भारत में सड़क हादसों का एक बड़ा कारण टायर फटना है। छोटी-सी दरार, साइडवॉल में बुलबुला या असमान घिसाव टायर की संरचना कमजोर कर देते हैं। गलत हवा का दबाव, ओवरलोडिंग, गड्ढे और पुराने टायर सालाना हजारों दुर्घटनाओं के जिम्मेदार हैं। नियमित चेक, सही प्रेशर और समय पर बदलाव से इन खतरों से बचा जा सकता है।
टायर की दरार क्यों बन जाती है जानलेवा? टायर की साइडवॉल पर छोटी दरार या कट सबसे खतरनाक होता है। यह जगह टायर की मुख्य संरचना को पकड़ती है। एक बार दरार पड़ने पर हवा का दबाव और गर्मी से वह तेजी से फैलती है और टायर फट जाता है। हाईवे पर 80-100 किमी/घंटा की रफ्तार में यह फटना गाड़ी को पूरी तरह नियंत्रण से बाहर कर देता है। भारत की ज्यादातर सड़कों पर यह समस्या आम है क्योंकि गड्ढे, ओवरलोडिंग और लंबे समय तक धूप में खड़े रहने से रबर सूखकर फटने लगता है।
खराब होने के 7 असली कारण
गलत हवा का दबाव — 75% भारतीय ड्राइवर टायर में गलत प्रेशर रखते हैं। कम प्रेशर से साइडवॉल गर्म होकर फटता है, ज्यादा प्रेशर से ट्रेड का बीच का हिस्सा तेजी से घिसता है।
ओवरलोडिंग — ट्रक, SUV और छोटी कारों में अक्सर क्षमता से ज्यादा वजन लादा जाता है। इससे टायर पर दबाव कई गुना बढ़ जाता है और दरारें पड़ती हैं।
खराब सड़कें और गड्ढे — भारत में पॉटहोल टायर की साइडवॉल को सीधा नुकसान पहुंचाते हैं। एक गड्ढे में 60-70 किमी/घंटा की स्पीड से टकराने पर टायर की अंदरूनी परत टूट सकती है।
टायर की उम्र — टायर 5-6 साल या 60,000-80,000 किमी बाद रबर की ताकत खो देता है, भले ही ट्रेड कितना भी अच्छा दिखे।
गलत व्हील एलाइनमेंट और बैलेंसिंग — इससे टायर एक तरफ से ज्यादा घिसता है और साइडवॉल पर तनाव पड़ता है।
तेज रफ्तार और गर्मी — गर्मियों में 40°C से ऊपर तापमान में हाईवे पर 100+ किमी/घंटा चलाने से टायर का तापमान 70-80°C तक पहुंच जाता है और रबर पिघलने लगता है।
सस्ते या नकली टायर — कम क्वालिटी वाले टायर में रबर की मिश्रण कमजोर होता है, जो जल्दी दरार देता है।
टायर खराब होने के मुख्य संकेत (तुरंत चेक करें)
साइडवॉल पर छोटी-छोटी दरारें या सूखी लकीरें
ट्रेड में उभरी हुई गोल गांठें (बुलबुले)
एक तरफ ज्यादा घिसाव (अंदरूनी या बाहरूनी किनारा)
ट्रेड डेप्थ 1.6 मिमी से कम (कानूनी न्यूनतम)
बार-बार पंचर होना
चलते वक्त कंपन या स्टीयरिंग में खिंचाव
टायर चेक कैसे करें (5 मिनट का काम)
हर 15 दिन में प्रेशर चेक करें (सुबह ठंडे टायर में)।
₹1 का सिक्का ट्रेड में डालें – अगर गांधीजी का सिर दिखे तो ट्रेड खत्म हो चुका है।
साइडवॉल और ट्रेड को हाथ से छूकर दरार या गांठ चेक करें।
हर 10,000 किमी पर टायर रोटेट करवाएं।
साल में दो बार एलाइनमेंट-बैलेंसिंग करवाएं।
सही टायर प्रेशर का उदाहरण (सामान्य कारें)
(हमेशा कार के डोर पर लगे स्टिकर या मैनुअल चेक करें)
कब टायर बदलें?
ट्रेड डेप्थ 3 मिमी से कम हो
| कार मॉडल | फ्रंट प्रेशर (PSI) | रियर प्रेशर (PSI) | फुल लोड पर |
|---|---|---|---|
| Maruti Swift | 32 | 30 | +4 |
| Hyundai Creta | 33 | 33 | +5 |
| Tata Nexon | 35 | 35 | +4 |
| Honda City | 32 | 30 | +3 |
टायर की उम्र 6 साल पूरी हो (DOT कोड चेक करें – आखिरी चार अंक हफ्ता-वर्ष बताते हैं)
कोई भी दरार, बुलबुला या गहरा कट दिखे
60,000-80,000 किमी पार कर जाए
टायर फटने पर क्या करें स्टीयरिंग को मजबूती से पकड़ें, ब्रेक न लगाएं, धीरे-धीरे गियर कम करें और किनारे लगाकर रुकें। कभी भी तेज ब्रेक या स्टियरिंग न घुमाएं।
डिस्क्लेमर यह सामान्य जानकारी है। टायर की स्थिति का आकलन हमेशा प्रमाणित सर्विस सेंटर या विशेषज्ञ से करवाएं। ड्राइविंग की सुरक्षा आपकी जिम्मेदारी है।