“केंद्रीय बजट 2026 में ग्रीन एनर्जी, डिफेंस, टैक्स रिफॉर्म्स और कैपेक्स पर फोकस रहेगा, जहां GDP ग्रोथ 6.8-7.2% अनुमानित है और फिस्कल डेफिसिट 4.5% से नीचे रखने की कोशिश होगी; वैश्विक निवेशक भारत की मैन्युफैक्चरिंग, AI और इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाओं पर नजर रखेंगे, जबकि US टैरिफ वॉर और जियोपॉलिटिकल टेंशन्स चुनौतियां पेश कर सकते हैं।”
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को संसद में बजट पेश करेंगी, जिसमें भारत की आर्थिक स्थिरता को मजबूत करने के लिए नीतिगत निरंतरता पर जोर दिया जाएगा। बजट में कैपिटल एक्सपेंडिचर (कैपेक्स) को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जो इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के माध्यम से जॉब क्रिएशन को सपोर्ट करेगा। आर्थिक सर्वे ने भारत की GDP ग्रोथ को 6.8 से 7.2 प्रतिशत के बीच रखा है, जो घरेलू डिमांड और पब्लिक इनवेस्टमेंट पर आधारित है। ग्लोबल इनवेस्टर्स, खासकर UK और US से, भारत की मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में को-प्रोडक्शन इंसेंटिव्स की तलाश कर रहे हैं, क्योंकि भारत की इकोनॉमी दुनिया की सबसे तेज बढ़ती हुई है।
बजट में ग्रीन एनर्जी सेक्टर को प्राथमिकता मिल सकती है, जहां रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स के लिए फंडिंग बढ़ाई जाएगी, जैसे ग्रीन हाइड्रोजन और सोलर पावर इनिशिएटिव्स। डिफेंस सेक्टर में कैपिटल आउटले बढ़ने की संभावना है, जो पहले से ही 15 प्रतिशत की सालाना ग्रोथ रेट पर चल रहा है, और इंडियन आर्म्ड फोर्सेस के मॉडर्नाइजेशन को बूस्ट देगा। टैक्स क्लैरिटी पर फोकस रहेगा, खासकर BFSI सेक्टर में, जहां विदेशी इनवेस्टर्स के लिए विदहोल्डिंग टैक्स रेट्स को सरल बनाया जा सकता है, जिससे FPI इनफ्लो बढ़ेगा।
MSME और ऑटो सेक्टर के लिए स्पेशल पैकेजेस की उम्मीद है, जहां लिक्विडिटी सपोर्ट और टैक्स इंसेंटिव्स से छोटे बिजनेस को राहत मिलेगी। अर्बन डेवलपमेंट में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स के लिए अतिरिक्त फंडिंग आएगी, जो 100 शहरों को कवर करेगी और ट्रांसपोर्टेशन नेटवर्क को मजबूत करेगी। AI और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में रेगुलेटरी फ्रेमवर्क क्लियर किया जाएगा, जो ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) को आकर्षित करेगा और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को बढ़ावा देगा।
रेलवे सेक्टर में हाई-स्पीड ट्रेन प्रोजेक्ट्स के लिए बजट बढ़ सकता है, जहां वंदे भारत एक्सप्रेस की संख्या 200 से ज्यादा हो जाएगी, और इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड से एक्सपोर्ट लॉजिस्टिक्स सुधरेगी। एग्रीकल्चर में फूड इन्फ्लेशन कंट्रोल के लिए सप्लाई चेन इम्प्रूवमेंट्स पर फोकस होगा, जैसे कि कोल्ड स्टोरेज फैसिलिटीज का विस्तार, जो किसानों की इनकम को 20 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है। एजुकेशन सेक्टर में एम्प्लॉयेबिलिटी को लिंक करने के लिए स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम्स को फंडिंग मिलेगी, जहां बजट से 1 करोड़ युवाओं को ट्रेनिंग दी जाएगी।
फिस्कल डिसिप्लिन को बनाए रखने के लिए फिस्कल डेफिसिट को 4.4 प्रतिशत पर टारगेट किया जाएगा, जो डेब्ट सस्टेनेबिलिटी को सुनिश्चित करेगा। ग्लोबल चैलेंजेस जैसे US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ वॉर से भारत के एक्सपोर्ट्स प्रभावित हो सकते हैं, इसलिए बजट में ट्रेड पॉलिसीज को एडजस्ट किया जाएगा, जैसे कि फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स को मजबूत करना। UK के साथ इनवेस्टमेंट पार्टनरशिप्स बढ़ेंगी, जहां ब्रिटिश कंपनियां भारत के रिन्यूएबल एनर्जी मार्केट में 10 बिलियन डॉलर इनवेस्ट कर सकती हैं।
इक्विटी मार्केट्स में वैल्यूएशंस हाई हैं, खासकर IT और फाइनेंशियल सर्विसेज में, इसलिए बजट से मार्केट कॉन्फिडेंस बूस्ट करने के लिए स्टेबल पॉलिसीज की जरूरत है। बॉन्ड मार्केट्स में नेट बॉरोइंग को स्थिर रखा जाएगा, जो यील्ड प्रेशर्स को कंट्रोल करेगा। स्टार्टअप्स के लिए क्लियर AI रेगुलेशंस आएंगे, जो इनोवेशन को सपोर्ट करेंगे और फॉरेन इनवेस्टमेंट को आकर्षित करेंगे।
बजट 2026 के प्रमुख सेक्टर्स और अपेक्षित आवंटन:
| सेक्टर | अपेक्षित फोकस | संभावित प्रभाव |
|---|---|---|
| ग्रीन एनर्जी | रिन्यूएबल प्रोजेक्ट्स के लिए 2 लाख करोड़ | कार्बन एमिशन में 15% कमी, जॉब्स में वृद्धि |
| डिफेंस | कैपिटल आउटले में 20% बढ़ोतरी | मॉडर्नाइजेशन, लोकल मैन्युफैक्चरिंग बूस्ट |
| मैन्युफैक्चरिंग | इंसेंटिव्स और टैक्स ब्रेक्स | एक्सपोर्ट्स में 10% ग्रोथ |
| AI और टेक | रेगुलेटरी क्लैरिटी और फंडिंग | GCCs की संख्या में 50% वृद्धि |
| एग्रीकल्चर | सप्लाई चेन इम्प्रूवमेंट | फूड इन्फ्लेशन कंट्रोल, किसान इनकम अप |
| इंफ्रास्ट्रक्चर | कैपेक्स में 15% बढ़ोतरी | जॉब क्रिएशन, GDP ग्रोथ सपोर्ट |
बजट में विदेशी इनवेस्टमेंट को बढ़ावा देने के लिए फंड रजिस्ट्रेशन प्रोसेस को सरल बनाया जाएगा, जो ग्लोबल बॉन्ड इंडेक्सेस में भारत की इंक्लूजन को सपोर्ट करेगा। US और UK के इनवेस्टर्स भारत की इकोनॉमिक रेजिलिएंस पर नजर रखेंगे, क्योंकि भारत की ग्रोथ स्टोरी ग्लोबल अनिश्चितताओं के बीच मजबूत बनी हुई है। ऑटोमेटेड ट्रेडिंग वर्कफ्लोज से मार्केट एफिशिएंसी बढ़ेगी, जो FPI को आकर्षित करेगा।
रूरल इकोनॉमी को बूस्ट करने के लिए MGNREGA की जगह VB G-RAM-G स्कीम को मजबूत किया जाएगा, जो रूरल जॉब्स में 25 प्रतिशत बढ़ोतरी ला सकती है। टैक्स रिफॉर्म्स में इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स के लिए एक्सेम्प्शंस बढ़ाए जा सकते हैं, जो कंजम्प्शन को सपोर्ट करेगा। ग्लोबल सप्लाई चेन रीअलाइनमेंट्स में भारत की भूमिका बढ़ेगी, जहां बजट से मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
स्टेट्स की डिमांड्स जैसे स्पेशल स्टेटस, पेंडिंग फंड्स और रेल लिंक्स को एड्रेस किया जाएगा, जो फेडरल बैलेंस को मजबूत करेगा। इंडस्ट्री बॉडीज जैसे CII और FICCI ने इंफ्रास्ट्रक्चर स्पेंडिंग को जारी रखने की मांग की है, जो मैन्युफैक्चरिंग एक्सपैंशन को सपोर्ट करेगी। बजट से भारत की कॉम्पिटिटिवनेस बढ़ेगी, जहां प्रोडक्टिविटी और टेक्नोलॉजिकल डेप्थ पर फोकस होगा।
बजट 2026 में वैश्विक चुनौतियां और रिस्पॉन्स:
US टैरिफ वॉर: एक्सपोर्ट पॉलिसीज को एडजस्ट कर भारत के ट्रेड बैलेंस को प्रोटेक्ट किया जाएगा, जिसमें FTA को मजबूत करना शामिल है।
जियोपॉलिटिकल टेंशन्स: डिफेंस बजट से सिक्योरिटी को बूस्ट, जो ग्लोबल इनवेस्टर्स को कॉन्फिडेंस देगा।
इन्फ्लेशन प्रेशर्स: फूड और इनपुट कॉस्ट्स को स्टेबलाइज करने के लिए सप्लाई मेजर्स, जो GDP ग्रोथ को सपोर्ट करेंगे।
फॉरेन इनवेस्टमेंट: टैक्स क्लैरिटी से UK और US से इनफ्लो बढ़ेगा, जहां बॉन्ड यील्ड्स को कंट्रोल किया जाएगा।
AI एडॉप्शन: गवर्नेंस और ट्रस्ट को मजबूत कर टैलेंट डेवलपमेंट, जो इंडस्ट्रीज को फ्यूचर-रेडी बनाएगा।
बजट से भारत की इकोनॉमिक ट्रांसफॉर्मेशन तेज होगी, जहां विकसित भारत 2047 की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट कॉम्पिटिटिवनेस को बढ़ाने के लिए ट्रेड और कस्टम्स एनवायरनमेंट को फैसिलिटेटिव बनाया जाएगा। ग्लोबल मार्केट्स में भारत की इंटीग्रेशन बढ़ेगी, जहां फॉरेन इनवेस्टमेंट और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को इंसेंटिवाइज किया जाएगा। रोबोटिक टेक्नोलॉजी में इनवेस्टमेंट से प्रोडक्टिविटी ग्रोथ होगी, जो लॉन्ग-टर्म फिस्कल रेजिलिएंस को सपोर्ट करेगा।
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