क्रिप्टो बर्निंग टोकन को परमानेंट रूप से सर्कुलेशन से हटाने की प्रक्रिया है, जो सप्लाई कम करके कीमत बढ़ाने में मदद करती है। यह 2026 में BNB जैसे टोकन के लिए महत्वपूर्ण है, जहां हालिया बर्न से $1.2 बिलियन वैल्यू के टोकन हटे। लेख में आसान उदाहरण, फायदे और रिस्क समझाए गए हैं।
क्रिप्टोकरेंसी की दुनिया में ‘बर्निंग’ एक ऐसी प्रक्रिया है जहां टोकन को जानबूझकर सर्कुलेशन से हमेशा के लिए हटा दिया जाता है। इसे समझने के लिए सोचिए कि आप कुछ सिक्के एक ऐसे वॉलेट में भेज देते हैं जहां से उन्हें कभी निकाला नहीं जा सकता। इस वॉलेट को ‘बर्न एड्रेस’ या ‘डेड वॉलेट’ कहते हैं, क्योंकि इसका प्राइवेट की नहीं होता या यह केवल रिसीव करने के लिए डिजाइन होता है। परिणामस्वरूप, टोटल सप्लाई कम हो जाती है, जो टोकन की वैल्यू को प्रभावित कर सकती है।
यह प्रक्रिया ब्लॉकचेन पर ट्रांसपेरेंट तरीके से होती है, जहां हर ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड होता है। उदाहरण के लिए, अगर कोई प्रोजेक्ट 1 मिलियन टोकन बर्न करता है, तो मार्केट में उपलब्ध टोकन की संख्या कम हो जाती है। यह सप्लाई-डिमांड के सिद्धांत पर काम करता है: अगर डिमांड वही रहे और सप्लाई घटे, तो कीमत बढ़ने की संभावना बनती है। लेकिन यह हमेशा गारंटीड नहीं होता, क्योंकि मार्केट सेंटिमेंट, एडॉप्शन और एक्सटर्नल फैक्टर भी роли खेलते हैं।
2026 में क्रिप्टो बर्निंग की रेलेवेंस बढ़ रही है क्योंकि कई प्रोजेक्ट्स टोकनॉमिक्स को मजबूत करने के लिए इसे इस्तेमाल कर रहे हैं। हाल ही में BNB Chain ने अपना 34वां क्वार्टरली बर्न किया, जिसमें 1,371,803.77 BNB टोकन हटाए गए, जिनकी वैल्यू लगभग $1.277 बिलियन थी। यह बर्न दो कंपोनेंट्स में हुआ: एक्टुअल बर्न में 1,371,703.67 BNB और पायोनियर बर्न में 100.1 BNB। ऐसे बर्न से BNB की सप्लाई को टारगेट 100 मिलियन तक लाने का प्रयास है, जो लॉन्ग-टर्म वैल्यू ग्रोथ के लिए जरूरी है।
क्रिप्टो बर्निंग के प्रकार कई हैं। पहला है ‘बायबैक एंड बर्न’, जहां प्रोजेक्ट रेवेन्यू से टोकन खरीदकर उन्हें बर्न करता है। Binance इसी मॉडल पर काम करता है, जहां ट्रेडिंग रेवेन्यू का हिस्सा BNB बर्न करने में लगता है। दूसरा है ‘ट्रांजैक्शन फी बर्न’, जैसे Ethereum का EIP-1559 अपग्रेड, जो अगस्त 2021 से लागू है। इसमें ट्रांजैक्शन की बेस फी बर्न हो जाती है, जो हाई नेटवर्क एक्टिविटी में नेट इश्यूएंस को कम करता है। 2026 में Ethereum ने हाई डिमांड पीरियड्स में डिफ्लेशनरी बिहेवियर दिखाया, जहां बर्न रेट इश्यू रेट से ज्यादा रहा।
तीसरा प्रकार है ‘स्केड्यूल्ड बर्न’, जहां प्रोजेक्ट्स मिलेस्टोन या टाइम-बेस्ड बर्न करते हैं। Uniswap ने दिसंबर 2025 के अंत में 100 मिलियन UNI टोकन बर्न किए, जिनकी वैल्यू $578 मिलियन थी। यह ट्रेजरी से किया गया बर्न था, जो प्रोटोकॉल की ट्रेडिंग वॉल्यूम $1 ट्रिलियन पहुंचने पर सेलिब्रेशन के रूप में हुआ। ऐसे बर्न से टोकन होल्डर्स को फायदा होता है, क्योंकि रिमेनिंग टोकन की रिलेटिव वैल्यू बढ़ती है।
कीमत पर असर समझने के लिए एक सिम्पल कैलकुलेशन देखें: मान लीजिए एक टोकन की टोटल सप्लाई 1 बिलियन है और मार्केट कैप $1 बिलियन। अगर 10% टोकन बर्न हो जाएं, तो सप्लाई 900 मिलियन रह जाती है। अगर मार्केट कैप वही रहे, तो प्रति टोकन वैल्यू 11.11% बढ़ सकती है। लेकिन रियल वर्ल्ड में यह इतना सिंपल नहीं, क्योंकि बर्न से मार्केट सेंटिमेंट बूस्ट होता है, जो ज्यादा इन्वेस्टर्स को अट्रैक्ट करता है। हालांकि, अगर बर्न के बाद सेलिंग प्रेशर बढ़े, तो शॉर्ट-टर्म डिप भी आ सकता है।
भारतीय कंटेक्स्ट में क्रिप्टो बर्निंग महत्वपूर्ण है, क्योंकि इंडियन इन्वेस्टर्स क्रिप्टो में बढ़ते जा रहे हैं। RBI और गवर्नमेंट रेगुलेशंस के बीच, डिफ्लेशनरी टोकन जैसे BNB या ETH इंडियन एक्सचेंजेस पर पॉपुलर हैं। 2026 में इंडियन स्टार्टअप्स जैसे Polygon (POL) भी फी-बर्निंग मेकैनिज्म यूज कर रहे हैं, जहां ट्रांजैक्शन फीस का हिस्सा बर्न होता है। यह स्केलेबिलिटी और वैल्यू प्रिजर्वेशन के लिए जरूरी है, खासकर जब 5G और DeFi एडॉप्शन बढ़ रहा है।
क्रिप्टो बर्निंग के फायदे और रिस्क्स
फायदे:
स्कार्सिटी क्रिएट करना: कम सप्लाई से टोकन दुर्लभ हो जाता है, जो कीमत को सपोर्ट करता है। जैसे Helium (HNT) ने अपना HNT बायबैक प्रोग्राम हॉल्ट किया, लेकिन पास्ट बर्न्स से वैल्यू स्टेबलाइज हुई।
नेटवर्क सिक्योरिटी: स्पैम अटैक्स रोकने के लिए, जैसे Avalanche या Ripple में पार्शियल फी बर्न।
होल्डर इंसेंटिव: बर्न से रिमेनिंग टोकन की वैल्यू बढ़ती है, जो लॉन्ग-टर्म होल्डिंग को एनकरेज करता है।
टोकनॉमिक्स इम्प्रूवमेंट: ICO के बाद अनसोल्ड टोकन बर्न करके, प्रोजेक्ट ट्रस्ट बिल्ड करता है। Neblio इसका उदाहरण है।
डिफ्लेशनरी इकोनॉमी: 2026 में प्रोजेक्ट्स जैसे PEPE ने $500 मिलियन टोकन बर्न का प्लान अनाउंस किया, जो 2026 तक सप्लाई रिड्यूस करेगा।
रिस्क्स:
शॉर्ट-टर्म वोलेटिलिटी: बर्न अनाउंसमेंट से पंप हो सकता है, लेकिन अगर एक्सपेक्टेशन मैच न हो, तो डंप।
ओवर-बर्निंग: ज्यादा बर्न से लिक्विडिटी कम हो सकती है, ट्रेडिंग मुश्किल।
रेगुलेटरी इश्यूज: कुछ कंट्रीज में बर्न को मैनिपुलेशन मान सकते हैं, हालांकि ब्लॉकचेन ट्रांसपेरेंसी से यह कम होता है।
नॉट गारंटीड प्राइस राइज: अगर डिमांड न बढ़े, तो बर्न बेकार। Pump.fun ने 18% PUMP सप्लाई बायबैक की, लेकिन प्राइस लोज पर ट्रेड कर रहा।
सेंट्रलाइजेशन रिस्क: अगर टीम कंट्रोल में बर्न करे, तो मिसयूज का खतरा।
हालिया क्रिप्टो बर्न इवेंट्स का टेबल (2025-2026)
| प्रोजेक्ट | बर्न डेट | बर्न अमाउंट | अप्रोक्स वैल्यू (USD) | असर |
|---|---|---|---|---|
| BNB Chain | जनवरी 2026 | 1,371,803.77 BNB | $1.277 बिलियन | सप्लाई रिडक्शन, प्राइस स्टेबलाइजेशन |
| Uniswap (UNI) | दिसंबर 2025 | 100 मिलियन UNI | $578 मिलियन | ट्रेजरी रिडक्शन, होल्डर वैल्यू बूस्ट |
| Tether (USDT) | अक्टूबर 2024 (रिसेंट एग्जांपल) | 3,000 मिलियन USDT | $3 बिलियन | स्टेबलकॉइन सप्लाई मैनेजमेंट |
| Ethereum (ETH) | ऑनगोइंग (EIP-1559) | वेरिएबल बेस फी | डेली मिलियंस | डिफ्लेशनरी प्रेशर, हाई एक्टिविटी में |
| PEPE | 2026 प्लान | $500 मिलियन वैल्यू | $500 मिलियन | मेमेकॉइन वैल्यू इंक्रीज |
यह टेबल दिखाता है कि बर्निंग डिफरेंट प्रोजेक्ट्स में कैसे यूज होती है। Ethereum जैसे में यह ऑटोमेटेड है, जबकि BNB में क्वार्टरली।
क्रिप्टो बर्निंग कैसे काम करती है? स्टेप-बाय-स्टेप
डिसीजन: प्रोजेक्ट टीम या कम्युनिटी वोट से बर्न अमाउंट तय होता है।
ट्रांसफर: टोकन को बर्न एड्रेस पर भेजा जाता है, जैसे 0x000…dead।
वेरिफिकेशन: ब्लॉकचेन एक्सप्लोरर पर ट्रांजैक्शन चेक किया जा सकता है।
अपडेट: टोटल सप्लाई अपडेट होती है, जैसे CoinMarketCap पर।
मार्केट रिएक्शन: अनाउंसमेंट से ट्रेडिंग वॉल्यूम बढ़ता है।
डिफ्लेशनरी क्रिप्टो लिस्ट में BNB, ETH, Polygon टॉप हैं। BNB की इनिशियल सप्लाई 200 मिलियन थी, जो बर्न से 153 मिलियन पर आ गई। Polygon में EIP-1559 जैसे फी बर्न से नेट इश्यूएंस कम होता है।
भारतीय इन्वेस्टर्स के लिए टिप: क्रिप्टो बर्निंग वाले प्रोजेक्ट्स चुनें जो सस्टेनेबल रेवेन्यू सोर्सेज से बर्न करते हों, जैसे ट्रेडिंग फीस। लेकिन रिसर्च करें, क्योंकि सभी बर्न प्राइस पंप नहीं करते। 2026 में Hyperliquid जैसे प्रोजेक्ट्स बायबैक से प्राइस फ्लोर क्रिएट कर रहे हैं, जो इंडियन मार्केट में पॉपुलर हो सकता है।
टॉप डिफ्लेशनरी क्रिप्टो और उनके बर्न मेकैनिज्म
Binance Coin (BNB): क्वार्टरली प्रॉफिट बर्न, टारगेट 100 मिलियन सप्लाई।
Ethereum (ETH): EIP-1559 से बेस फी बर्न, हाई एक्टिविटी में डिफ्लेशनरी।
Polygon (POL): फी बर्निंग, स्केलिंग के लिए।
Fantom (FTM): 10% ब्लॉक रिवॉर्ड बर्न, गवर्नेंस वोटेड।
KuCoin Token (KCS): डेली बायबैक एंड बर्न एक्सचेंज रेवेन्यू से।
यह मेकैनिज्म 2026 में क्रिप्टो इकोसिस्टम को मजबूत बनाएंगे, लेकिन इन्वेस्टमेंट से पहले रिस्क असेस करें।
Disclaimer: यह लेख सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और वित्तीय सलाह नहीं माना जाना चाहिए। क्रिप्टोकरेंसी में निवेश जोखिम भरा है, और पाठक अपनी रिसर्च करें।



