नई लेबर कोड्स के लागू होने से बेसिक सैलरी को CTC का कम से कम 50% बनाना अनिवार्य हो गया है। इससे कर्मचारी का PF कंट्रीब्यूशन बढ़ेगा, टैक्सेबल इनकम में इजाफा होगा और इन-हैंड सैलरी थोड़ी कम हो सकती है। हालांकि, लंबे समय में PF बैलेंस, ग्रेच्युटी और रिटायरमेंट सिक्योरिटी मजबूत होगी।
नई लेबर कोड्स से सैलरी स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव
नए लेबर कोड्स (वेज कोड, इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड, सोशल सिक्योरिटी कोड और ऑक्यूपेशनल सेफ्टी कोड) के तहत सैलरी के कंपोनेंट्स पर सख्त नियम लागू हो गए हैं। मुख्य बदलाव यह है कि बेसिक सैलरी अब CTC (कॉस्ट टू कंपनी) का कम से कम 50% होनी चाहिए। पहले कई कंपनियां बेसिक को 30-35% रखकर अलाउंसेज बढ़ाती थीं, ताकि PF, ग्रेच्युटी जैसी वैधानिक कटौतियां कम हों। अब यह रणनीति नहीं चलेगी।
इस बदलाव का सीधा असर तीन क्षेत्रों पर पड़ता है:
इन-हैंड सैलरी पर तत्काल कमी
PF और ग्रेच्युटी में बढ़ोतरी
टैक्स कैलकुलेशन में बदलाव
PF कंट्रीब्यूशन कैसे बढ़ेगा
PF कर्मचारी और एम्प्लॉयर दोनों 12% बेसिक + DA पर देते हैं। बेसिक बढ़ने से यह राशि सीधे बढ़ जाती है।
उदाहरण (मासिक CTC 50,000 रुपये मानकर):
पहले: बेसिक 15,000 रुपये (30%), PF कटौती (कर्मचारी हिस्सा) = 1,800 रुपये
अब: बेसिक 25,000 रुपये (50%), PF कटौती = 3,000 रुपये
फर्क: हर महीने 1,200 रुपये ज्यादा कटौती, यानी सालाना 14,400 रुपये कम इन-हैंड। लेकिन PF में सालाना अतिरिक्त 14,400 + एम्प्लॉयर का 14,400 = 28,800 रुपये जुड़ेंगे, जो कंपाउंडिंग से 8-10% रिटर्न पर 15-20 साल में लाखों में बदल सकता है।
ग्रेच्युटी और अन्य लाभों पर असर
ग्रेच्युटी 15 दिनों की सैलरी × सेवा के साल पर आधारित है, जो बेसिक + DA पर कैलकुलेट होती है। बेसिक बढ़ने से ग्रेच्युटी अमाउंट बढ़ेगा।
उदाहरण:
10 साल सेवा, पहले बेसिक 15,000: ग्रेच्युटी ≈ 92,308 रुपये
अब बेसिक 25,000: ग्रेच्युटी ≈ 1,53,846 रुपये
फर्क: 61,538 रुपये ज्यादा। लीव एनकैशमेंट भी बेसिक पर आधारित होने से बढ़ेगा।
टैक्स पर क्या असर पड़ेगा
अलाउंसेज (HRA, स्पेशल अलाउंस, कन्वेयंस) कम होने से टैक्सेबल इनकम बढ़ेगी, क्योंकि ये कई बार टैक्स-फ्री या पार्शियली एक्जेम्प्ट होते हैं। बेसिक पूरी तरह टैक्सेबल है।
नए टैक्स रेजीम में 80C डिडक्शन नहीं मिलता, इसलिए PF कर्मचारी हिस्सा टैक्स बचत नहीं देगा।
पुराने रेजीम में 80C के तहत PF डिडक्शन मिलता है (1.5 लाख तक), लेकिन अलाउंस कम होने से HRA डिडक्शन भी प्रभावित।
कुल मिलाकर टैक्स लायबिलिटी 5-10% बढ़ सकती है, खासकर 10-20 लाख CTC वाले कर्मचारियों के लिए।
क्यों लाया गया यह बदलाव
सरकार का उद्देश्य कर्मचारियों की रिटायरमेंट सिक्योरिटी बढ़ाना है। कम बेसिक से PF छोटा रहता था, जिससे रिटायरमेंट में मुश्किल होती थी। अब फोर्स्ड सेविंग्स बढ़ेंगी। साथ ही 40 साल से ऊपर के कर्मचारियों को सालाना फ्री/सब्सिडाइज्ड हेल्थ चेकअप मिलेगा।
एक्सपर्ट्स का हिसाब-किताब
फाइनेंशियल प्लानर्स का कहना है कि शॉर्ट-टर्म में 5-8% इन-हैंड कम हो सकता है, लेकिन लॉन्ग-टर्म में 20-30% ज्यादा रिटायरमेंट कॉर्पस बनेगा। अगर आप 30-40 साल की उम्र में हैं तो कंपाउंडिंग का फायदा ज्यादा मिलेगा।
उदाहरण टेबल: CTC 8 लाख सालाना (मासिक ≈66,667 रुपये)
क्या करें कर्मचारी
अपनी सैलरी स्लिप चेक करें और HR से नया स्ट्रक्चर पूछें।
पुराने रेजीम में स्विच करें अगर डिडक्शन ज्यादा हैं।
VPF (वॉलेंटरी PF) बढ़ाकर टैक्स बचाएं।
लंबी अवधि की प्लानिंग करें, क्योंकि यह बदलाव फायदेमंद है।
| कंपोनेंट | पहले (बेसिक 35%) | अब (बेसिक 50%) | फर्क (मासिक) |
|---|---|---|---|
| बेसिक | 23,333 | 33,333 | +10,000 |
| अलाउंसेज | 43,334 | 33,334 | -10,000 |
| PF (कर्मचारी) | 2,800 | 4,000 | +1,200 |
| इन-हैंड (अनुमानित, टैक्स बाद) | 52,000 | 49,000 | -3,000 |
| PF बैलेंस सालाना इजाफा | 67,200 | 96,000 | +28,800 |
Disclaimer: यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्य से तैयार किया गया है। व्यक्तिगत वित्तीय स्थिति के लिए प्रमाणित टैक्स एडवाइजर या फाइनेंशियल प्लानर से परामर्श लें।