“बजट 2026 में EV सेक्टर को मजबूत करने के लिए रेयर अर्थ कॉरिडोर, सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स स्कीम जैसे कदम उठाए गए हैं, जो आयात निर्भरता कम करेंगे और लागत घटाएंगे; हालांकि कीमतों में तत्काल कमी नहीं आएगी, लेकिन लंबे समय में EV वाहनों की कीमतें सस्ती होने की उम्मीद है, खासकर बैटरी और कंपोनेंट्स के घरेलू उत्पादन से।”
वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने बजट 2026 में EV सेक्टर को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं, जो भारत को ग्लोबल EV हब बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं। इन घोषणाओं से EV निर्माताओं को कच्चे माल की उपलब्धता आसान होगी, उत्पादन लागत घटेगी और सप्लाई चेन मजबूत बनेगी। मुख्य रूप से, रेयर अर्थ मिनरल्स के घरेलू उत्पादन पर फोकस किया गया है, जो EV बैटरी और मोटर्स के लिए जरूरी हैं। इससे चीन जैसे देशों पर निर्भरता कम होगी, जहां से फिलहाल 80% से ज्यादा रेयर अर्थ आयात होते हैं।
EV सेक्टर में बैटरी कीमतें कुल वाहन लागत का 40-50% हिस्सा होती हैं, और इन घोषणाओं से बैटरी उत्पादन में 15-20% तक की बचत हो सकती है। उदाहरण के लिए, लिथियम-आयन सेल्स के लिए कैपिटल गुड्स पर बेसिक कस्टम्स ड्यूटी छूट को Battery Energy Storage Systems (BESS) तक बढ़ाया गया है, जो EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को सस्ता बनाएगा। साथ ही, लिथियम-आयन सेल्स और उनके पार्ट्स पर कंसेसनल ड्यूटी बेनिफिट्स को मार्च 2028 तक एक्सटेंड किया गया है, जिससे Tata Motors, Ola Electric और Ather Energy जैसी कंपनियां फायदा उठा सकेंगी।
इन कदमों से EV कीमतों पर क्या असर पड़ेगा? विशेषज्ञों का मानना है कि तत्काल कीमतों में 5-10% की कमी नहीं आएगी, क्योंकि मौजूदा स्टॉक और सप्लाई चेन एडजस्टमेंट में समय लगेगा। लेकिन 2027 तक, घरेलू उत्पादन बढ़ने से EV कारों की कीमतें 10-15% तक गिर सकती हैं। उदाहरणस्वरूप, Mahindra XUV400 जैसी मिड-रेंज EV की कीमत 15 लाख से घटकर 13 लाख के आसपास आ सकती है, जबकि स्कूटर सेगमेंट में Ather 450X की कीमत 1.4 लाख से नीचे जा सकती है। यह कमी मुख्य रूप से रेयर अर्थ मैग्नेट्स और सेमीकंडक्टर चिप्स की लोकल उपलब्धता से आएगी।
बजट में India Semiconductor Mission 2.0 (ISM 2.0) की लॉन्चिंग एक गेम-चेंजर है, जिसमें इक्विपमेंट प्रोडक्शन, फुल-स्टैक IP डेवलपमेंट और सप्लाई चेन स्ट्रेंग्थनिंग पर फोकस है। इसके लिए 40,000 करोड़ रुपये का आउटले आवंटित किया गया है, जो EV में इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स को सस्ता बनाएगा। साथ ही, Electronics Components Manufacturing Scheme का आउटले भी 40,000 करोड़ तक बढ़ाया गया है, जिससे पहले ही इन्वेस्टमेंट टारगेट दोगुना हो चुका है। यह स्कीम EV बैटरी मैन्युफैक्चरिंग को बूस्ट देगी, क्योंकि फिलहाल बैटरी कंपोनेंट्स की 60% लागत आयात से आती है।
रेयर अर्थ कॉरिडोर की स्थापना Odisha, Kerala, Andhra Pradesh और Tamil Nadu में की जाएगी, जो रेयर अर्थ मिनरल्स की एक्सप्लोरेशन, प्रोसेसिंग और उपलब्धता सुनिश्चित करेगी। ये मिनरल्स EV मोटर्स में इस्तेमाल होने वाले परमानेंट मैग्नेट्स के लिए जरूरी हैं, और घरेलू उत्पादन से इनकी कीमत 20-25% तक कम हो सकती है। इससे EV निर्माताओं को ग्लोबल प्राइस फ्लक्चुएशंस से बचाव मिलेगा, जैसे कि 2025 में रेयर अर्थ कीमतों में 30% का उछाल देखा गया था।
PM E-DRIVE स्कीम के तहत FY27 के लिए 1,500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो EV चार्जिंग स्टेशंस और सब्सिडी को सपोर्ट करेगी। साथ ही, Purvodaya States में टूरिज्म डेवलपमेंट के लिए 4,000 e-बसों की खरीद का ऐलान किया गया है, जो पब्लिक ट्रांसपोर्ट में EV एडॉप्शन बढ़ाएगा। इससे EV इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार होगा, और कंज्यूमर्स के लिए चार्जिंग की सुविधा बढ़ने से EV खरीदने का आत्मविश्वास आएगा। कुल कैपेक्स को 12.2 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाया गया है, जो इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में CV डिमांड बढ़ाएगा, लेकिन EV सेक्टर को इंडायरेक्ट बेनिफिट देगा।
EV सेक्टर पर असर को समझने के लिए मुख्य घोषणाओं की तालिका:
| घोषणा | विवरण | EV पर असर | संभावित कीमत प्रभाव |
|---|---|---|---|
| Rare Earth Corridors | Odisha, Kerala, Andhra Pradesh, Tamil Nadu में स्थापना | रेयर अर्थ मिनरल्स की घरेलू उपलब्धता, आयात निर्भरता कम | बैटरी और मोटर लागत में 15-20% कमी, EV कीमतें 10% तक गिर सकती हैं |
| ISM 2.0 | 40,000 करोड़ रुपये आउटले, सेमीकंडक्टर प्रोडक्शन पर फोकस | EV इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स सस्ते होंगे | चिप्स और सेंसर कीमतों में 10-15% बचत, कुल EV लागत घटेगी |
| Electronics Components Scheme | 40,000 करोड़ तक बढ़ाया गया आउटले | बैटरी कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग बूस्ट | लिथियम-आयन सेल्स सस्ते, EV स्कूटर कीमत 5-10% कम |
| Customs Duty Exemption | लिथियम-आयन सेल्स कैपिटल गुड्स पर छूट, BESS तक एक्सटेंड | बैटरी स्टोरेज सिस्टम सस्ता | चार्जिंग इंफ्रा लागत कम, EV एडॉप्शन बढ़ेगा |
| PM E-DRIVE | 1,500 करोड़ FY27 के लिए | EV सब्सिडी और चार्जिंग नेटवर्क | अपफ्रंट कीमतों में राहत, लेकिन लिमिटेड स्कोप |
| e-Bus Procurement | 4,000 यूनिट्स Purvodaya States में | पब्लिक EV ट्रांसपोर्ट बूस्ट | बड़े स्केल प्रोडक्शन से कीमतें स्थिर होंगी |
ये घोषणाएं EV सेक्टर को स्ट्रक्चरल सपोर्ट देती हैं, जो शॉर्ट-टर्म में कीमतों को स्थिर रखेंगी लेकिन लॉन्ग-टर्म में सस्टेनेबल ग्रोथ सुनिश्चित करेंगी। उदाहरण के लिए, Ola Electric जैसी कंपनियां, जो हाल में कीमतें बढ़ाने पर मजबूर हुईं, अब घरेलू सप्लाई से फायदा उठा सकेंगी। साथ ही, Biopharma Shakti जैसी अन्य स्कीम्स इंडायरेक्ट रूप से EV से जुड़े रिसर्च को बूस्ट देंगी, क्योंकि बैटरी टेक्नोलॉजी में बायो-बेस्ड मटेरियल्स का इस्तेमाल बढ़ रहा है।
EV मार्केट में ट्रेंड्स को देखें तो, 2025 में EV सेल्स 20% ग्रोथ के साथ 1.5 मिलियन यूनिट्स तक पहुंचीं, लेकिन हाई बैटरी कॉस्ट से एडॉप्शन स्लो रहा। बजट की ये घोषणाएं 2027 तक EV पेनेट्रेशन को 15% तक ले जा सकती हैं, खासकर टू-व्हीलर सेगमेंट में जहां Hero Electric और Bajaj Auto जैसे प्लेयर्स एक्टिव हैं। कीमतों में कमी के लिए, सरकार तीन डेडिकेटेड केमिकल पार्क्स भी स्थापित करेगी, जो EV बैटरी केमिकल्स की लोकल प्रोडक्शन बढ़ाएंगे।
मुख्य पॉइंट्स:
आयात निर्भरता कम : रेयर अर्थ कॉरिडोर से 50% आयात कटौती संभव, जो EV पार्ट्स की कीमतें घटाएगा।
मैन्युफैक्चरिंग बूस्ट : ISM 2.0 और कंपोनेंट्स स्कीम से लोकल फैक्टरियां बढ़ेंगी, रोजगार के 1 लाख नए अवसर पैदा होंगे।
इंफ्रा सपोर्ट : e-बस और कैपेक्स से EV चार्जिंग नेटवर्क 50,000 स्टेशंस तक पहुंच सकता है।
कीमत डायनामिक्स : शॉर्ट-टर्म में स्थिरता, लेकिन 2028 तक EV कारें ICE वाहनों से 20% सस्ती हो सकती हैं।
इंडस्ट्री रिएक्शन : Hyundai और Mahindra जैसे OEMs ने इन कदमों को सस्टेनेबल मोबिलिटी के लिए सकारात्मक बताया।
इन सब से EV सेक्टर में इन्वेस्टमेंट बढ़ेगा, और कंज्यूमर्स को अफोर्डेबल ऑप्शंस मिलेंगे। हालांकि, कीमतों में कमी के लिए इंडस्ट्री को लोकल पार्टनरशिप्स बढ़ानी होंगी, जैसे कि Tata और Tesla जैसी कंपनियों के जॉइंट वेंचर्स। कुल मिलाकर, बजट EV को मेनस्ट्रीम बनाने की दिशा में एक मजबूत फाउंडेशन रखता है।
Disclaimer: यह न्यूज रिपोर्ट, टिप्स और सोर्सेज पर आधारित है।