सीबीएसई 10वीं मैथ्स पेपर खराब गया? टेंशन मत लो, दूसरा चांस मिलेगा – सुधार के लिए जानें पूरी डिटेल!

“सीबीएसई 10वीं मैथ्स पेपर अगर खराब हो गया तो घबराएं नहीं, नई दो बोर्ड एग्जाम पॉलिसी के तहत आप सुधार के लिए दूसरा एग्जाम दे सकते हैं। पहले एग्जाम में कमजोर प्रदर्शन के बाद भी बेहतर स्कोर लाकर फाइनल मार्कशीट में सुधार संभव है।”

सीबीएसई 10वीं मैथ्स पेपर खराब गया? सुधार का दूसरा मौका अभी बाकी है

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 2025-26 सेशन से क्लास 10 के लिए दो बोर्ड एग्जाम की व्यवस्था लागू की है, जिसका पहला फेज 17 फरवरी 2026 को मैथमेटिक्स पेपर से शुरू हुआ। मैथ्स स्टैंडर्ड और बेसिक दोनों पेपर में स्टूडेंट्स ने मॉडरेट से लेकर डिफिकल्ट लेवल की बात कही है। कई स्टूडेंट्स ने पेपर को लंबा और कॉम्पिटेंसी-बेस्ड क्वेश्चन चैलेंजिंग बताया। अगर आपका मैथ्स पेपर उम्मीद से कमजोर रहा तो परेशान होने की जरूरत नहीं।

CBSE की नई पॉलिसी के तहत पहला बोर्ड एग्जाम (फेज-1) सभी स्टूडेंट्स के लिए अनिवार्य है, जो 17 फरवरी से 11 मार्च 2026 तक चला। यह मुख्य एग्जाम माना जाता है। इसके बाद फेज-2 (दूसरा एग्जाम) मई-जून 2026 में होगा, जो इम्प्रूवमेंट, कंपार्टमेंट या सब्जेक्ट रिप्लेसमेंट के लिए उपलब्ध है।

मैथ्स में सुधार कैसे करें?

अगर आप मैथ्स में पास हो गए लेकिन स्कोर बढ़ाना चाहते हैं, तो इम्प्रूवमेंट कैटेगरी में अप्लाई कर सकते हैं।

स्टूडेंट्स अधिकतम तीन सब्जेक्ट्स (जैसे मैथ्स, साइंस, सोशल साइंस या लैंग्वेज) में इम्प्रूवमेंट के लिए दूसरा एग्जाम दे सकते हैं।

दोनों एग्जाम में से बेहतर स्कोर फाइनल मार्कशीट में कंसीडर किया जाएगा।

इंटरनल असेसमेंट (प्रैक्टिकल/इंटरनल मार्क्स) एक बार ही होता है और दोनों अटेम्प्ट में वैलिड रहता है।

कंपार्टमेंट कैटेगरी में क्या होगा?

अगर मैथ्स या कुल दो सब्जेक्ट्स में फेल हो गए, तो कंपार्टमेंट कैटेगरी में आते हैं।

कंपार्टमेंट स्टूडेंट्स फेज-2 एग्जाम में मैथ्स दोबारा दे सकते हैं।

फेल होने पर फेज-2 में मौका मिलता है, लेकिन तीन या अधिक सब्जेक्ट्स में फेल होने पर ‘एसेंशियल रिपीट’ कैटेगरी लगती है और अगले साल (2027) मुख्य एग्जाम देना पड़ता है।

अनफेयर मीन्स (नकल) पकड़े जाने पर भी कंपार्टमेंट कैटेगरी में आना पड़ सकता है, और सब्जेक्ट कैंसल हो सकता है।

फेज-2 एग्जाम की महत्वपूर्ण बातें

फेज-2 मई 15 से जून 1, 2026 के आसपास होने की संभावना है (टेंटेटिव डेट्स में मई अंत-जून शुरुआत में कंपार्टमेंट सब्जेक्ट्स शामिल)।

सिलेबस, एग्जाम पैटर्न और क्वेश्चन फॉर्मेट दोनों फेज में एक ही रहता है।

पहला एग्जाम मिस करने पर (अगर तीन या अधिक सब्जेक्ट्स) दूसरा एग्जाम का मौका नहीं मिलता।

सभी स्टूडेंट्स को फेज-1 में कम से कम तीन सब्जेक्ट्स अटेम्प्ट करने जरूरी हैं।

स्टूडेंट्स के लिए प्रैक्टिकल टिप्स

रिजल्ट का इंतजार करते हुए कमजोर टॉपिक्स (जैसे ट्रिग्नोमेट्री, सर्कल्स, कोऑर्डिनेट ज्योमेट्री) पर फोकस करें।

पिछले सालों के पेपर, NCERT एक्जांपल और कॉम्पिटेंसी-बेस्ड क्वेश्चन प्रैक्टिस करें।

अगर इम्प्रूवमेंट प्लान कर रहे हैं, तो फॉर्म भरने की डेट्स (आमतौर पर जुलाई-अगस्त में) चेक करते रहें।

मेंटल हेल्थ का ध्यान रखें – एक पेपर से भविष्य नहीं तय होता, दूसरा चांस उपलब्ध है।

यह नई पॉलिसी स्टूडेंट्स पर प्रेशर कम करने के लिए लाई गई है, ताकि एक खराब परफॉर्मेंस पूरे साल को प्रभावित न करे। मैथ्स जैसे महत्वपूर्ण सब्जेक्ट में बेहतर स्कोर पाने का मौका अब सीधे हाथ में है।

Disclaimer: यह आर्टिकल उपलब्ध जानकारी और CBSE की आधिकारिक गाइडलाइंस पर आधारित है। छात्र आधिकारिक वेबसाइट cbse.gov.in पर लेटेस्ट अपडेट्स चेक करें।

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