चालू रबी 2025-26 सीजन में गेहूं की बुवाई ने पिछले साल के मुकाबले जबरदस्त उछाल दिखाया है। कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार 2 जनवरी 2026 तक गेहूं का बुआई क्षेत्र 334.17 लाख हेक्टेयर पहुंच गया, जो पिछले साल की समान अवधि के 328.04 लाख हेक्टेयर से 6.13 लाख हेक्टेयर ज्यादा है। कुल रबी फसलों का बुआई क्षेत्र 634.14 लाख हेक्टेयर हो गया, जिसमें 16.4 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी दर्ज हुई। बेहतर मानसून, समय पर बुआई और MSP में वृद्धि ने किसानों को गेहूं की ओर प्रेरित किया है।
गेहूं बुवाई में बंपर उछाल, उत्पादन बढ़ने की मजबूत उम्मीद
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की रिपोर्ट से पता चलता है कि रबी सीजन 2025-26 में महत्वपूर्ण फसलों की बुवाई पिछले साल से काफी आगे निकल गई है। 2 जनवरी 2026 तक गेहूं की बुवाई 334.17 लाख हेक्टेयर पर पहुंची, जो सामान्य औसत 312.35 लाख हेक्टेयर से काफी ऊपर है। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब और हरियाणा जैसे प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में देखी गई, जहां समय पर मानसून और जल संग्रहण ने अनुकूल स्थिति बनाई।
अन्य प्रमुख रबी फसलों की स्थिति
दलहन फसलों (चना, मसूर, उड़द आदि) का बुआई क्षेत्र: 134.30 लाख हेक्टेयर (पिछले साल 130.87 लाख हेक्टेयर से 3.44 लाख हेक्टेयर अधिक)।
तिलहन फसलों (सरसों, मूंगफली आदि) का बुआई क्षेत्र: 96.30 लाख हेक्टेयर (पिछले साल 93.27 लाख हेक्टेयर से 3.03 लाख हेक्टेयर अधिक)।
कुल रबी फसलों का बुआई क्षेत्र: 634.14 लाख हेक्टेयर (पिछले साल 617.74 लाख हेक्टेयर से 16.4 लाख हेक्टेयर की वृद्धि)।
बढ़ोतरी के प्रमुख कारण
अच्छा मानसून: जलाशयों में भरपूर पानी और भूजल स्तर में सुधार से असिंचित क्षेत्रों में भी बुवाई बढ़ी।
MSP में वृद्धि: सरकार ने रबी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाया, जिससे किसानों ने गेहूं और दलहन पर फोकस किया।
जल्दी बुवाई: अधिकांश क्षेत्रों में बुवाई दिसंबर अंत तक लगभग पूरी हो गई, जिससे फसल को बेहतर मौसम मिला।
उत्पादन अनुमान और प्रभाव विशेषज्ञों का मानना है कि यह रिकॉर्ड बुआई क्षेत्र 2025-26 में गेहूं उत्पादन को 1190 लाख टन के सरकारी लक्ष्य से आगे ले जा सकता है। पिछले सीजन में 1179 लाख टन का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ था। अच्छी फसल से खाद्यान्न सुरक्षा मजबूत होगी और बाजार में गेहूं की उपलब्धता बढ़ने से कीमतों पर दबाव कम रह सकता है। बुवाई की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है, और फसल की स्थिति वर्तमान में उत्कृष्ट बताई जा रही है।