राकेश शर्मा ने अंतरिक्ष में किया योग, लोगों ने पूछा- भगवान मिले क्या? गगनयान से पहले जानें ये अनोखा सच

“भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा ने 1984 में सोयुज टी-11 मिशन पर स्पेस में जीरो ग्रैविटी योग किया, स्पेस सिकनेस से निपटने के लिए। वापसी पर लोगों ने पूछा क्या भगवान मिले, जिसका जवाब उन्होंने स्पष्ट नकार दिया। आज आईएसआरओ का गगनयान मिशन 2026 में पहला अनक्रूड टेस्ट फ्लाइट लेकर भारतीय अंतरिक्ष इतिहास को नया मोड़ देगा।”

भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा ने 1984 में सोवियत यूनियन के साथ संयुक्त मिशन पर सात दिन स्पेस में बिताए, जहां उन्होंने जीरो ग्रैविटी में योगासन किए ताकि मांसपेशियों की कमजोरी और स्पेस सिकनेस से बच सकें।

इस अभ्यास ने योग को अंतरिक्ष यात्रा में एक प्रभावी उपकरण साबित किया, जो अब आईएसआरओ के गगनयान कार्यक्रम में भी शामिल है, जहां एस्ट्रोनॉट्स को योग ट्रेनिंग दी जा रही है।

वापसी पर उत्सुक लोगों ने शर्मा से पूछा कि क्या स्पेस में योग करते हुए भगवान मिले, जिस पर उन्होंने हंसते हुए कहा कि नहीं मिले, बल्कि स्पेस ने उन्हें धरती की सुंदरता का नया नजरिया दिया।

यह एनिकडोट योग की स्पिरिचुअल इमेज और साइंटिफिक यूज को हाइलाइट करता है, जो आज भी एस्ट्रोनॉट ट्रेनिंग में रेलेवेंट है।

आईएसआरओ के लेटेस्ट अपडेट्स के मुताबिक, गगनयान का पहला अनक्रूड मिशन जी-1 फरवरी 2026 में लॉन्च होने वाला है, जिसमें ह्यूमनॉइड व्योममित्र टेस्ट करेगा कि स्पेस में योग जैसी एक्टिविटी कितनी कारगर हैं।

शर्मा की जर्नी ने भारत को स्पेस पावर बनाने की नींव रखी, और अब गगनयान से चार भारतीय एस्ट्रोनॉट्स स्पेस स्टेशन पर पहुंचेंगे, जहां योग को हेल्थ मैनेजमेंट का हिस्सा बनाया जाएगा।

राकेश शर्मा की प्रमुख उपलब्धियांविवरण
जन्म और शुरुआत1949 में पंजाब में जन्म, इंडियन एयर फोर्स में टेस्ट पायलट के रूप में करियर शुरू।
स्पेस मिशन1984 में सोयुज टी-11 पर भारत के पहले एस्ट्रोनॉट, 7 दिन 21 घंटे स्पेस में।
योग का उपयोगजीरो ग्रैविटी योग से स्पेस सिकनेस कंट्रोल, जो अब गगनयान ट्रेनिंग का हिस्सा।
पुरस्कारअशोक चक्र और सोवियत हीरो ऑफ सोशलिस्ट लेबर अवॉर्ड प्राप्त।
वर्तमान योगदानआईएसआरओ के सलाहकार के रूप में युवा एस्ट्रोनॉट्स को गाइड करते।

गगनयान मिशन में योग को इंटीग्रेट करने से एस्ट्रोनॉट्स की मेंटल हेल्थ सुधरेगी, क्योंकि स्पेस में आइसोलेशन से डिप्रेशन का खतरा रहता है।

शर्मा की कहानी से सीख: स्पेस यात्रा में योग न सिर्फ फिजिकल बल्कि मेंटल स्ट्रेंथ देता है, जो 2026 के गगनयान टेस्ट में साबित होगा।

योग के स्पेस बेनिफिट्स : सांस नियंत्रण से ऑक्सीजन यूज ऑप्टिमाइज, मसल टोन बनाए रखना।

गगनयान अपडेट : एचएलवीएम3 रॉकेट से लॉन्च, व्योममित्र रोबोट योग पोज टेस्ट करेगा।

भारतीय एस्ट्रोनॉट्स : प्रसंथ नायर, अजीत कृष्णन जैसे कैंडिडेट्स योग ट्रेनिंग ले रहे।

यह इतिहास गगनयान को सफल बनाने में प्रेरणा देता है, जहां भारत स्पेस में स्वतंत्र रूप से पहुंचेगा।

Disclaimer: यह लेख सूचना, रिपोर्ट और टिप्स प्रदान करने के उद्देश्य से है। स्रोतों की सटीकता की गारंटी नहीं।

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