गणतंत्र दिवस 2026: चीफ गेस्ट परंपरा की शुरुआत कब हुई? इस बार EU के दो बड़े नेता क्यों आ रहे हैं भारत?

“गणतंत्र दिवस पर चीफ गेस्ट बुलाने की परंपरा 1950 में शुरू हुई, जब इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकार्नो पहले मेहमान बने। इस बार 2026 में यूरोपीय कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा को न्योता मिला है, जो भारत-EU संबंधों को मजबूत करने और फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर फोकस दर्शाता है। थीम ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पर आधारित है, जिसमें आत्मनिर्भर भारत की झलक मिलेगी।”

गणतंत्र दिवस पर चीफ गेस्ट परंपरा का इतिहास

गणतंत्र दिवस पर विदेशी मेहमान को चीफ गेस्ट के रूप में आमंत्रित करने की परंपरा भारत के संविधान लागू होने के साथ ही 1950 में शुरू हुई। उस वर्ष इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकार्नो पहले चीफ गेस्ट बने, जो भारत की आजादी के बाद अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करने का प्रतीक था। यह परंपरा राजनयिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए अपनाई गई, जिसमें हर साल एक या अधिक देशों के प्रमुख को न्योता दिया जाता है।

इस परंपरा के पीछे का उद्देश्य भारत की विदेश नीति को प्रदर्शित करना है, जहां आर्थिक, रक्षा और सांस्कृतिक सहयोग पर जोर दिया जाता है। 1950 से अब तक 70 से अधिक देशों के नेता इस भूमिका में शामिल हो चुके हैं, जिसमें फ्रांस, UK, US, रूस और एशियाई देश प्रमुख हैं। कुछ वर्षों में महामारी या राजनीतिक कारणों से कोई चीफ गेस्ट नहीं बुलाया गया, जैसे 2022 में।

चीफ गेस्ट परंपरा के प्रमुख माइलस्टोन

नीचे दी गई तालिका में गणतंत्र दिवस पर चीफ गेस्ट की परंपरा के कुछ महत्वपूर्ण वर्ष और मेहमानों की सूची है, जो भारत की बदलती विदेश नीति को दर्शाती है:

वर्षचीफ गेस्टदेशमहत्वपूर्ण तथ्य
1950सुकार्नोइंडोनेशियापहला चीफ गेस्ट, गुटनिरपेक्ष आंदोलन की शुरुआत का प्रतीक
1955जॉर्जी मालेनकोवसोवियत संघभारत-रूस संबंधों की मजबूती, शीत युद्ध काल में संतुलन
1966कोई नहींभारत-पाक युद्ध के बाद रद्द
1976जैक्स शिराकफ्रांसयूरोपीय देशों से पहला मेहमान, रक्षा सहयोग की शुरुआत
1995नेल्सन मंडेलासाउथ अफ्रीकारंगभेद विरोध का प्रतीक, भारत-अफ्रीका संबंध
2000अब्देलाजीज बाउटेफ्लिकाअल्जीरियासहस्राब्दी वर्ष में अफ्रीकी फोकस
2010ली म्युंग-बाकसाउथ कोरियाएशियाई आर्थिक सहयोग की दिशा
2015बराक ओबामाUSAपहला अमेरिकी राष्ट्रपति, न्यूक्लियर डील का प्रभाव
2018आसियान के 10 नेताआसियान देशएक साथ 10 मेहमान, क्षेत्रीय सहयोग
2023अब्देल फताह अल-सिसीमिस्रमध्य पूर्व फोकस
2024इमैनुएल मैक्रोंफ्रांसरक्षा और स्पेस सहयोग
2025प्रबोवो सुबियांतोइंडोनेशियाएशियाई पड़ोसी पर जोर

यह तालिका दिखाती है कि चीफ गेस्ट का चयन भारत की वर्तमान प्राथमिकताओं पर आधारित होता है, जैसे व्यापार, सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन।

2026 में EU नेताओं को न्योता: पृष्ठभूमि और महत्व

इस बार गणतंत्र दिवस 2026 पर यूरोपीय संघ (EU) के दो शीर्ष नेता चीफ गेस्ट होंगे – यूरोपीय कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा। यह पहली बार है जब EU के शीर्ष नेतृत्व को एक साथ आमंत्रित किया गया है, जो भारत को EU को एक एकीकृत स्ट्रैटेजिक पार्टनर के रूप में देखने का संकेत देता है।

उर्सुला वॉन डेर लेयेन जर्मनी की पूर्व रक्षा मंत्री हैं, जिन्होंने EU की जलवायु नीति और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन को मजबूत किया है। एंटोनियो कोस्टा पुर्तगाल के पूर्व प्रधानमंत्री हैं, जो EU की आर्थिक रिकवरी और विदेश नीति में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। उनका आगमन 25 से 27 जनवरी तक होगा, जिसमें वे 16वें भारत-EU समिट की सह-अध्यक्षता भी करेंगे।

यह न्योता भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) वार्ताओं को गति देने का हिस्सा है, जो जनवरी 2026 में होने वाली हैं। दोनों पक्षों के बीच व्यापार वॉल्यूम 2025 में 120 बिलियन यूरो से अधिक पहुंच चुका है, जिसमें फार्मा, ऑटोमोटिव और रिन्यूएबल एनर्जी प्रमुख क्षेत्र हैं। EU भारत का दूसरा सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है, और यह सहयोग क्लाइमेट चेंज, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और साइबर सिक्योरिटी पर फोकस करेगा।

गणतंत्र दिवस 2026 की थीम और हाइलाइट्स

इस वर्ष की थीम ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पर आधारित है, जो बैंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की रचना को सम्मानित करती है। परेड में आत्मनिर्भर भारत की झलक दिखेगी, जिसमें स्वदेशी हथियार, ड्रोन और स्पेस टेक्नोलॉजी शामिल होंगे। छह राज्यों और विभागों की झांकियां थीम पर फोकस करेंगी, जैसे उत्तर प्रदेश की झांकी में वंदे मातरम की ऐतिहासिक यात्रा, और रक्षा मंत्रालय की झांकी में मेक इन इंडिया हथियार।

परेड में 25 टेब्ल्यू, 16 मार्चिंग कंटिंजेंट और 9 एयरक्राफ्ट फॉर्मेशन होंगे, जिसमें राफेल फाइटर जेट्स का फ्लाईपास्ट शामिल है। महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए, ऑल-वुमन ट्राई-सर्विस कंटिंजेंट भाग लेगा। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में 1500 कलाकार ‘वंदे मातरम’ पर परफॉर्म करेंगे, जो राष्ट्रीय एकता को दर्शाएंगे।

भारत-EU संबंधों में नई दिशा

यह न्योता भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ से ‘एक्ट यूरोप’ की ओर शिफ्ट को दर्शाता है, जहां EU के साथ निवेश 100 बिलियन यूरो तक पहुंचाने का लक्ष्य है। प्रमुख क्षेत्रों में ग्रीन हाइड्रोजन, AI और सेमीकंडक्टर शामिल हैं। 2025 में भारत-EU कनेक्टिविटी पार्टनरशिप के तहत 5जी और क्वांटम कंप्यूटिंग पर समझौते हुए, जो 2026 में विस्तारित होंगे।

EU के साथ चुनौतियां भी हैं, जैसे डेटा प्राइवेसी नियम और कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म, लेकिन यह समिट इन्हें सुलझाने का प्लेटफॉर्म बनेगा। भारत EU को इंडो-पैसिफिक स्ट्रैटेजी में पार्टनर मानता है, जहां चाइना के प्रभाव को बैलेंस करने पर फोकस है।

चीफ गेस्ट परंपरा के भविष्य ट्रेंड्स

भविष्य में यह परंपरा मल्टीपल गेस्ट पर फोकस करेगी, जैसा 2018 में आसियान के साथ हुआ। जलवायु और टेक जैसे ग्लोबल इश्यूज पर आधारित चयन बढ़ेगा। भारत अफ्रीका और लैटिन अमेरिका से अधिक मेहमानों को आमंत्रित कर सकता है, जो G20 और BRICS की भूमिका को मजबूत करेगा।

Disclaimer: यह लेख समाचार रिपोर्टों, टिप्स और स्रोतों पर आधारित है।

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