“बजट 2026 में ऊर्जा क्षेत्र को बड़े प्रोत्साहन की उम्मीद, जिसमें रिन्यूएबल एनर्जी के लिए ग्रिड आधुनिकीकरण और स्टोरेज पर जोर, साथ ही न्यूक्लियर सेक्टर में 20,000 करोड़ के PLI स्कीम से घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बूस्ट। सुजलॉन एनर्जी और टाटा पावर जैसे स्टॉक्स में तेजी की संभावना, जबकि NTPC, BHEL और L&T जैसे न्यूक्लियर से जुड़े शेयर रॉकेट बन सकते हैं, क्योंकि सरकार 500 GW नॉन-फॉसिल कैपेसिटी और 100 GW न्यूक्लियर टारगेट की ओर बढ़ रही है।”
बजट 2026 में ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख उम्मीदें बजट 2026 में ऊर्जा क्षेत्र को केंद्र सरकार से मजबूत समर्थन मिलने की संभावना है, खासकर रिन्यूएबल और न्यूक्लियर एनर्जी पर। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रीन हाइड्रोजन, सोलर पावर और बैटरी स्टोरेज के लिए मजबूत फिस्कल इंसेंटिव्स दिए जा सकते हैं, जो भारत की 500 GW नॉन-फॉसिल फ्यूल कैपेसिटी को 2030 तक हासिल करने में मदद करेंगे। न्यूक्लियर एनर्जी को रिन्यूएबल के समान दर्जा देने के लिए पॉलिसी चेंजेस, जैसे GST रेशनलाइजेशन और CPCB की ‘रेड’ कैटेगरी से हटाना, प्रस्तावित हैं। इससे प्राइवेट प्लेयर्स को न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स में हिस्सेदारी मिलेगी, जो SHANTI बिल के बाद और तेज होगी। साथ ही, ग्रिड एफिशिएंसी और सिस्टम फ्लेक्सिबिलिटी पर फोकस से डिस्कॉम्स की फाइनेंशियल हेल्थ सुधरेगी। FY26 के पहले आठ महीनों में 34.56 GW नॉन-फॉसिल कैपेसिटी जुड़ी है, जिसमें सोलर और विंड लीड कर रहे हैं।
रिन्यूएबल एनर्जी में निवेश के अवसर रिन्यूएबल सेक्टर में बजट से पंप्ड स्टोरेज और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम्स (BESS) के लिए पॉलिसी सपोर्ट मिल सकता है, जो लॉन्ग-टर्म एनर्जी सिक्योरिटी बढ़ाएगा। इंडस्ट्री लीडर्स का कहना है कि ट्रांसमिशन लाइंस की देरी और डिस्कॉम्स के डेब्ट को दूर करने के लिए बजट में स्पेशल अलोकेशन जरूरी है। 2025 में 44.5 GW रिन्यूएबल कैपेसिटी जुड़ी, जो कुल नॉन-फॉसिल को 253 GW पार करा चुकी है। ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर्स के लिए बजटरी अलोकेशन बढ़ाने और ISTS वेवर को जारी रखने से सोलर सेल्स पर ALMM एक्सटेंशन मिल सकता है। इससे घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बूस्ट मिलेगा, खासकर पॉलीसिलिकॉन, वेफर्स और सेल्स जैसे अपस्ट्रीम इनपुट्स के लिए PLI स्कीम्स से। प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग से कैपिटल कॉस्ट कम होगा, जो MSMEs के लिए फायदेमंद साबित होगा।
| प्रमुख रिन्यूएबल एनर्जी फोकस एरिया | उम्मीदित बजट प्रावधान | संभावित प्रभाव |
|---|---|---|
| सोलर और विंड मैन्युफैक्चरिंग | PLI एक्सटेंशन और एक्सपोर्ट इंसेंटिव्स | इम्पोर्ट डिपेंडेंसी कम, ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस बढ़ेगी |
| ग्रीन हाइड्रोजन मिशन | फिस्कल बैकिंग और टैक्स इंसेंटिव्स | एनर्जी ट्रांजिशन स्पीड-अप, 2030 तक 44% रिन्यूएबल जनरेशन |
| बैटरी स्टोरेज (BESS) | मैन्युफैक्चरिंग के लिए PLI और ALBI लिस्ट | ग्रिड स्टेबिलिटी सुधरेगी, रिन्यूएबल यूटिलाइजेशन बढ़ेगा |
| ग्रिड मॉडर्नाइजेशन | स्पेशल फंड्स और इंफ्रा क्लस्टर्स | ट्रांसमिशन डिले कम, डिस्कॉम्स की डेब्ट रिडक्शन |
न्यूक्लियर सेक्टर का विस्तार और पॉलिसी सपोर्ट न्यूक्लियर एनर्जी को बजट में स्ट्रैटेजिक इंपोर्टेंस मिलने की उम्मीद है, जिसमें 20,000 करोड़ की PLI स्कीम से डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग बूस्ट होगी। रिएक्टर वेसल्स, हेवी फोर्जिंग्स और स्टीम जनरेटर्स जैसे कंपोनेंट्स पर फोकस से इम्पोर्ट कम होगा और लीड टाइम्स घटेंगे। स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMRs) के लिए R&D फंडिंग से 2033 तक कम से कम पांच इंडिजिनस SMRs ऑपरेशनल हो सकते हैं। न्यूक्लियर कैपेसिटी को 8.9 GW से 22.5 GW (2032 तक) और 100 GW (2047 तक) पहुंचाने के लिए प्राइवेट पार्टिसिपेशन को इंसेंटिव्स दिए जाएंगे। बजट में न्यूक्लियर को ग्रीन टैक्सोनॉमी में शामिल करने और फॉरेन टेक्नोलॉजी सप्लायर्स के लिए सिंपलीफाइड टैक्सेशन से टेक्नोलॉजी ट्रांसफर तेज होगा। इससे एनर्जी सिक्योरिटी मजबूत होगी, खासकर ग्लोबल सप्लाई चेन डिसरप्शंस के बीच।
SMR मिशन का महत्व : लॉन्ग गेस्टेशन पीरियड वाले प्रोजेक्ट्स को स्पीड-अप करने के लिए डायरेक्शनल अनाउंसमेंट्स।
क्रिटिकल मिनरल्स माइनिंग : टैक्स इंसेंटिव्स से डोमेस्टिक वैल्यू एडिशन बढ़ेगा।
एनर्जी ट्रांजिशन इन रूरल इंडिया : सब्सिडीज को क्लीन एनर्जी की ओर रीडायरेक्ट करने से ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रांजिशन तेज।
पावर स्टॉक्स पर प्रभाव : बजट सिग्नल्स से मीडियम-टू-लॉन्ग टर्म ग्रोथ, लेकिन शॉर्ट-टर्म में अर्निंग्स पर सीमित असर।
प्रमुख एनर्जी स्टॉक्स का विश्लेषण सुजलॉन एनर्जी और टाटा पावर जैसे रिन्यूएबल फोकस्ड स्टॉक्स को बजट से डायरेक्ट बूस्ट मिल सकता है, क्योंकि विंड और सोलर कंपोनेंट्स पर इंसेंटिव्स से मार्केट डिमांड बढ़ेगी। न्यूक्लियर सेक्टर में NTPC, BHEL और L&T जैसे प्लेयर्स रॉकेट बन सकते हैं, क्योंकि वे न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स में डायरेक्ट इन्वॉल्वमेंट रखते हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज भी ग्रीन एनर्जी इनिशिएटिव्स से फायदा उठा सकता है। हालिया ट्रेंड्स में, रिन्यूएबल एडिशंस से स्टॉक परफॉर्मेंस मजबूत हुई है, लेकिन इंफ्रा बॉटलनेक्स को दूर करने से आगे ग्रोथ संभव।
| स्टॉक नाम | वर्तमान प्राइस (INR) | हालिया चेंज (%) | बजट से संभावित बूस्ट |
|---|---|---|---|
| Suzlon Energy | 75 | +5 | विंड कंपोनेंट्स PLI से ग्रोथ |
| Tata Power | 450 | +3.5 | रिन्यूएबल और स्टोरेज प्रोजेक्ट्स |
| NTPC | 400 | +4 | न्यूक्लियर मिशन और SMR फंडिंग |



