षेत्रों का समर्थन किया है, और यह समझौता इन क्षेत्रों में अधिक अवसर और आय सुनिश्चित करेगा। डेयरी सेक्टर में, जहां भारत दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक है, समझौते से अमेरिकी बाजार में दूध-आधारित उत्पादों की पहुंच बढ़ेगी, लेकिन घरेलू बाजार को कोई नुकसान नहीं होगा।
| क्षेत्र | वर्तमान निर्यात (अमेरिका को, $ बिलियन में) | अपेक्षित वृद्धि (%) | प्रमुख लाभ |
|---|---|---|---|
| रत्न-आभूषण | 10 | 50 | टैरिफ कटौती से बाजार पहुंच, एमएसएमई निवेश |
| कपड़ा और टेक्सटाइल | 8 | 30 | ब्रांड साझेदारी, उत्पादन विस्तार |
| कृषि | 4 | 25 | जैविक उत्पाद निर्यात, किसान आय वृद्धि |
| डेयरी | 1.5 | 20 | प्रसंस्कृत उत्पाद पहुंच, संरक्षण के साथ प्रोत्साहन |