Budget 2026: नई टैक्स रिजीम वालों की बल्ले-बल्ले? हेल्थ इंश्योरेंस और होम लोन पर मिल सकती है राहत

“वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में नई टैक्स रिजीम को आकर्षक बनाने के लिए हेल्थ इंश्योरेंस और होम लोन इंटरेस्ट पर डिडक्शन की उम्मीद है, जहां 30% टैक्स ब्रैकेट वाले करदाताओं को 60,000 रुपये तक की बचत हो सकती है; स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाने और टैक्स स्लैब्स में बदलाव की भी संभावना, मिडिल क्लास को राहत देने पर फोकस।”

नई टैक्स रिजीम में बदलाव की उम्मीदें

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की नौवीं बजट प्रस्तुति में नई टैक्स रिजीम को मजबूत करने के लिए कई प्रस्ताव चर्चा में हैं। वर्तमान में नई रिजीम में कोई डिडक्शन नहीं मिलता, जबकि पुरानी रिजीम में सेक्शन 80C, 80D और 24(b) के तहत लाभ उपलब्ध हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बजट 2026 में नई रिजीम में हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर 25,000 रुपये तक का डिडक्शन और होम लोन इंटरेस्ट पर 2 लाख रुपये तक की छूट शामिल की जा सकती है। इससे 5 लाख से ऊपर की आय वाले करदाताओं को सीधा फायदा होगा, खासकर महंगाई और बढ़ते मेडिकल खर्चों के बीच।

अगर ये बदलाव लागू होते हैं, तो एक 15 लाख रुपये की वार्षिक आय वाले व्यक्ति को होम लोन इंटरेस्ट पर 2 लाख की छूट से 60,000 रुपये की टैक्स बचत हो सकती है, जबकि हेल्थ इंश्योरेंस पर 25,000 रुपये की छूट से अतिरिक्त 7,500 रुपये की राहत मिलेगी। यह कदम नई रिजीम को अपनाने वाले 70% से ज्यादा करदाताओं को प्रोत्साहित करेगा, जो वर्तमान में पुरानी रिजीम की तुलना में कम लाभ पाते हैं।

हेल्थ इंश्योरेंस डिडक्शन: क्या होगा फायदा?

हेल्थ इंश्योरेंस पर डिडक्शन की मांग लंबे समय से है, क्योंकि COVID-19 के बाद मेडिकल कवरेज की जरूरत बढ़ी है। बजट 2026 में सेक्शन 80D जैसा लाभ नई रिजीम में जोड़ने की संभावना है, जहां व्यक्तिगत पॉलिसी पर 25,000 रुपये और सीनियर सिटीजन पैरेंट्स के लिए 50,000 रुपये तक की छूट मिल सकती है। इससे कुल टैक्सेबल इनकम कम होगी, और 20-30% टैक्स ब्रैकेट में आने वाले लोग सालाना 5,000 से 15,000 रुपये बचा सकेंगे।

उदाहरण के तौर पर, अगर एक परिवार का हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम 40,000 रुपये है, तो नई रिजीम में छूट मिलने पर 30% टैक्स रेट वाले व्यक्ति को 12,000 रुपये की बचत होगी। यह बदलाव आयुष्मान भारत जैसी सरकारी स्कीम्स के साथ मिलकर हेल्थकेयर एक्सेस को बढ़ावा देगा, जहां वर्तमान में 50 करोड़ से ज्यादा लोग कवर हैं लेकिन प्राइवेट इंश्योरेंस की दरें 15-20% सालाना बढ़ रही हैं।

होम लोन इंटरेस्ट पर राहत: मिडिल क्लास की उम्मीद

आय ब्रैकेट (रुपये में)हेल्थ इंश्योरेंस डिडक्शन (रुपये)अनुमानित टैक्स बचत (30% रेट पर)
7-10 लाख25,0007,500
10-15 लाख25,000 + 25,000 (पैरेंट्स)15,000
15 लाख से ऊपर50,000 (सीनियर सिटीजन)15,000-22,500

होम लोन पर इंटरेस्ट डिडक्शन नई रिजीम में न होने से कई लोग पुरानी रिजीम चुनते हैं। बजट 2026 में सेक्शन 24(b) जैसा प्रावधान जोड़ने की चर्चा है, जहां सेल्फ-ऑक्यूपाइड प्रॉपर्टी पर 2 लाख रुपये तक की छूट मिल सकती है। इससे हाउसिंग सेक्टर को बूस्ट मिलेगा, जहां वर्तमान में होम लोन रेट्स 8.5-9.5% के बीच हैं और EMI负担 बढ़ रहा है।

एक 50 लाख रुपये के होम लोन पर सालाना इंटरेस्ट 4 लाख रुपये तक हो सकता है, लेकिन छूट सिर्फ 2 लाख पर मिलने से 30% टैक्स ब्रैकेट में 60,000 रुपये की बचत होगी। यह कदम अफोर्डेबल हाउसिंग को बढ़ावा देगा, जहां PMAY स्कीम के तहत 2025 तक 2 करोड़ घर बनाए गए हैं और 2026 में टारगेट 1 करोड़ और है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इससे रियल एस्टेट सेक्टर में 10-15% ग्रोथ हो सकती है।

की पॉइंट्स होम लोन राहत के:

वर्तमान पुरानी रिजीम: 2 लाख रुपये तक इंटरेस्ट डिडक्शन।

प्रस्तावित नई रिजीम: समान छूट, लेकिन लेट-आउट प्रॉपर्टी पर लिमिट बढ़ाने की मांग।

प्रभाव: मेट्रो सिटीज में जहां प्रॉपर्टी प्राइस 1 करोड़ से ऊपर हैं, EMI 50,000 रुपये मंथली से कम हो सकती है।

अतिरिक्त लाभ: प्रिंसिपल रीपेमेंट पर सेक्शन 80C के तहत 1.5 लाख की छूट को भी शामिल करने की संभावना।

टैक्स स्लैब्स और अन्य बदलाव

बजट 2026 में नई रिजीम के टैक्स स्लैब्स में भी सुधार की उम्मीद है। वर्तमान में 3-6 लाख पर 5%, 6-9 लाख पर 10%, 9-12 लाख पर 15%, 12-15 लाख पर 20% और 15 लाख से ऊपर 30% है। प्रस्ताव है कि 15 लाख तक की आय पर मैक्सिमम 20% टैक्स लगे, जिससे मिडिल क्लास को 50,000 रुपये तक की अतिरिक्त बचत हो। स्टैंडर्ड डिडक्शन को 50,000 से बढ़ाकर 75,000 रुपये करने की भी मांग है।

सीनियर सिटीजन के लिए स्पेशल राहत: हेल्थ डिडक्शन को 1 लाख तक बढ़ाया जा सकता है, जबकि इंटरेस्ट इनकम पर टैक्स छूट 50,000 से 75,000 रुपये हो सकती है। यह बदलाव महंगाई रेट 5-6% के बीच रहने पर फोकस्ड है, जहां CPI इंडेक्स 2025 में 4.5% रहा।

फिस्कल डेफिसिट और इकोनॉमिक इम्पैक्ट

मौजूदा नई रिजीम स्लैब्सप्रस्तावित बदलावअनुमानित बचत (15 लाख आय पर)
0-3 लाख: 0%कोई बदलाव नहीं
3-7 लाख: 5%3-8 लाख: 5%5,000 रुपये
7-10 लाख: 10%8-12 लाख: 10%10,000 रुपये
10-12 लाख: 15%12-15 लाख: 15%15,000 रुपये
12-15 लाख: 20%15 लाख+: 25%30,000 रुपये
15 लाख+: 30%

बजट 2026 में फिस्कल डेफिसिट को 4.5% तक लाने का टारगेट है, जो 2025 के 5.1% से कम होगा। टैक्स राहत से रेवेन्यू लॉस 50,000 करोड़ रुपये का हो सकता है, लेकिन कंजम्पशन बढ़ने से GDP ग्रोथ 7% तक पहुंच सकती है। हेल्थ और हाउसिंग सेक्टर में निवेश बढ़ेगा, जहां हेल्थ इंश्योरेंस मार्केट 2025 में 1 लाख करोड़ रुपये का था और 2026 में 20% ग्रोथ की उम्मीद है।

की इकोनॉमिक पॉइंट्स:

जीएसटी कलेक्शन: 2025 में 10 लाख करोड़ से ऊपर, 2026 में 12 लाख करोड़ टारगेट।

डायरेक्ट टैक्स: नई रिजीम अपनाने से 15% बढ़ोतरी की संभावना।

एम्प्लॉयमेंट इम्पैक्ट: हाउसिंग सेक्टर में 5 लाख नई जॉब्स।

सीनियर सिटीजन और स्पेशल कैटेगरी के लिए राहत

सीनियर सिटीजन के लिए बजट में हेल्थ इंश्योरेंस डिडक्शन को 75,000 रुपये तक बढ़ाने की उम्मीद है, जबकि होम लोन पर अतिरिक्त 50,000 रुपये की छूट। महिलाओं के लिए स्पेशल प्रावधान: होम लोन में को-ओनरशिप पर 10% एक्स्ट्रा बेनिफिट। यह कदम जेंडर इक्वालिटी को बढ़ावा देगा, जहां वर्तमान में महिलाओं की होम ओनरशिप रेट 30% है।

Disclaimer: यह रिपोर्ट विशेषज्ञों की राय और ट्रेंड्स पर आधारित है। टैक्स नियमों में बदलाव के लिए आधिकारिक घोषणा का इंतजार करें। कोई भी निवेश या टैक्स प्लानिंग पेशेवर सलाह पर करें।

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