लग्जरी कारों से लेकर सस्ती गाड़ियों तक स्टेपनी गायब: 2026 में ये वजहें जान लें, वरना पंक्चर में फंस जाएंगे!

ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में स्टेपनी हटाने का ट्रेंड तेज, वजहें वजन घटाना, माइलेज बढ़ाना और बूट स्पेस बचाना; ईवी मॉडल्स में बैटरी जगह के लिए जरूरी, भारत में MoRTH नियमों से सपोर्ट; विकल्प में पंक्चर रिपेयर किट और TPMS; लग्जरी ब्रैंड्स जैसे BMW, Tesla पहले से अपनाए, अब बजट कारों में फैल रहा।

ऑटोमेकर्स स्टेपनी हटाकर वाहनों का वजन 20-30 किलोग्राम तक कम कर रहे हैं, जिससे फ्यूल एफिशिएंसी 1-2 प्रतिशत बढ़ती है। ईवी सेगमेंट में यह ट्रेंड सबसे मजबूत, जहां बैटरी पैक के लिए अतिरिक्त स्पेस चाहिए; उदाहरण के लिए, Tata Nexon EV और Mahindra XUV400 जैसे मॉडल्स में स्टेपनी की जगह टायर इन्फ्लेशन किट दी जाती है। लग्जरी ब्रैंड्स जैसे BMW X5 और Mercedes-Benz E-Class में रन-फ्लैट टायर्स स्टैंडर्ड, जो पंक्चर होने पर भी 80 किमी तक 80 किमी/घंटा स्पीड पर चल सकते हैं।

भारत में MoRTH के 2021 नियमों से यह बदलाव आसान हुआ, जो स्पेयर व्हील को अनिवार्य नहीं मानते अगर वैकल्पिक सिस्टम मौजूद हों। 2026 में, नए लॉन्च होने वाले 40 प्रतिशत से ज्यादा कारों में स्टेपनी ऑप्शनल एक्सेसरी बन सकती है, खासकर हाइब्रिड और ईवी में। लागत बचत भी बड़ा फैक्टर: एक स्टैंडर्ड स्टेपनी की कीमत 5,000-10,000 रुपये, जो मैन्युफैक्चरर्स बचाते हैं और कस्टमर्स को अतिरिक्त चार्ज पर ऑफर करते हैं।

स्टेपनी हटाने की मुख्य वजहें:

वजन कम करना: कार का कुल वजन घटने से माइलेज बेहतर, CO2 उत्सर्जन कम; EVs में रेंज 5-10 किमी extra मिल सकती है।

बूट स्पेस बढ़ाना: मॉडर्न कारों में बड़े व्हील्स के कारण फुल-साइज स्पेयर 30-40 प्रतिशत बूट जगह घेरता है; अब रिपेयर किट से 100-150 लीटर extra स्पेस।

टेक्नोलॉजी एडवांसमेंट: TPMS सिस्टम टायर प्रेशर मॉनिटर करता है, पंक्चर रिपेयर किट (सीलेंट और कंप्रेसर) से 80 प्रतिशत मामलों में तुरंत फिक्स; रन-फ्लैट टायर्स महंगे लेकिन सुरक्षित।

बेहतर रोड्स और टायर्स: भारतीय सड़कें सुधर रही हैं, हाई-क्वालिटी टायर्स जैसे Michelin या Bridgestone लंबे चलते हैं, पंक्चर रिस्क कम।

लागत और पर्यावरण: मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट बचत, कम मटेरियल यूज से इको-फ्रेंडली; ग्लोबल ट्रेंड जहां 2020 से सिर्फ 9 प्रतिशत कारों में फुल स्पेयर।

बिना स्टेपनी वाले प्रमुख मॉडल्स (2026 ट्रेंड्स):

सेगमेंटमॉडलविकल्पकीमत रेंज (रुपये में)
लग्जरीBMW 3 Seriesरन-फ्लैट टायर्स50-70 लाख
ईवीTesla Model 3इन्फ्लेशन किट40-60 लाख
बजटMaruti Swift Hybridपंक्चर किट7-10 लाख
एसयूवीHyundai Creta EVTPMS + किट15-20 लाख
हाइब्रिडToyota Innova Hycrossऑप्शनल स्पेयर20-30 लाख

कस्टमर्स के लिए चिंता: ग्रामीण इलाकों में जहां रोडसाइड असिस्टेंस कम, पंक्चर में मुश्किल; लेकिन ब्रैंड्स जैसे Maruti और Hyundai 24×7 असिस्टेंस ऑफर करते हैं। 2026 में, ARAI टेस्टिंग में स्पेयर-लेस कारों की संख्या बढ़ेगी, जो माइलेज स्कोर बेहतर दिखाएगी। अगर स्टेपनी चाहिए, तो डीलर से 8,000-15,000 रुपये extra में ऐड कराएं।

टिप्स पंक्चर से बचने के लिए:

TPMS चेक करें, प्रेशर 32-35 PSI रखें।

रिपेयर किट का यूज: सीलेंट इंजेक्ट कर कंप्रेसर से.inflate।

रन-फ्लैट टायर्स चुनें अगर हाई-स्पीड ड्राइविंग ज्यादा।

रोडसाइड असिस्टेंस प्लान लें, जैसे RSA से 1,000 रुपये सालाना।

टायर्स रोटेट कराएं हर 10,000 किमी।

Disclaimer: यह समाचार, रिपोर्ट, टिप्स, स्रोतों पर आधारित है।

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