“बजट 2026 में सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर पर कैपेक्स बढ़ा सकती है, फिस्कल डेफिसिट को 4% तक घटा सकती है, टैक्स राहत के जरिए निवेशकों को बूस्ट दे सकती है; एक्सपर्ट्स को इंफ्रा, डिफेंस और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में ग्रोथ की उम्मीद, जबकि बॉन्ड मार्केट फिस्कल डिसिप्लिन पर फोकस चाहता है।”
बजट 2026-27 में सरकार फिस्कल डेफिसिट को GDP के 4.0-4.1% तक सीमित रख सकती है, जो पिछले साल के 4.4% से कम होगा। इससे डेट-टू-GDP रेशियो को FY31 तक 50% पर लाने का लक्ष्य मजबूत होगा। एक्सपर्ट्स का मानना है कि प्राइमरी डेफिसिट पर कंट्रोल से मार्केट स्टेबिलिटी बढ़ेगी, लेकिन इक्विटी इन्वेस्टर्स ग्रोथ-ओरिएंटेड मेजर्स की उम्मीद कर रहे हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर पर फोकस बढ़ने से स्टॉक जैसे Larsen & Toubro और IRB Infrastructure में तेजी आ सकती है। सरकार कैपेक्स को 12 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ा सकती है, जो इकोनॉमिक ग्रोथ को 7% से ऊपर ले जाने में मदद करेगा। ग्लोबल हेडविंड्स जैसे US इकोनॉमी प्रेशर और FPI आउटफ्लो के बीच यह बफर का काम करेगा।
टैक्स राहत के मामले में पर्सनल इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव की संभावना है, जहां 15 लाख तक की इनकम पर छूट बढ़ सकती है। कॉरपोरेट टैक्स में रिडक्शन से मैन्युफैक्चरिंग और टेक सेक्टर को बूस्ट मिलेगा, जैसे Infosys और Tata Motors। GST रेशनलाइजेशन से कंज्यूमर गुड्स स्टॉक्स जैसे Hindustan Unilever में रिकवरी हो सकती है।
डिफेंस और सनराइज सेक्टर्स में एलोकेशन बढ़ने से Bharat Electronics और Hindustan Aeronautics जैसे स्टॉक्स पर पॉजिटिव इंपैक्ट पड़ेगा। एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि डिफेंस कैपेक्स को 6 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाया जा सकता है, जो इंडस्ट्री को आत्मनिर्भर बनाएगा।
बॉन्ड मार्केट बनाम इक्विटी की उम्मीदों में अंतर है। बॉन्ड इन्वेस्टर्स लोअर मार्केट बॉरोइंग और फिस्कल प्रूडेंस चाहते हैं, जबकि इक्विटी मार्केट FPI/FDI को आकर्षित करने वाले पॉलिसी इनिशिएटिव्स की मांग कर रहा है। बजट डे पर वोलैटिलिटी बढ़ सकती है, लेकिन सेक्टर-स्पेसिफिक रैलियां संभव हैं।
| सेक्टर | उम्मीदें | संभावित स्टॉक प्रभाव |
|---|---|---|
| इंफ्रास्ट्रक्चर | कैपेक्स में 15-20% बढ़ोतरी | L&T, Adani Ports में 10-15% उछाल |
| डिफेंस | एलोकेशन में 10% वृद्धि | BEL, HAL में ग्रोथ |
| टेक और मैन्युफैक्चरिंग | टैक्स इंसेंटिव्स | TCS, Reliance Industries में बूस्ट |
| फाइनेंशियल | लोअर टैक्स रिजीम | HDFC Bank, SBI में स्टेबिलिटी |
| कंज्यूमर गुड्स | GST रिडक्शन | ITC, Nestle में रिकवरी |
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बजट से मार्केट सेंटीमेंट कैशियस से कॉन्फिडेंट की ओर शिफ्ट हो सकता है, खासकर अगर सरकार नॉन-ट्रेडिशनल सेक्टर्स में इन्वेस्टमेंट बढ़ाए। FPI इनफ्लो को बढ़ावा देने के लिए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रिफॉर्म्स जरूरी हैं।
Disclaimer: यह लेख समाचार, रिपोर्ट्स और टिप्स पर आधारित है।