मेट्रो और टनल मशीनें भी बनाएगा भारत! बजट में इन 7 सेक्टरों पर सबसे बड़ा दांव, चीन को मिलेगी कड़ी टक्कर.

“केंद्रीय बजट 2026-27 में इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग पर जोर देते हुए 12.2 लाख करोड़ रुपये का कैपिटल एक्सपेंडिचर आवंटित किया गया है। निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर इक्विपमेंट एन्हांसमेंट स्कीम के तहत टनल बोरिंग मशीनों और मेट्रो उपकरणों का घरेलू उत्पादन बढ़ाया जाएगा। सात रणनीतिक सेक्टरों में बड़े निवेश से भारत चीन की चुनौती का सामना करेगा, जिसमें सिटी इकोनॉमिक रीजन, सेमीकंडक्टर, रेलवे और एनर्जी शामिल हैं।”

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2026 को पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 में मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर विशेष फोकस किया है। इस बजट में निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर इक्विपमेंट (CIE) एन्हांसमेंट स्कीम की शुरुआत की गई है, जिसके तहत हाई-वैल्यू और टेक्नोलॉजिकली एडवांस्ड उपकरणों का घरेलू उत्पादन बढ़ाया जाएगा। इसमें मल्टी-स्टोरी अपार्टमेंट्स के लिए लिफ्ट्स, फायरफाइटिंग इक्विपमेंट से लेकर मेट्रो निर्माण और हाई-ऐल्टीट्यूड रोड्स के लिए टनल बोरिंग मशीनें शामिल हैं। यह कदम भारत को आत्मनिर्भर बनाने और चीन जैसे देशों से आयात पर निर्भरता कम करने का प्रयास है, जहां से फिलहाल ऐसे उपकरणों का बड़ा हिस्सा आता है।

बजट में पब्लिक कैपिटल एक्सपेंडिचर को 11.2 लाख करोड़ से बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो इंफ्रास्ट्रक्चर-लेड ग्रोथ को सपोर्ट करेगा। इससे मेट्रो नेटवर्क का विस्तार तेज होगा, विशेष रूप से टियर-2 और टियर-3 शहरों में, जहां कनेक्टिविटी की कमी विकास को बाधित कर रही है। उदाहरण के लिए, हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए सात नए प्रोजेक्ट्स की घोषणा की गई है, जो रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को ट्रांसफॉर्म करेगा। ये कॉरिडोर देश के विभिन्न हिस्सों को जोड़ेंगे, जैसे दिल्ली-मुंबई, मुंबई-अहमदाबाद विस्तार, और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में नए लिंक, जिससे यात्रा समय 50% तक कम हो सकता है।

चीन को टक्कर देने के लिए बजट में रेयर अर्थ कॉरिडोर की स्थापना पर जोर दिया गया है। तमिलनाडु, केरल, ओडिशा और आंध्र प्रदेश में डेडिकेटेड रेयर अर्थ कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे, जो इलेक्ट्रॉनिक्स, EVs और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टरों के लिए कच्चे माल की सप्लाई सुनिश्चित करेंगे। चीन फिलहाल रेयर अर्थ बाजार का 80% से अधिक नियंत्रित करता है, लेकिन भारत के इस कदम से घरेलू सप्लाई चेन मजबूत होगी और आयात लागत 30-40% कम हो सकती है।

सिटी इकोनॉमिक रीजन्स (CERs) के विकास के लिए प्रति CER 50 अरब रुपये का आवंटन पांच वर्षों में किया जाएगा, जो चैलेंज-बेस्ड फ्रेमवर्क पर आधारित होगा। यह फंडिंग रिफॉर्म्स और परफॉर्मेंस बेंचमार्क से जुड़ी होगी, जिससे शहरों की इकोनॉमिक ग्रोथ को बूस्ट मिलेगा। उदाहरणस्वरूप, हैदराबाद और पुणे जैसे CERs में मेट्रो एक्सपेंशन और टनल प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता दी जाएगी, जो रोजगार सृजन और GDP योगदान बढ़ाएंगे।

बजट में सात रणनीतिक सेक्टरों पर सबसे बड़ा दांव लगाया गया है, जो भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने में मदद करेंगे। इन सेक्टरों में बड़े निवेश से MSMEs को सपोर्ट मिलेगा, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर होगा और एक्सपोर्ट बढ़ेगा, जो चीन की डोमिनेंस को चुनौती देगा। यहां इन सात सेक्टरों की डिटेल्ड ब्रेकडाउन है:

सेक्टरमुख्य फोकसआवंटन/इनिशिएटिव्सचीन को चुनौती
इंफ्रास्ट्रक्चर (मेट्रो और टनल)टनल बोरिंग मशीनों और मेट्रो उपकरणों का घरेलू उत्पादनCIE स्कीम के तहत 2 लाख करोड़ रुपये का निवेश, हाई-ऐल्टीट्यूड रोड्स और मेट्रो एक्सपेंशनचीन से आयात 70% कम, घरेलू क्षमता 50% बढ़ोतरी
मैन्युफैक्चरिंग (कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट)हाई-वैल्यू CIE का विकास, जैसे लिफ्ट्स और फायरफाइटिंग टूल्स1.5 लाख करोड़ का फंड, टियर-2 शहरों में क्लस्टर्सग्लोबल मार्केट शेयर में भारत की हिस्सेदारी 15% तक बढ़ेगी
सेमीकंडक्टरचिप मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स और सप्लाई चेन76,000 करोड़ की PLI स्कीम एक्सटेंशन, नए फैब यूनिट्सचीन की मोनोपॉली ब्रेक, भारत का एक्सपोर्ट 20% ग्रोथ
रेलवे (हाई-स्पीड रेल)सात नए कॉरिडोर का विकास1.2 लाख करोड़ का आवंटन, Vande Bharat ट्रेनों का उत्पादनस्पीड और कनेक्टिविटी में चीन जैसी क्षमता, लागत बचत 25%
एनर्जी और रिन्यूएबल्सरेयर अर्थ कॉरिडोर और बैटरी सिस्टम्स80,000 करोड़ का निवेश, EVs और सोलर प्लांट्सचीन पर निर्भरता 40% कम, ग्रीन एनर्जी एक्सपोर्ट बढ़ेगा
AI और डिजिटल इंफ्राइंटेलिजेंस-फर्स्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, AI इकोसिस्टम50,000 करोड़ का फंड, डिजिटल पब्लिक इंफ्रा एक्सपेंशनग्लोबल AI मार्केट में भारत की हिस्सेदारी 10%, चीन को टक्कर
MSMEs और बायोफार्माएसेट क्रिएशन और स्किलिंग1 लाख करोड़ की क्रेडिट गारंटी, बायोफार्मा क्लस्टर्सएक्सपोर्ट 30% बढ़ोतरी, चीन की सस्ती मैन्युफैक्चरिंग को चुनौती

इन सेक्टरों में निवेश से भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता में 20-25% की ग्रोथ अपेक्षित है। CIE स्कीम के तहत BHEL और L&T जैसी कंपनियां टनल बोरिंग मशीनों का उत्पादन शुरू करेंगी, जो फिलहाल चीन की कंपनियों जैसे CRRC से आयात होती हैं। हाल ही में भारत ने चीनी फर्मों पर लगे प्रतिबंधों को हटाने की योजना बनाई है, लेकिन घरेलू उत्पादन पर फोकस से लंबे समय में स्वतंत्रता मिलेगी।

रेलवे सेक्टर में सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का विकास देश की कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देगा। इनमें दिल्ली-चेन्नई, मुंबई-हैदराबाद, और कोलकाता-गुवाहाटी जैसे रूट शामिल हो सकते हैं, जो 300-350 km/h की स्पीड पर चलेंगे। इससे लॉजिस्टिक्स कॉस्ट 14% से घटकर 9% हो सकती है, जो चीन के हाई-स्पीड नेटवर्क से मुकाबला करने में मदद करेगा।

सेमीकंडक्टर सेक्टर में PLI स्कीम के एक्सटेंशन से नए प्लांट्स स्थापित होंगे, जैसे गुजरात और असम में फैब यूनिट्स। यह भारत को चिप मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भर बनाएगा, जहां चीन 60% बाजार नियंत्रित करता है। EVs और एडवांस्ड बैटरी सिस्टम्स पर फोकस से ऑटोमोटिव इंडस्ट्री बूस्ट होगी, जिसमें टाटा और महिंद्रा जैसी कंपनियां लाभान्वित होंगी।

एनर्जी सेक्टर में रेयर अर्थ कॉरिडोर से मिनरल एक्सट्रैक्शन बढ़ेगा, जो सोलर पैनल्स और विंड टरबाइन्स के लिए जरूरी है। इससे भारत की रिन्यूएबल एनर्जी कैपेसिटी 500 GW तक पहुंच सकती है, चीन की डोमिनेंस को कम करते हुए। AI और डिजिटल इंफ्रा में निवेश से डेटा सेंटर्स और क्लाउड कंप्यूटिंग का विकास होगा, जो Hitachi और GlobalLogic जैसी फर्मों को सपोर्ट करेगा।

MSMEs के लिए क्रेडिट गारंटी स्कीम से छोटे उद्यमियों को आसान फाइनेंस मिलेगा, जो मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स में भाग लेंगे। बायोफार्मा सेक्टर में असेट क्रिएशन से दवा उत्पादन बढ़ेगा, जो COVID जैसे संकटों में आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करेगा।

कुल मिलाकर, ये कदम भारत को ग्लोबल वैल्यू चेन में ऊपर उठाएंगे, जहां चीन की चुनौती का सामना करते हुए एक्सपोर्ट 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।

कुंजी पॉइंट्स:

CIE स्कीम: टनल मशीनों का उत्पादन शुरू, आयात पर 50% बचत।

CER डेवलपमेंट: 50 अरब रुपये प्रति रीजन, रिफॉर्म-बेस्ड फंडिंग।

रेयर अर्थ कॉरिडोर: चार राज्यों में स्थापना, मिनरल सप्लाई चेन मजबूत।

हाई-स्पीड रेल: सात कॉरिडोर, यात्रा समय में कटौती।

PLI एक्सटेंशन: सेमीकंडक्टर और EVs पर फोकस।

कैपेक्स बढ़ोतरी: 12.2 लाख करोड़, इंफ्रा ग्रोथ को बूस्ट।

MSME सपोर्ट: 1 लाख करोड़ क्रेडिट, स्किलिंग प्रोग्राम्स।

Disclaimer: यह लेख समाचार, रिपोर्ट और टिप्स पर आधारित है। सूत्रों का उल्लेख नहीं किया गया है।

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