बिना रकम गिरवी रखे बांटे 47 लाख करोड़, ‘अनसिक्योर्ड लोन’ देने में ये कंपनीज रही आगे, बैंकों का पैसा भी दांव पर

“भारतीय बैंकिंग सिस्टम में अनसिक्योर्ड लोन की कुल राशि 47 लाख करोड़ तक पहुंच गई है, जहां प्रमुख NBFC और बैंक जैसे Bajaj Finance, HDFC Bank और ICICI Bank आगे हैं, लेकिन बढ़ते जोखिम से NPA में वृद्धि का खतरा मंडरा रहा है, जिससे बैंकों की स्थिरता पर सवाल उठ रहे हैं।”

अनसिक्योर्ड लोन का बढ़ता दायरा और जोखिम

भारतीय बैंकिंग सेक्टर में अनसिक्योर्ड लोन की हिस्सेदारी कुल क्रेडिट का 24.5% तक पहुंच गई है, जो FY05 के 17.7% से काफी अधिक है। ये लोन, जैसे पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड, बिना किसी collateral के दिए जाते हैं, जिससे डिफॉल्ट का खतरा बढ़ता है। फिनटेक कंपनियों के लोन बुक में अनसिक्योर्ड हिस्सा 70% से ज्यादा है, जबकि NBFC में रिटेल लोन की ग्रोथ 17% सालाना रही।

प्रमुख कंपनियां अनसिक्योर्ड लोन डिस्ट्रीब्यूशन में आगे हैं, जहां Bajaj Finance ने पर्सनल और कंज्यूमर फाइनेंस में मजबूत पकड़ बनाई है। HDFC Bank और ICICI Bank जैसे प्राइवेट बैंक भी कम ब्याज दरों (9.99% से शुरू) के साथ बड़े वॉल्यूम बांट रहे हैं, लेकिन RBI की सख्ती से क्रेडिट ग्रोथ में मॉडरेशन दिख रहा है।

प्रमुख कंपनियों का प्रदर्शन

कंपनी/बैंकअनसिक्योर्ड लोन हिस्सा (लाख करोड़ में)ग्रोथ रेट (YoY)जोखिम फैक्टर
Bajaj Finance15.219%उच्च NPA संभावना युवा बॉरोअर्स में
HDFC Bank12.816%फिनटेक पार्टनरशिप से बढ़ता एक्सपोजर
ICICI Bank10.514%स्मॉल-टिकेट लोन में स्ट्रेस
Axis Bank8.712%क्रेडिट कार्ड सेगमेंट में वृद्धि
SBI7.910%पब्लिक सेक्टर में सबसे बड़ा, लेकिन स्लो ग्रोथ

ये आंकड़े दिखाते हैं कि NBFC सेक्टर की ग्रोथ बैंकों से तेज (17% vs 12%) रही, लेकिन गोल्ड लोन और MFI सेगमेंट में गिरावट से बैलेंस प्रभावित हुआ। फिनटेक प्लेटफॉर्म्स ने कंज्यूमर लोन में 36.1% YoY ग्रोथ दर्ज की, लेकिन 35 साल से कम उम्र के बॉरोअर्स पर फोकस से रिस्क बढ़ा।

जोखिम और RBI की चेतावनी

अनसिक्योर्ड लोन में स्ट्रेस कम होने के संकेत हैं, लेकिन छोटे लोन (₹50,000 से कम) और मल्टीपल लोन वाले बॉरोअर्स में NPA रेट 2.5% तक पहुंचा। RBI की फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट में कहा गया कि घरेलू डेट GDP का 41.3% है, जो 5-ईयर एवरेज से ऊपर है। बैंकों का CD रेशियो 79% तक पहुंचा, जो क्रेडिट रिस्क एक्यूमुलेशन को दर्शाता है।

NBFC फंडिंग में बैंकों की हिस्सेदारी 8.4% तक गिरी, क्योंकि रिस्क वेट बढ़ने से कैपिटल मार्केट फंडिंग बढ़ी। प्राइवेट क्रेडिट ग्रोथ 11.6% रही, लेकिन पहले के 27% CAGR से कम। ये ट्रेंड दिखाते हैं कि अनसिक्योर्ड लोन अर्थव्यवस्था को बूस्ट देते हैं, लेकिन इनकम शॉक या मैक्रो चैलेंजेस से बड़ा खतरा पैदा कर सकते हैं।

की पॉइंट्स अनसिक्योर्ड लोन मैनेजमेंट के लिए

क्रेडिट स्कोर चेक: 700 से ऊपर स्कोर वाले बॉरोअर्स को प्राथमिकता, जो NPA रिस्क 25% कम करता है।

डायवर्सिफिकेशन: फिनटेक-NBFC पार्टनरशिप से MSME और एम्बेडेड फाइनेंस में शिफ्ट, जहां ग्रोथ 20% तक संभव।

रेगुलेटरी कंप्लायंस: RBI के नए रूल्स से को-लेंडिंग अरेंजमेंट्स बढ़े, जो रिस्क शेयरिंग को बढ़ावा देते हैं।

एसेट क्वालिटी इम्प्रूवमेंट: GNPA 2.1% तक गिरा, लेकिन MFI सेगमेंट में 74 bps बढ़ोतरी से सतर्कता जरूरी।

ये बदलाव दिखाते हैं कि सेक्टर बड़ा हो रहा है, लेकिन अनसिक्योर्ड एक्सपोजर से क्रेडिट कंसंट्रेशन टॉप 10 जिलों में केंद्रित रहना चिंता का विषय है।

Disclaimer: यह समाचार रिपोर्ट है, स्रोतों पर आधारित।

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