“भारतीय संविधान की रचना में डॉ. बी.आर. अंबेडकर की अध्यक्षता वाली समिति ने दुनिया के 60 देशों के संविधानों का गहन अध्ययन किया, जिसमें ब्रिटेन से संसदीय प्रणाली, अमेरिका से मौलिक अधिकार, आयरलैंड से राज्य नीति निर्देशक सिद्धांत जैसे प्रमुख विचार उधार लिए गए। यह लेख इन उधार ली गई विशेषताओं की विस्तृत सूची और उनके महत्व को स्पष्ट करता है, जो भारत की संघीय और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाते हैं।”
भारतीय संविधान को दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान माना जाता है, जिसमें 395 अनुच्छेद, 22 भाग और 12 अनुसूचियां हैं। इसकी रचना के लिए गठित मसौदा समिति ने करीब 60 देशों के संविधानों का गहन विश्लेषण किया, ताकि भारत की विविधता और आवश्यकताओं के अनुरूप सर्वोत्तम प्रावधान चुने जा सकें। इस प्रक्रिया में विभिन्न देशों से विशिष्ट विचार उधार लिए गए, जो भारत की शासन व्यवस्था को मजबूत बनाते हैं।
नीचे एक तालिका दी गई है, जिसमें प्रमुख देशों से उधार ली गई विशेषताओं की सूची है। प्रत्येक विशेषता के साथ उसका भारतीय संविधान में स्थान और महत्व भी बताया गया है:
| देश | उधार ली गई विशेषता | भारतीय संविधान में स्थान | महत्व |
|---|---|---|---|
| ब्रिटेन (United Kingdom) | संसदीय प्रणाली, विधायी प्रक्रिया, कैबिनेट सिस्टम, एकल नागरिकता, संसदीय विशेषाधिकार, द्विसदनीयता, विधि का शासन (Rule of Law), प्रिविलेज रिट्स (Prerogative Writs) | भाग 5 (संघ), अनुच्छेद 74 (मंत्रिपरिषद), अनुच्छेद 72 (क्षमादान), अनुच्छेद 105 (संसदीय विशेषाधिकार) | यह प्रणाली भारत में मंत्रीमंडल की सामूहिक जिम्मेदारी सुनिश्चित करती है, जहां प्रधानमंत्री वास्तविक कार्यकारी प्रमुख होता है। विधि का शासन सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होता है, जो लोकतंत्र की बुनियाद मजबूत करता है। द्विसदनीयता से लोकसभा और राज्यसभा के बीच संतुलन बना रहता है, जो संघीय ढांचे को स्थिरता प्रदान करता है। |
| संयुक्त राज्य अमेरिका (United States of America) | मौलिक अधिकार, न्यायिक समीक्षा, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, राष्ट्रपति का महाभियोग, उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की पदमुक्ति, उप-राष्ट्रपति का पद, प्रस्तावना | भाग 3 (मौलिक अधिकार, अनुच्छेद 12-35), अनुच्छेद 13 (न्यायिक समीक्षा), अनुच्छेद 124 (उच्चतम न्यायालय), अनुच्छेद 63 (उप-राष्ट्रपति) | मौलिक अधिकार नागरिकों को स्वतंत्रता, समानता और न्याय की गारंटी देते हैं। न्यायिक समीक्षा से विधायिका और कार्यपालिका के अतिरेक पर अंकुश लगता है, जो संवैधानिक सर्वोच्चता सुनिश्चित करता है। यह अमेरिकी बिल ऑफ राइट्स से प्रेरित है, जो भारत में मानवाधिकारों की रक्षा करता है। |
| आयरलैंड (Ireland) | राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांत, राष्ट्रपति का चुनाव तरीका, राज्यसभा के सदस्यों का नामांकन | भाग 4 (राज्य नीति निर्देशक सिद्धांत, अनुच्छेद 36-51), अनुच्छेद 55 (राष्ट्रपति चुनाव) | निर्देशक सिद्धांत सामाजिक-आर्थिक न्याय की दिशा में राज्य को मार्गदर्शन देते हैं, जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार। राष्ट्रपति का चुनाव अप्रत्यक्ष तरीके से होता है, जो संघीय भावना को बनाए रखता है। नामांकन से विशेषज्ञों को संसद में स्थान मिलता है। |
| कनाडा (Canada) | मजबूत केंद्र के साथ संघीय व्यवस्था, अवशिष्ट शक्तियों का केंद्र में निहित होना, राज्यपालों की केंद्र द्वारा नियुक्ति, उच्चतम न्यायालय की सलाहकारी क्षेत्राधिकार | भाग 11 (केंद्र-राज्य संबंध, अनुच्छेद 245-255), अनुच्छेद 143 (सलाहकारी क्षेत्राधिकार) | संघीय ढांचा भारत की विविधता को एकता में बांधता है। केंद्र की मजबूती से राष्ट्रीय मुद्दों पर एकरूपता बनी रहती है, जबकि राज्यपाल संघीय संतुलन बनाए रखते हैं। |
| ऑस्ट्रेलिया (Australia) | समवर्ती सूची, दो सदनों की संयुक्त बैठक, व्यापार-वाणिज्य की स्वतंत्रता | सातवीं अनुसूची (समवर्ती सूची), अनुच्छेद 108 (संयुक्त बैठक) | समवर्ती सूची से केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं, जैसे शिक्षा और पर्यावरण। संयुक्त बैठक से विधेयकों पर गतिरोध दूर होता है, जो संसदीय प्रक्रिया को सुगम बनाती है। |
| फ्रांस (France) | गणतंत्र की अवधारणा, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्श | प्रस्तावना | ये आदर्श भारतीय संविधान की आत्मा हैं, जो सामाजिक न्याय और लोकतंत्र को बढ़ावा देते हैं। गणतंत्र से राष्ट्रपति निर्वाचित प्रमुख होता है, जो राजतंत्र से अलग है। |
| जर्मनी (Germany) | आपातकालीन प्रावधान, मौलिक अधिकारों का निलंबन | भाग 18 (आपात प्रावधान, अनुच्छेद 352-360) | आपात से राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित होती है, लेकिन अधिकारों का निलंबन केवल आवश्यकता पर होता है, जो वीमार संविधान से प्रेरित है। |
| जापान (Japan) | विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया | अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता) | यह नागरिकों को मनमाने गिरफ्तारी से बचाता है, जो न्यायपूर्ण प्रक्रिया की गारंटी देता है। |
| दक्षिण अफ्रीका (South Africa) | संविधान संशोधन की प्रक्रिया | अनुच्छेद 368 | संशोधन से संविधान लचीला रहता है, जो समय के साथ बदलाव की अनुमति देता है, लेकिन मूल संरचना सुरक्षित रहती है। |
| सोवियत संघ (USSR) | प्रस्तावना में न्याय के आदर्श, मौलिक कर्तव्य (बाद में जोड़े गए) | प्रस्तावना, भाग 4A (मौलिक कर्तव्य, अनुच्छेद 51A) | सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय से समावेशी विकास होता है। कर्तव्य नागरिकों को जिम्मेदार बनाते हैं। |
ये विशेषताएं सिर्फ प्रमुख देशों से ली गई हैं, लेकिन समिति ने 60 देशों के संविधानों का अध्ययन किया, जिसमें स्विट्जरलैंड से जनमत संग्रह की अवधारणा, न्यूजीलैंड से कुछ विधायी प्रक्रियाएं और अन्य यूरोपीय देशों से सामाजिक कल्याण के विचार शामिल हैं। उदाहरण के लिए, ब्रिटेन की संसदीय प्रणाली भारत में अनुकूलित की गई, जहां लोकसभा की प्रधानता है, लेकिन राज्यसभा क्षेत्रीय हितों की रक्षा करती है। अमेरिका से ली गई न्यायिक समीक्षा ने केसरी बनाम मद्रास राज्य जैसे मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जहां मौलिक अधिकारों की रक्षा हुई।
आयरलैंड के निर्देशक सिद्धांत भारत में सामाजिक सुधारों की नींव बने, जैसे ग्राम पंचायतों का प्रावधान (अनुच्छेद 40) जो गांधीवादी विचारों से जुड़ा है। कनाडा की संघीय व्यवस्था से भारत में तीन सूचियां बनीं – संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची – जो शक्तियों का स्पष्ट विभाजन करती हैं। ऑस्ट्रेलिया से ली गई व्यापार स्वतंत्रता ने अंतरराज्यीय व्यापार को बढ़ावा दिया, जो आर्थिक एकीकरण के लिए जरूरी है।
फ्रांस से प्रेरित बंधुत्व ने भारत की सांस्कृतिक विविधता को एकजुट किया, जबकि जर्मनी के आपात प्रावधानों ने 1975 के आपातकाल जैसे समय में उपयोगिता दिखाई, हालांकि दुरुपयोग पर बहस हुई। जापान की प्रक्रिया ने अनुच्छेद 21 को मजबूत बनाया, जो व्यक्तिगत अधिकारों की रक्षा करता है। दक्षिण अफ्रीका से संशोधन प्रक्रिया ने अब तक 106 संशोधन संभव बनाए, जैसे जीएसटी लागू करने वाला 101वां संशोधन। सोवियत संघ से न्याय के आदर्श ने पंचवर्षीय योजनाओं और कल्याणकारी राज्य की अवधारणा को बढ़ावा दिया।
इन उधार ली गई विशेषताओं ने भारतीय संविधान को एक संश्लेषित दस्तावेज बनाया, जो विश्व के सर्वोत्तम तत्वों को भारत की मिट्टी में रचा। समिति ने इन विचारों को भारतीय संदर्भ में ढाला, जैसे मौलिक अधिकारों में धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25-28) जो भारत की बहुलता को ध्यान में रखती है।
प्रमुख बिंदु:
संविधान सभा ने 2 साल, 11 महीने और 18 दिनों में संविधान तैयार किया।
डॉ. अंबेडकर ने कहा कि संविधान “बैग ऑफ बोरोइंग्स” है, लेकिन यह भारतीय आवश्यकताओं के अनुरूप है।
60 देशों के अध्ययन से भारत ने लोकतंत्र, संघवाद और न्याय की मजबूत नींव रखी।
उधार ली गई विशेषताएं भारत को विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र बनाती हैं, जहां 1.4 अरब लोग संवैधानिक ढांचे में रहते हैं।
यह प्रक्रिया दर्शाती है कि संविधान कोई कॉपी नहीं, बल्कि एक सृजनात्मक मिश्रण है, जो वैश्विक ज्ञान से भारत को लाभान्वित करता है।
Disclaimer: This article is based on news, reports, tips, and sources.