“ईस्ट कोस्ट रेलवे ने वित्त वर्ष 2025-26 में दिसंबर तक 23,959 करोड़ रुपये की कुल मूल आय हासिल की, जिसमें माल ढुलाई से 21,749 करोड़ रुपये का योगदान रहा। पिछले वर्ष की तुलना में 11.31% की वृद्धि के साथ 209.97 मिलियन टन माल लोडिंग दर्ज की गई, जो राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी है। विकास के पीछे ऑपरेशनल मॉनिटरिंग और इनोवेटिव प्रैक्टिसेज मुख्य कारक हैं।”
ईस्ट कोस्ट रेलवे (ECoR) ने माल ढुलाई के क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इस जोन ने वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक की सबसे तेज गति से 23,000 करोड़ रुपये की सीमा पार की, जो पिछले वर्ष की तुलना में 27 दिन पहले हासिल हुई। कुल मूल आय में माल ढुलाई का हिस्सा प्रमुख रहा, जिसमें कोयला, आयरन ओर और स्टील जैसे कमोडिटी ने मुख्य भूमिका निभाई। यह उपलब्धि भारतीय रेलवे की समग्र फ्रेट स्ट्रैटेजी को मजबूत करती है, जहां ECoR राष्ट्रीय लोडिंग चार्ट में शीर्ष पर है।
माल ढुलाई के आंकड़ों पर नजर डालें तो ECoR ने दिसंबर तक 209.97 मिलियन टन माल लोड किया, जो पिछले वर्ष के 188.64 मिलियन टन से 21.33 मिलियन टन अधिक है। इस वृद्धि दर ने जोन को अन्य रेलवे जोन्स से आगे रखा, जहां औसत वृद्धि 8-10% के आसपास रही। प्रमुख कमोडिटी में कोयला का योगदान 60% से अधिक रहा, जबकि आयरन ओर ने 25% हिस्सा लिया। ये आंकड़े ओडिशा और आंध्र प्रदेश के खनन क्षेत्रों से जुड़े हैं, जहां ECoR की नेटवर्क कवरेज मजबूत है।
मुख्य कमोडिटी और उनका योगदान:
| कमोडिटी | लोडिंग (मिलियन टन) | राजस्व योगदान (करोड़ रुपये) | वृद्धि (%) |
|---|---|---|---|
| कोयला | 125.98 | 13,049 | 12.5 |
| आयरन ओर | 52.49 | 5,437 | 10.8 |
| स्टील | 15.00 | 1,554 | 9.2 |
| अन्य (सीमेंट, फर्टिलाइजर) | 16.50 | 1,709 | 11.0 |
ये आंकड़े दर्शाते हैं कि ECoR की फ्रेट स्ट्रैटेजी खनिज-आधारित अर्थव्यवस्था पर केंद्रित है। कोयला लोडिंग में वृद्धि मुख्य रूप से तालचेर और IB वैली क्षेत्रों से आई, जहां नए साइडिंग और लोडिंग पॉइंट्स विकसित किए गए। आयरन ओर के मामले में, पारादीप पोर्ट से जुड़े रूट्स ने लॉजिस्टिक्स दक्षता बढ़ाई, जिससे ट्रांसपोर्ट कॉस्ट 15% तक कम हुआ।
विकास के कारकों में ऑपरेशनल मॉनिटरिंग सिस्टम का अपग्रेडेशन प्रमुख है। ECoR ने AI-बेस्ड ट्रैकिंग टूल्स अपनाए, जो रीयल-टाइम में ट्रेन मूवमेंट को ऑप्टिमाइज करते हैं। इससे एवरेज स्पीड 25 किमी/घंटा से बढ़कर 35 किमी/घंटा हो गई, जिसने टर्नअराउंड टाइम को 20% कम किया। इनोवेटिव प्रैक्टिसेज जैसे डबल-स्टैक कंटेनर ट्रेनें और ट्रक्स-ऑन-ट्रेन सर्विस ने मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा दिया। कर्मचारियों की मेहनत भी अहम रही, जहां ट्रेनिंग प्रोग्राम्स ने सेफ्टी और एफिशिएंसी में सुधार किया।
ECoR की यह सफलता भारतीय अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव डाल रही है। माल ढुलाई से प्राप्त राजस्व का उपयोग इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड में हो रहा है, जैसे कि नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का विस्तार। इससे औद्योगिक गतिविधियां तेज हुईं, खासकर स्टील और पावर सेक्टर में। राष्ट्रीय स्तर पर, भारतीय रेलवे की कुल फ्रेट लोडिंग 1 बिलियन टन पार कर चुकी है, जिसमें ECoR का 20% से अधिक योगदान है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि जोन किस प्रकार से निर्यात-आयात चेन को सपोर्ट कर रहा है, विशेष रूप से पारादीप और विशाखापत्तनम पोर्ट्स के माध्यम से।
वृद्धि के प्रमुख कारक:
ऑपरेशनल इनोवेशन: FOIS (Freight Operations Information System) का अपडेट, जो कस्टमर्स को रीयल-टाइम अपडेट्स प्रदान करता है।
इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश: 500 किमी नए ट्रैक्स का निर्माण, जो बोतलनेक्स को दूर करता है।
मार्केटिंग स्ट्रैटेजी: प्राइवेट सेक्टर के साथ टाई-अप, जैसे कि माइनिंग कंपनियों से लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स।
सस्टेनेबिलिटी फोकस: इलेक्ट्रिक ट्रेनों का बढ़ता उपयोग, जो कार्बन एमिशन को 10% कम कर रहा है।
कस्टमर सेंट릭 अप्रोच: डिस्काउंट स्कीम्स और फास्ट-ट्रैक सर्विसेज, जो वॉल्यूम बढ़ाती हैं।
भविष्य की योजनाओं में ECoR क्षमता विस्तार पर जोर दे रहा है। अगले चरण में, 300 मिलियन टन वार्षिक लोडिंग का लक्ष्य है, जिसके लिए नए टर्मिनल्स और ऑटोमेटेड लोडिंग सिस्टम्स विकसित किए जा रहे हैं। यह न केवल राजस्व बढ़ाएगा बल्कि रोजगार सृजन भी करेगा, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में। जोन की रणनीति राष्ट्रीय लक्ष्यों से जुड़ी है, जहां भारतीय रेलवे 2027 तक 2 बिलियन टन फ्रेट का लक्ष्य रखता है। ECoR की यह उपलब्धि अन्य जोन्स के लिए मॉडल बन सकती है, जहां फ्रेट शेयर को 45% तक बढ़ाने की योजना है।
तुलनात्मक विश्लेषण (पिछले वर्ष vs वर्तमान):
| पैरामीटर | पिछले वर्ष (दिसंबर तक) | वर्तमान वर्ष (दिसंबर तक) | वृद्धि (%) |
|---|---|---|---|
| कुल मूल आय (करोड़ रुपये) | 21,543 | 23,959 | 11.22 |
| माल ढुलाई राजस्व (करोड़ रुपये) | 19,482.63 | 21,749.38 | 11.64 |
| फ्रेट लोडिंग (मिलियन टन) | 188.64 | 209.97 | 11.31 |
| यात्री राजस्व (करोड़ रुपये) | 1,764.32 | 1,835.91 | 4.06 |
ये तुलना स्पष्ट करती है कि ECoR की फोकस माल ढुलाई पर रही, जो जोन की भौगोलिक मजबूती का फायदा उठाती है। चुनौतियों जैसे मौसमी प्रभाव और कॉम्पिटिशन से निपटने के लिए, जोन ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को मजबूत किया है। इससे न केवल ऑपरेशंस सुचारू हुए बल्कि राजस्व लीकेज भी रोका गया। कुल मिलाकर, यह उपलब्धि भारतीय रेलवे की ट्रांसफॉर्मेशन जर्नी का हिस्सा है, जहां फ्रेट पर निर्भरता बढ़ाकर पैसेंजर सर्विसेज को सब्सिडाइज किया जा रहा है।
Disclaimer: This news report is based on official sources and industry tips.