“2026 में भारत की अर्थव्यवस्था 7.4% की दर से बढ़ रही है, जो दुनिया की सबसे तेज विकास वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रही है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, GDP में निजी उपभोग 7% बढ़ा, जबकि निवेश 7.8% की वृद्धि के साथ मजबूत हुआ। तकनीकी क्षेत्र में AI और PLI योजनाओं से नवाचार बढ़ा, वैश्विक नवाचार सूचकांक में भारत 38वें स्थान पर पहुंचा। सामाजिक रूप से बेरोजगारी घटी, कौशल विकास से रोजगार बढ़ा, और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर ने ग्रामीण मांग को मजबूत किया। वैश्विक चुनौतियों के बावजूद, भारत 2028 तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है।”
भारत का विकास: आर्थिक, तकनीकी और सामाजिक प्रगति की कहानी
भारत की अर्थव्यवस्था 2026 में मजबूत गति से आगे बढ़ रही है, जहां वित्त वर्ष 2025-26 में वास्तविक GDP वृद्धि 7.4% रहने का अनुमान है। यह लगातार चौथा वर्ष है जब भारत दुनिया की सबसे तेज बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है। निजी अंतिम उपभोग व्यय (PFCE) में 7% की वृद्धि दर्ज की गई, जो GDP का 61.5% है, जो 2012 के बाद का उच्चतम स्तर है। यह कम मुद्रास्फीति, स्थिर रोजगार और बढ़ती वास्तविक आय से संचालित है। कृषि क्षेत्र की मजबूती ने ग्रामीण मांग को बढ़ावा दिया, जबकि कर सुधारों से शहरी उपभोग में सुधार हुआ।
सकल स्थिर पूंजी निर्माण (GFCF) में 7.8% की वृद्धि हुई, जो GDP में 30% हिस्सेदारी बनाए रखते हुए सार्वजनिक पूंजीगत व्यय और निजी निवेश के पुनरुत्थान से प्रेरित है। सेवाओं का सकल मूल्य वर्धित (GVA) पहली छमाही में 9.3% बढ़ा, पूरे वर्ष के लिए 9.1% अनुमानित है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की संभावित विकास दर 7% तक पहुंच गई है, जो पहले के 6.5% से अधिक है।
आर्थिक विकास के प्रमुख आंकड़े
नीचे दी गई तालिका 2025-26 और 2026-27 के प्रमुख आर्थिक संकेतकों को दर्शाती है:
| संकेतक | FY 2025-26 अनुमान | FY 2026-27 अनुमान | प्रमुख कारक |
|---|---|---|---|
| वास्तविक GDP वृद्धि | 7.4% | 6.8-7.2% | मजबूत उपभोग और निवेश |
| PFCE वृद्धि | 7.0% | 6.5-7.0% | कम मुद्रास्फीति, ग्रामीण मांग |
| GFCF वृद्धि | 7.8% | 7.0-7.5% | सार्वजनिक और निजी निवेश |
| सेवाएं GVA वृद्धि | 9.1% | 8.5-9.0% | डिजिटल और फाइनेंशियल सेवाएं |
| मुद्रास्फीति (CPI) | 2.9% | 3.1-4.2% | स्थिर कीमतें |
| करंट अकाउंट डेफिसिट | 0.9% GDP | 1.0% GDP | निर्यात और रेमिटेंस |
यह डेटा दर्शाता है कि भारत वैश्विक चुनौतियों जैसे अमेरिकी टैरिफ के बावजूद स्थिरता बनाए रख रहा है। IMF और UN के अनुसार, 2026 में भारत की वृद्धि 6.6% रहेगी, जो दक्षिण एशिया में 5.6% की औसत से अधिक है। मजबूत घरेलू मांग, सार्वजनिक निवेश और कर सुधार इसकी कुंजी हैं।
तकनीकी प्रगति और नवाचार
भारत का नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र तेजी से विकसित हो रहा है। वैश्विक नवाचार सूचकांक में 2019 के 66वें स्थान से 2025 में 38वें स्थान पर पहुंचना इसकी गवाही देता है। उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (PLI) ने स्मार्टफोन जैसे क्षेत्रों में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा दिया। सितंबर 2025 तक PLI के तहत 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हुआ, जिससे 18.7 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त उत्पादन और बिक्री हुई।
AI रणनीति में भारत अपनी आर्थिक वास्तविकताओं पर फोकस कर रहा है, जहां पूंजी, कंप्यूटिंग क्षमता और ऊर्जा की सीमाओं को ध्यान में रखते हुए विकास किया जा रहा है। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, AI को महंगे पश्चिमी मॉडलों की नकल के बजाय स्थानीय जरूरतों के अनुरूप बनाया जा रहा है। सेमीकंडक्टर और EV बैटरी जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ा, जहां Make in India और Digital India ने गांवों को विनिर्माण हब में बदल दिया।
प्रमुख तकनीकी उपलब्धियां
UPI: प्रति माह 10 अरब से अधिक ट्रांजेक्शन, सबसे गरीबों को सशक्त बनाते हुए।
Aadhaar: 1.3 अरब लोगों को कवर, पहचान और पहुंच प्रदान।
सैटेलाइट: 120+ लॉन्च, जिसमें Mars मिशन शामिल।
5G: कैपेक्स में कमी के बावजूद नेटवर्क विस्तार, COAI द्वारा लाइसेंस फीस में कटौती की मांग।
रक्षा निर्यात: 20,000 करोड़ रुपये वार्षिक, Tejas जेट और मिसाइलों के साथ आत्मनिर्भरता।
यह प्रगति भारत को वैश्विक केंद्र बनाती है, जहां GCCs इनोवेशन इंजन के रूप में विकसित हो रहे हैं।
सामाजिक बदलाव और रोजगार
आर्थिक नीतियां, तकनीकी प्रगति और श्रम बाजार की मांग से भारत में श्रम क्षेत्र में ढांचागत परिवर्तन हो रहा है। आर्थिक समीक्षा के अनुसार, सही कौशल, उद्यमिता और सरकारी पहलों से बेरोजगारी में कमी आई। राष्ट्रीय करियर सेवा पोर्टल से वित्त वर्ष की पहली छमाही में 2 करोड़ से अधिक रोजगार दिए गए। GST के दूसरे चरण और श्रम सुधारों से उद्योग और सेवा क्षेत्र में श्रम बल बढ़ा।
MSMEs और कृषि क्षेत्र में क्रेडिट गारंटी विस्तार ने कार्यशील पूंजी को अनलॉक किया। क्लाइमेट-रेजिलिएंट फार्मिंग से ग्रामीण आय बढ़ी। रियल एस्टेट में किफायती आवास की कैप रिवीजन (45 लाख से 75 लाख रुपये) से लागत मुद्रास्फीति को संबोधित किया गया। बैंकिंग सेक्टर में ग्रॉस NPA बहु-वर्षीय निचले स्तर पर है, जो मजबूत एसेट क्वालिटी दर्शाता है।
सामाजिक प्रगति के मुख्य बिंदु
जीवन प्रत्याशा: 1947 में 35 वर्ष से बढ़कर 2026 में 70+ वर्ष।
साक्षरता: 20% से बढ़कर 80%+।
स्टार्टअप: 100,000+ स्टार्टअप, 110+ यूनिकॉर्न।
बिजली पहुंच: 99% घरों तक।
बैंक अकाउंट: 500+ मिलियन नागरिकों के लिए।
विदेश नीति: अमेरिका, रूस, यूरोप और ग्लोबल साउथ के साथ मजबूत संबंध, रणनीतिक स्वायत्तता पर फोकस।
ये बदलाव गरीबी में कमी और जीवन स्तर में वृद्धि दर्शाते हैं, जहां प्रति व्यक्ति आय बढ़ रही है।
वैश्विक संदर्भ में भारत का विकास
2026 में भारत वैश्विक विकास का नेतृत्व कर रहा है, जहां IMF के अनुसार FY26 में 7.3% वृद्धि होगी। UN रिपोर्ट के अनुसार, घरेलू मांग और सार्वजनिक निवेश से 6.6% वृद्धि होगी। विश्व बैंक का अनुमान FY26 के लिए 7.2% है। अमेरिकी टैरिफ के बावजूद, निर्यात सेगमेंट छूट प्राप्त हैं, और अन्य बाजारों से मांग ऑफसेट कर रही है।
बजट 2026 में औद्योगिक और व्यापार नीति में बदलाव, जहां AI इंफ्रास्ट्रक्चर और R&D के लिए प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। रेलवे, रक्षा और ग्रीन एनर्जी में कैपेक्स बढ़ा। SIP फ्लो मासिक 26,000 करोड़ रुपये से अधिक, जो निवेशक विश्वास दर्शाता है।
चुनौतियां और भविष्य की दिशा
वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं के बीच भारत की रणनीति बफर, रिडंडेंसी और लिक्विडिटी पर फोकस कर रही है। प्रक्रिया सुधार नागरिक-व्यवसाय इंटरफेस में महत्वपूर्ण हैं, जहां राज्य डेरगुलेशन से नियंत्रण से सक्षमता की ओर शिफ्ट हो रहा है। 2047 तक उच्च मध्यम आय वाले देश बनने के लिए 7-8% वृद्धि दर बनाए रखनी होगी, निवेश दर 34-35% तक बढ़ानी होगी।
राज्य क्षमता, समाज और डेरगुलेशन का त्रिकोण विकसित भारत और वैश्विक प्रभाव के लिए जरूरी है। देरी से संतुष्टि और शॉर्ट-टर्म फिक्स से बचना महत्वपूर्ण है।
Disclaimer: यह लेख समाचार, रिपोर्ट और टिप्स पर आधारित है। सूत्रों का उल्लेख नहीं किया गया है।