“वृंदावन के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में हाल ही में लागू की गई नई रेलिंग व्यवस्था से भक्तों को धक्का-मुक्की से मुक्ति मिली है। 21,000 किलोग्राम वजनी स्लाइडिंग स्टील रेलिंग के जरिए कतारबद्ध दर्शन संभव हो गया है, जिससे भीड़ नियंत्रण बेहतर हुआ और दर्शन अधिक सुगम व सुरक्षित बन गए हैं। अलग प्रवेश-निकास मार्ग, बढ़े दर्शन समय और अन्य सुविधाओं से भक्तों को शांति और सुकून का अनुभव हो रहा है।”
बांके बिहारी मंदिर में भीड़ प्रबंधन के लिए नई रेलिंग व्यवस्था लागू
वृंदावन के ठाकुर श्री बांके बिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रबंधन समिति ने बड़ा कदम उठाया है। मंदिर परिसर में 21,000 किलोग्राम वजनी स्लाइडिंग और फोल्डिंग स्टील रेलिंग सिस्टम ट्रायल के बाद पूरी तरह लागू कर दिया गया है। यह व्यवस्था मुख्य रूप से गर्भगृह के आसपास की भीड़ को व्यवस्थित करने के लिए बनाई गई है, जहां पहले धक्का-मुक्की और असुविधा आम बात थी।
नई रेलिंग से तीन व्यवस्थित कतारें बनाई जा रही हैं, जो प्रवेश द्वारों पर लगाई गई हैं। इससे भक्त अब रेलिंग के अंदर से क्रमबद्ध तरीके से आगे बढ़कर दर्शन कर पा रहे हैं। प्रबंधन के अनुसार, यह बदलाव जनवरी-फरवरी 2026 में चरणबद्ध रूप से पूरा हुआ, जिसके बाद भक्तों की प्रतिक्रिया काफी सकारात्मक आई है। पहले जहां लाखों श्रद्धालु एक साथ उमड़ने पर सुरक्षा जोखिम बढ़ जाता था, अब नियंत्रित प्रवाह से हादसों की आशंका घटी है।
प्रवेश और निकास में नए नियम
भीड़ को और बेहतर ढंग से संभालने के लिए मंदिर में प्रवेश और निकास के रास्तों में स्पष्ट विभाजन किया गया है।
प्रवेश मुख्य रूप से गेट नंबर 2 और 3 से हो रहा है।
निकास गेट नंबर 1 और 4 से निर्धारित किया गया है।
यह अलग-अलग रूट सिस्टम आपसी टकराव को रोकता है और बाहर निकलने में आसानी देता है। पीक आवर्स में पुलिस, वॉलंटियर्स और सीसीटीवी की मदद से मॉनिटरिंग की जा रही है।
दर्शन समय में विस्तार और अन्य सुविधाएं
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई पावर कमिटी के निर्देश पर दर्शन के समय को बढ़ाया गया है, जो भीड़ वितरण में सहायक साबित हो रहा है। वर्तमान में:
शीतकाल (नवंबर-फरवरी) : सुबह 8:00 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक, शाम 4:00 बजे से रात 9:00 बजे तक।
ग्रीष्मकाल (मार्च-अक्टूबर) : सुबह 7:00 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक, शाम 4:15 बजे से रात 9:30 बजे तक।
श्रृंगार आरती सुबह के समय में क्रमशः 8:00-8:15 बजे (शीत) और 7:00-7:15 बजे (ग्रीष्म) होती है। राजभोग और शयन सेवा के दौरान दर्शन बंद रहते हैं।
अन्य महत्वपूर्ण बदलाव:
VIP दर्शन पास की व्यवस्था समाप्त या सख्त नियंत्रण में, सभी को समान कतार में अवसर।
सेवायतों के साथ जाने वाले यजमानों के लिए गेट नंबर 5 से अधिकतम 20 लोगों की अलग व्यवस्था।
वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों के लिए विशेष पाथवे और सुविधाएं प्रस्तावित।
पब्लिक एनाउंसमेंट से नियमों की जानकारी निरंतर दी जा रही है।
भक्तों को मिलने वाला सुकून
भक्तों का कहना है कि नई व्यवस्था से दर्शन में पहले की तुलना में काफी शांति मिल रही है। जहां पहले घंटों खड़े रहने के बाद भी ठाकुर जी का स्पष्ट दर्शन मुश्किल होता था, अब कतार में आगे बढ़ने की प्रक्रिया सुचारू है। विशेषकर त्योहारों और वीकेंड पर यह बदलाव राहतदायक साबित हो रहा है। प्रबंधन का लक्ष्य है कि भविष्य में लाइव स्ट्रीमिंग जैसी डिजिटल सुविधाएं भी जोड़ी जाएं, ताकि घर बैठे दर्शन संभव हो।
यह बदलाव मंदिर की प्राचीन परंपराओं को बनाए रखते हुए आधुनिक भीड़ प्रबंधन को अपनाने का उदाहरण है, जिससे लाखों भक्तों को सुरक्षित और सुखद अनुभव मिल रहा है।
Disclaimer: यह खबर विभिन्न सार्वजनिक सूत्रों पर आधारित है और केवल सूचनात्मक उद्देश्य से प्रकाशित की गई है। दर्शन से पहले मंदिर प्रशासन से नवीनतम अपडेट अवश्य जांच लें।



