ईरान-अमेरिका तनाव: महाविनाश की ‘रेड लाइन’? मंगल का कुंभ गोचर और 3 मार्च का ‘ब्लड मून’ क्या आधी रात को शुरू होगी अमेरिका-ईरान की अंतिम जंग?

ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु समझौते पर बातचीत जारी है, लेकिन सैन्य तैनाती बढ़ने से युद्ध की आशंका गहरा गई है। ट्रंप प्रशासन ने ईरान को 10-15 दिनों का अल्टीमेटम दिया है, जबकि तेहरान ने सख्त रुख अपनाया है। ज्योतिषीय दृष्टि से मंगल का कुंभ गोचर (23 फरवरी से) और 3 मार्च का पूर्ण चंद्र ग्रहण (ब्लड मून) को कई लोग संघर्ष का संकेत मान रहे हैं, लेकिन वास्तविकता कूटनीति और सैन्य तैयारी पर टिकी है।

ईरान-अमेरिका तनाव: महाविनाश की ‘रेड लाइन’?

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब चरम पर पहुंच चुका है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को परमाणु कार्यक्रम पर जीरो एनरिचमेंट की शर्त मानने के लिए 10 से 15 दिनों का समय दिया है, अन्यथा सीमित या विस्तृत सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने कहा है कि तेहरान किसी भी दबाव में नहीं झुकेगा और आक्रामकता का मुंहतोड़ जवाब देगा।

जिनेवा में 26 फरवरी को होने वाली तीसरी दौर की अप्रत्यक्ष बातचीत से पहले अमेरिका ने मध्य पूर्व में अभूतपूर्व सैन्य तैनाती की है। दो एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप्स, दर्जनों फाइटर जेट्स, बॉम्बर्स और यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड सहित युद्धपोत क्षेत्र में तैनात हैं। यह तैनाती 2003 के इराक आक्रमण के बाद की सबसे बड़ी है। ईरान ने भी अपनी एयर डिफेंस और नौसेना बेस पर निरीक्षण तेज कर दिया है, जिसमें खातम ओल अंबिया एयर डिफेंस कमांडर और आर्म्ड फोर्सेस चीफ शामिल हैं।

परमाणु मुद्दे पर अमेरिका की मांग है कि ईरान को कोई यूरेनियम एनरिचमेंट की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए, जबकि ईरान इसे नागरिक ऊर्जा के लिए आवश्यक बताता है। जून 2025 में अमेरिका ने ईरान के फोर्डो, नतांज और इस्फहान पर हमले किए थे, जिससे कार्यक्रम को महीनों का झटका लगा। अब ईरान एक प्रस्ताव तैयार कर रहा है जिसमें सीमित एनरिचमेंट और आईएईए निरीक्षण की पेशकश है, लेकिन अमेरिका इसे अस्वीकार करने की तैयारी में है।

क्षेत्रीय प्रभाव भी गंभीर हैं। इजरायल संयुक्त कार्रवाई की तैयारी कर रहा है, जबकि गल्फ देश युद्ध से बचने की अपील कर रहे हैं। ईरान में घरेलू विरोध प्रदर्शन फिर से तेज हो गए हैं, जिसमें छात्र और युवा शामिल हैं। अमेरिका ने बेरूत दूतावास से गैर-जरूरी कर्मचारियों को निकाला है। तेल की कीमतें बढ़ीं, लेकिन बातचीत की खबर से थोड़ी गिरावट आई।

ज्योतिषीय नजरिया: मंगल कुंभ गोचर और ब्लड मून का संयोग

वैदिक ज्योतिष में 23 फरवरी 2026 से मंगल का कुंभ राशि में गोचर शुरू हुआ है, जो 2 अप्रैल तक रहेगा। यह गोचर राहु के साथ हो रहा है, जिससे अंगारक योग बन रहा है। ज्योतिषियों के अनुसार यह योग अचानक संघर्ष, विद्रोह, तकनीकी खराबी और हिंसक घटनाओं को बढ़ावा देता है। कुंभ राशि नवाचार और सामूहिक परिवर्तन से जुड़ी है, लेकिन मंगल की ऊर्जा इसे विस्फोटक बना सकती है।

इसके साथ ही 3 मार्च (भारतीय समयानुसार रात में) पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा, जिसे ब्लड मून कहा जाता है। चंद्रमा पृथ्वी की छाया में पूरी तरह ढक जाएगा और लाल-कॉपर रंग का दिखेगा। यह ग्रहण एशिया, ऑस्ट्रेलिया और उत्तरी अमेरिका में दिखेगा, कुलता लगभग 58 मिनट रहेगी। ज्योतिष शास्त्र में ब्लड मून को युद्ध, विनाश और बड़े बदलाव का संकेत माना जाता है, खासकर जब यह मंगल के गोचर के साथ हो।

कई ज्योतिषी इसे अमेरिका-ईरान संघर्ष की शुरुआत से जोड़ रहे हैं, क्योंकि 3 मार्च को आधी रात के आसपास ग्रहण होगा। हालांकि, यह संयोग वैज्ञानिक रूप से युद्ध का कारण नहीं है, लेकिन वैश्विक तनाव के बीच लोगों में डर पैदा कर रहा है।

संभावित परिदृश्य और प्रभाव

यदि बातचीत विफल हुई तो अमेरिका-इजरायल संयुक्त हमला संभव है, जो ईरान के मिसाइल इंफ्रास्ट्रक्चर, परमाणु साइट्स और कमांड सेंटर को निशाना बना सकता है। ईरान ने अब रक्षात्मक से आक्रामक रणनीति अपनाई है, जिसमें अमेरिकी ठिकानों पर हमले की धमकी है।

भारत के लिए प्रभाव:

तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे महंगाई बढ़ेगी।

खाड़ी में भारतीय प्रवासी प्रभावित हो सकते हैं।

वैश्विक बाजारों में अस्थिरता।

ईरान ने कहा है कि वह किसी भी आक्रमण को युद्ध की शुरुआत मानेगा और जवाब देगा। ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि यदि ईरान झुका नहीं तो परिणाम भयानक होंगे।

तुलनात्मक स्थिति

पक्षसैन्य ताकतप्रमुख मांग/रुखवर्तमान स्थिति
अमेरिका2 कैरियर ग्रुप्स, दर्जनों जेट्सजीरो एनरिचमेंटहमले की तैयारी, 10-15 दिन अल्टीमेटम
ईरानबैलिस्टिक मिसाइलें, प्रॉक्सी फोर्सनागरिक एनरिचमेंट का अधिकारसैन्य अलर्ट, प्रस्ताव तैयार
इजरायलउन्नत एयर डिफेंस, संयुक्त हमलाईरान का परमाणु खतरा खत्मयुद्ध की योजना

यह तनाव अब ‘रेड लाइन’ पर खड़ा है, जहां एक छोटी गलती महाविनाश का कारण बन सकती है। दुनिया की नजरें 26 फरवरी की जिनेवा बैठक और 3 मार्च के ब्लड मून पर टिकी हैं।

Disclaimer: यह लेख समाचार, रिपोर्ट और ज्योतिषीय विश्लेषण पर आधारित है। कोई भी निर्णय व्यक्तिगत जिम्मेदारी पर लें।

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