Ashubh Yog: 17 फरवरी का मंगल बन सकता है अमंगल, होंगी ये 5 अशुभ घटनाएं

17 फरवरी 2026 को फाल्गुन अमावस्या पर सूर्य ग्रहण, अग्नि पंचक और सूर्य-राहु युति जैसे अशुभ योग बनेंगे, जो कुंभ राशि में पंचग्रही संयोग से और मजबूत होंगे, जिससे कुछ राशियों पर स्वास्थ्य, मानसिक तनाव और निर्णय क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, साथ ही धनिष्ठा नक्षत्र का प्रभाव रिश्तों और करियर को प्रभावित करेगा।

ज्योतिष शास्त्र में 17 फरवरी 2026 को बनने वाले योगों की वजह से मंगलवार का दिन कई लोगों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। इस दिन फाल्गुन अमावस्या पड़ रही है, जो स्वयं में पितृ पक्ष से जुड़ी ऊर्जाओं को सक्रिय करती है। साथ ही, कुंभ राशि में सूर्य का प्रवेश राहु के साथ युति बनाता है, जो 64 वर्षों बाद दुर्लभ संयोग है। यह योग वैदिक ज्योतिष में विस्फोटक माना जाता है, क्योंकि सूर्य पिता और आत्मविश्वास का कारक है, जबकि राहु छाया ग्रह के रूप में भ्रम और अस्थिरता लाता है। इस संयोग से निर्णय लेने में भूलें हो सकती हैं, खासकर व्यापार या निवेश से जुड़े मामलों में।

इस दिन का पंचांग देखें तो सूर्योदय सुबह 6:58 बजे और सूर्यास्त शाम 6:13 बजे होगा। चंद्रमा मकर राशि में संचार करेगा, जो शनि की राशि होने से स्थिरता पर दबाव डालता है। नक्षत्र धनिष्ठा शाम 9:16 बजे तक रहेगा, जो वासु देवताओं से जुड़ा है और संगीत, कला या यात्रा से संबंधित कार्यों में बाधा उत्पन्न कर सकता है। राहुकाल दोपहर 3:24 से 4:48 बजे तक रहेगा, जिसमें कोई नया कार्य शुरू न करें।

5 प्रमुख अशुभ घटनाएं और उनके प्रभाव

सूर्य ग्रहण का लगना : शाम 5:31 बजे से 7:57 बजे तक वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा, जो कुंभ राशि में पड़ेगा। भारत में न दिखने के बावजूद, इसका ज्योतिषीय असर सभी राशियों पर पड़ेगा। यह ग्रहण राहु के साथ सूर्य की युति से बनता है, जो स्वास्थ्य में गिरावट, विशेषकर हृदय और रक्तचाप से जुड़ी समस्याएं ला सकता है। कर्क, सिंह और कुंभ राशि वाले सबसे अधिक प्रभावित होंगे, जहां मानसिक उलझन और आत्मविश्वास की कमी महसूस हो सकती है।

अग्नि पंचक का आरंभ : फाल्गुन अमावस्या पर अग्नि पंचक लगेगा, जो अग्नि तत्व से जुड़ी दुर्घटनाओं को बढ़ावा देता है। यह योग घरेलू उपकरणों, वाहनों या रसोई से संबंधित जोखिम बढ़ाता है। ज्योतिष में पंचक को मृत्यु या हानि से जोड़ा जाता है, इसलिए इस期间 अंतिम संस्कार या निर्माण कार्य टालें। मेष और वृश्चिक राशि वालों के लिए यह योग दुर्घटना का कारक बन सकता है, जहां सावधानी से वाहन चलाना जरूरी होगा।

सूर्य-राहु ग्रहण योग : 64 वर्षों बाद कुंभ में यह दुर्लभ युति बनेगी, जहां सूर्य शनि की राशि में राहु के साथ होगा। यह योग निर्णयों में भ्रम, रिश्तों में तनाव और आर्थिक नुकसान का कारण बनता है। धनु और मीन राशि पर इसका असर गहरा होगा, जहां नौकरी में बदलाव या पार्टनरशिप में विश्वासघात की संभावना बढ़ेगी। इस योग से बचने के लिए सूर्य मंत्र का जाप फायदेमंद रहेगा।

पंचग्रही योग कुंभ में : सूर्य, राहु, मंगल और शुक्र का संयोग धनिष्ठा नक्षत्र में बनेगा, जो भावनाओं और मन पर असर डालता है। यह योग करियर में बाधाएं, विशेषकर टेक या क्रिएटिव फील्ड में, उत्पन्न कर सकता है। वृषभ और तुला राशि वाले प्रभावित होंगे, जहां रिश्तों में मतभेद या स्वास्थ्य में कमजोरी आएगी। नक्षत्र का प्रभाव यात्रा योजनाओं को प्रभावित करेगा, इसलिए लंबी दूरी की यात्रा टालें।

अमावस्या पर मंगलवार का संयोग : अमावस्या शाम 5:30 बजे तक रहेगी, जो मंगलवार के साथ मिलकर अमंगलकारी बनती है। यह योग पितृ दोष को सक्रिय करता है, जिससे परिवार में विवाद या पुरानी बीमारियां उभर सकती हैं। मकर और कुम्भ राशि पर असर अधिक होगा, जहां संपत्ति से जुड़े मामलों में हानि की आशंका है। इस दिन दान-पुण्य से नकारात्मक प्रभाव कम किया जा सकता है।

राशियों पर विस्तृत प्रभाव (तालिका)

इन योगों से बचाव के उपाय

राशिप्रमुख प्रभावसावधानियां
मेषस्वास्थ्य में गिरावट, दुर्घटना जोखिमवाहन सावधानी, अग्नि से दूर रहें
वृषभरिश्तों में तनाव, आर्थिक हानिनिवेश टालें, परिवार से चर्चा करें
मिथुननिर्णय भ्रम, करियर बाधामहत्वपूर्ण मीटिंग स्थगित करें
कर्कमानसिक दबाव, हृदय समस्याएंध्यान करें, डॉक्टर से सलाह लें
सिंहआत्मविश्वास कमी, नेतृत्व चुनौतीसूर्य पूजा, लाल कपड़े पहनें
कन्यास्वास्थ्य कमजोरी, यात्रा जोखिमयात्रा टालें, हरी सब्जियां खाएं
तुलापार्टनरशिप टूटन, भावनात्मक उथल-पुथलशुक्र मंत्र जाप, सफेद वस्तु दान
वृश्चिकदुर्घटना, गुप्त शत्रु सक्रियमंगल पूजा, लाल फल दान करें
धनुआर्थिक नुकसान, रिश्ते विवादगुरु मंत्र, पीली वस्तु दान
मकरसंपत्ति हानि, परिवार तनावशनि पूजा, तेल दान करें
कुंभमानसिक भ्रम, स्वास्थ्य गिरावटराहु मंत्र, काला कपड़ा दान
मीननिर्णय गलती, पितृ दोष सक्रियविष्णु पूजा, दूध दान करें

सूर्य ग्रहण के दौरान : घर में रहें, भोजन न करें और ध्यान केंद्रित रखें। ग्रहण समाप्ति पर स्नान करें।

राहु-केतु शांति : काले तिल का दान करें या राहु मंत्र “ओम रां राहवे नमः” का 108 बार जाप करें।

पंचक में सावधानी : लकड़ी या धातु से जुड़े कार्य टालें, और अगर जरूरी हो तो पांच गुड़ की गोलियां बहते पानी में प्रवाहित करें।

नक्षत्र प्रभाव कम करने के लिए : धनिष्ठा नक्षत्र में वाद्य यंत्र न बजाएं, और संगीत से दूर रहें।

सामान्य टिप्स : इस दिन काले या लाल रंग के कपड़े पहनें, मांसाहारी भोजन से परहेज करें और शाम को हनुमान चालीसा पढ़ें।

यह दिन ज्योतिषीय रूप से चुनौतीपूर्ण है, लेकिन उचित उपायों से नकारात्मक प्रभाव को न्यूनतम किया जा सकता है। कुंभ राशि में बनने वाला यह संयोग वैश्विक स्तर पर भी राजनीतिक उथल-पुथल या प्राकृतिक घटनाओं को जन्म दे सकता है, इसलिए सतर्क रहना जरूरी है।

Disclaimer: यह ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है और वैज्ञानिक तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। पाठक अपनी विवेक से निर्णय लें।

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