CBSE ने संबद्ध स्कूलों के लिए नए नियम जारी किए हैं, जिसमें हर 500 छात्रों पर एक सोशियो-इमोशनल काउंसलर और क्लास 9 से 12 के लिए एक करियर काउंसलर की नियुक्ति अनिवार्य है। यह फैसला छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत करने और पढ़ाई के दबाव को कम करने के उद्देश्य से लिया गया है, जिसमें काउंसलरों की न्यूनतम योग्यता स्नातक स्तर पर साइकोलॉजी या गाइडेंस में डिप्लोमा निर्धारित की गई है। स्कूलों को इन नियमों का पालन न करने पर संबद्धता रद्द होने का खतरा है, और यह बदलाव छात्रों को करियर विकल्पों में बेहतर मार्गदर्शन प्रदान करेगा।
CBSE बोर्ड का फैसला: पढ़ाई का दबाव कम करने के लिए सभी स्कूलों को रखना होगा करियर काउंसलर
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने हाल ही में अपने संबद्धता नियमों में संशोधन किया है, जिसके तहत सभी संबद्ध स्कूलों को छात्रों के सोशियो-इमोशनल स्वास्थ्य और करियर गाइडेंस के लिए समर्पित काउंसलर नियुक्त करने होंगे। यह कदम छात्रों पर बढ़ते शैक्षणिक दबाव को देखते हुए उठाया गया है, जहां राष्ट्रीय स्तर पर सर्वेक्षणों से पता चला है कि 70% से अधिक हाई स्कूल छात्र तनाव और चिंता से प्रभावित हैं। नए नियमों के अनुसार, हर 500 छात्रों पर एक सोशियो-इमोशनल काउंसलर की आवश्यकता होगी, जो छात्रों की भावनात्मक जरूरतों को संबोधित करेगा, जबकि क्लास 9 से 12 के छात्रों के लिए अलग से एक करियर काउंसलर नियुक्त किया जाएगा, जो उन्हें भविष्य के विकल्पों पर सलाह देगा।
ये बदलाव CBSE के संबद्धता बायलॉज के क्लॉज 12.1 में शामिल किए गए हैं, जहां स्पष्ट रूप से कहा गया है कि स्कूलों को नियमित आधार पर इन पदों को भरना होगा। यदि कोई स्कूल इन मानदंडों का पालन नहीं करता, तो उसकी संबद्धता रद्द की जा सकती है या नवीनीकरण रोका जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला न केवल छात्रों के प्रदर्शन को बेहतर बनाएगा बल्कि ड्रॉपआउट दर को भी 15-20% तक कम कर सकता है, जैसा कि पहले के पायलट प्रोजेक्ट्स में देखा गया है।
नए नियमों की मुख्य विशेषताएं
सोशियो-इमोशनल काउंसलर : हर 500 छात्रों पर एक काउंसलर अनिवार्य। इनकी भूमिका छात्रों के तनाव प्रबंधन, पीयर प्रेशर और मानसिक स्वास्थ्य मुद्दों पर फोकस होगी। न्यूनतम योग्यता: साइकोलॉजी में स्नातक या गाइडेंस एंड काउंसलिंग में पोस्टग्रेजुएट डिप्लोमा।
करियर काउंसलर : क्लास 9 से 12 के लिए हर 500 छात्रों पर एक। ये छात्रों को करियर विकल्पों, स्किल डेवलपमेंट और उच्च शिक्षा के बारे में मार्गदर्शन देंगे। योग्यता: करियर काउंसलिंग में स्पेशलाइज्ड डिग्री या समकक्ष अनुभव।
छोटे स्कूलों के लिए प्रावधान : 500 से कम छात्रों वाले स्कूलों को भी कम से कम एक पार्ट-टाइम काउंसलर रखना होगा, जो बोर्ड की गाइडलाइंस के अनुसार कार्य करेगा।
ट्रेनिंग और मॉनिटरिंग : CBSE स्कूलों को काउंसलरों की ट्रेनिंग के लिए वर्कशॉप आयोजित करने का निर्देश देगा, और अनुपालन की जांच के लिए वार्षिक ऑडिट अनिवार्य होगा।
इन नियमों का प्रभाव छात्रों के दैनिक जीवन पर सीधा पड़ेगा। उदाहरण के लिए, करियर काउंसलर छात्रों को व्यक्तिगत सत्रों में STEM फील्ड्स, आर्ट्स या वोकेशनल कोर्सेज के बारे में सलाह देंगे, जिससे वे अपने इंटरेस्ट के अनुसार निर्णय ले सकेंगे। एक हालिया रिपोर्ट में पाया गया कि जहां काउंसलिंग सुविधा उपलब्ध स्कूलों में छात्रों की संतुष्टि दर 85% है, वहीं बिना काउंसलिंग वाले स्कूलों में यह मात्र 55% है।
काउंसलरों की भूमिका में विस्तार
सोशियो-इमोशनल काउंसलर न केवल व्यक्तिगत सत्र आयोजित करेंगे बल्कि स्कूल स्तर पर वर्कशॉप भी चलाएंगे, जैसे कि स्ट्रेस मैनेजमेंट सेशन्स या माइंडफुलनेस एक्टिविटीज। करियर काउंसलर छात्रों को अप्रेंटिसशिप प्रोग्राम्स, स्कॉलरशिप्स और जॉब मार्केट ट्रेंड्स के बारे में अपडेट रखेंगे। उदाहरणस्वरूप, 2026 के जॉब मार्केट में AI, रिन्यूएबल एनर्जी और डिजिटल मार्केटिंग जैसे फील्ड्स में 30% ग्रोथ की उम्मीद है, और काउंसलर छात्रों को इन क्षेत्रों के लिए तैयार करेंगे।
स्कूल प्रशासकों के लिए यह एक चुनौती भी है, क्योंकि काउंसलरों की सैलरी और ट्रेनिंग पर अतिरिक्त खर्च आएगा, जो औसतन 5-10 लाख रुपये प्रति वर्ष हो सकता है। हालांकि, CBSE ने सरकारी सहायता और प्राइवेट पार्टनरशिप्स के माध्यम से मदद का आश्वासन दिया है।
प्रभावित क्षेत्र और आंकड़े
| क्षेत्र | प्रभाव | आंकड़े |
|---|---|---|
| छात्र तनाव कमी | व्यक्तिगत गाइडेंस से मानसिक स्वास्थ्य में सुधार | राष्ट्रीय सर्वे: 70% छात्र तनावग्रस्त, काउंसलिंग से 40% कमी संभव |
| करियर चयन | बेहतर विकल्प उपलब्ध | 60% छात्र करियर अनिश्चितता से प्रभावित, काउंसलिंग से 25% बेहतर निर्णय |
| स्कूल अनुपालन | संबद्धता जोखिम | 10,000+ CBSE स्कूल प्रभावित, 20% छोटे स्कूलों को चुनौती |
| जॉब मार्केट तैयारी | स्किल-बेस्ड एडवाइस | 2026 में 15 मिलियन नई जॉब्स, छात्रों को ट्रेनिंग जरूरी |
ये आंकड़े विभिन्न शैक्षणिक रिपोर्ट्स पर आधारित हैं, जो दिखाते हैं कि काउंसलिंग की कमी से छात्रों का प्रदर्शन 15-20% प्रभावित होता है। नए नियमों से विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में सुधार आएगा, जहां काउंसलिंग सुविधाएं न्यूनतम हैं।
स्कूलों के लिए कार्यान्वयन टाइमलाइन
तत्काल प्रभाव : नए संबद्धता आवेदनों में अनिवार्य।
मौजूदा स्कूल : 2026-27 सत्र से पूर्ण अनुपालन।
मॉनिटरिंग : CBSE पोर्टल पर रिपोर्टिंग सिस्टम, जहां स्कूल काउंसलर डिटेल्स अपलोड करेंगे।
सहायता : बोर्ड द्वारा ऑनलाइन ट्रेनिंग मॉड्यूल्स उपलब्ध, जिसमें NCERT के साथ साझेदारी शामिल।
इस फैसले से अभिभावकों को भी राहत मिलेगी, क्योंकि वे अब स्कूलों से छात्रों के समग्र विकास की उम्मीद कर सकते हैं। करियर काउंसलर छात्रों को NEET, JEE जैसे एंट्रेंस एग्जाम्स के अलावा अल्टरनेटिव पाथ्स जैसे स्टार्टअप या फ्रीलांसिंग पर भी फोकस करेंगे। एक केस स्टडी में, दिल्ली के एक CBSE स्कूल में काउंसलिंग प्रोग्राम से छात्रों की ग्रेजुएशन दर 90% पहुंच गई।
चुनौतियां और समाधान
हालांकि, काउंसलरों की उपलब्धता एक मुद्दा है, क्योंकि भारत में योग्य काउंसलरों की संख्या मात्र 50,000 के आसपास है, जबकि जरूरत 1 लाख से अधिक की है। CBSE ने यूनिवर्सिटी पार्टनरशिप्स के माध्यम से ट्रेनिंग प्रोग्राम्स बढ़ाने का प्लान बनाया है। इसके अलावा, डिजिटल टूल्स जैसे ऐप-बेस्ड काउंसलिंग को इंटीग्रेट करने की सलाह दी गई है, जो छात्रों को 24/7 सपोर्ट प्रदान करेगी।
अंत में, यह फैसला शिक्षा प्रणाली में एक सकारात्मक बदलाव है, जो छात्रों को सिर्फ किताबी ज्ञान से आगे ले जाएगा।
Disclaimer: यह समाचार रिपोर्ट है, स्रोतों पर आधारित टिप्स और जानकारी प्रदान करती है।