“केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के तहत वितरित चावल में पोषक तत्वों (फोर्टिफिकेशन) की प्रक्रिया को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। IIT खड़गपुर की स्टडी में लंबे भंडारण के दौरान पोषक तत्वों के क्षरण और शेल्फ लाइफ कम होने की बात सामने आई है। अब तक सामान्य चावल ही मिलेगा, जबकि पोषण वितरण के लिए बेहतर तंत्र विकसित होने तक इंतजार रहेगा।”
PMGKAY के तहत फ्री अनाज पर सरकार का बड़ा फैसला, चावल में बंद हुई पोषक तत्व मिलाने की प्रक्रिया
केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) सहित अन्य कल्याणकारी योजनाओं में चावल फोर्टिफिकेशन को तत्काल प्रभाव से अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया है। यह फैसला खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की समीक्षा और IIT खड़गपुर द्वारा की गई स्टडी के आधार पर लिया गया है। स्टडी में पाया गया कि फोर्टिफाइड राइस कर्नेल्स (FRK) और फोर्टिफाइड राइस (FR) लंबे समय तक भंडारण के दौरान माइक्रोन्यूट्रिएंट्स में कमी और शेल्फ लाइफ घटने के प्रति संवेदनशील हैं।
देश के विभिन्न एग्रो-क्लाइमेटिक जोन्स में वास्तविक भंडारण स्थितियों का आकलन करने वाली इस स्टडी से पता चला कि सरकारी खरीद की मात्रा और वार्षिक ऑफटेक को देखते हुए चावल 2 से 3 साल तक गोदामों में रहता है। इस दौरान फोर्टिफाइड चावल में आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन B12 जैसे पोषक तत्वों का स्तर काफी कम हो जाता है, जिससे पोषण संबंधी उद्देश्य प्रभावित होता है।
सरकार ने स्पष्ट किया कि यह रोक तब तक रहेगी, जब तक पोषक तत्वों के अधिक मजबूत और प्रभावी वितरण का कोई नया तंत्र विकसित और लागू नहीं हो जाता। फिलहाल PMGKAY, टारगेटेड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (TPDS), इंटीग्रेटेड चाइल्ड डेवलपमेंट सर्विसेज (ICDS), PM-POSHAN और अन्य योजनाओं में सामान्य चावल ही वितरित किया जाएगा।
फोर्टिफिकेशन कार्यक्रम 2018 में पायलट के रूप में शुरू हुआ था, जिसे 2022 में विस्तार दिया गया और मार्च 2024 तक सभी योजनाओं में अनिवार्य कर दिया गया था। इसका मुख्य लक्ष्य देशव्यापी कुपोषण और एनीमिया को कम करना था, खासकर महिलाओं और बच्चों में। कार्यक्रम पूरी तरह केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित था और फोर्टिफिकेशन की लागत भी केंद्र वहन करता था। अक्टूबर 2024 में कैबिनेट ने इसे दिसंबर 2028 तक जारी रखने की मंजूरी दी थी, जिसमें 17,082 करोड़ रुपये की लागत अनुमानित थी।
हर साल PMGKAY और संबंधित योजनाओं के लिए लगभग 372 लाख टन चावल की आवश्यकता होती है। सरकारी बफर स्टॉक में कुल उपलब्धता 674 लाख टन के आसपास बताई जा रही है। पिछले वर्षों से फोर्टिफाइड चावल के बड़े स्टॉक गोदामों में पड़े हैं, जिसके कारण भी यह फैसला लिया गया है।
मिलर्स और सप्लायर्स को इस फैसले से राहत मिली है क्योंकि फोर्टिफिकेशन प्रक्रिया में अतिरिक्त लागत और तकनीकी चुनौतियां थीं। हालांकि, पोषण विशेषज्ञों का मानना है कि यह अस्थायी रोक कुपोषण से लड़ाई में बाधा डाल सकती है, इसलिए सरकार को जल्द वैकल्पिक प्रभावी तरीके जैसे मल्टी-माइक्रोन्यूट्रिएंट सप्लीमेंट्स या अन्य फोर्टिफाइड फूड आइटम्स पर फोकस करना चाहिए।
यह कदम पोषण हस्तक्षेप की रणनीति में पुनर्संतुलन का संकेत है। सरकार ने जोर दिया कि सामान्य राशन वितरण और मिड-डे मील जैसी योजनाएं बिना किसी रुकावट के जारी रहेंगी।



