गौतम अदाणी को ट्रंप प्रशासन ने क्यों बनाया टारगेट? हिंडनबर्ग से SEC और WSJ तक, आरोपों की कोशिश में क्या है सच्चाई?

“गौतम अदाणी पर अमेरिकी DOJ और SEC के गंभीर आरोपों के बीच ट्रंप प्रशासन के साथ लॉबिंग जारी है, लेकिन भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव के कारण मामला अटका हुआ है। हिंडनबर्ग रिपोर्ट से शुरू हुई जांच अब ब्राइबरी स्कीम तक पहुंची, जिसमें 265 मिलियन डॉलर की रिश्वत का आरोप है, जबकि अदाणी ग्रुप सभी आरोपों को बेबुनियाद बताकर कानूनी लड़ाई लड़ रहा है।”

गौतम अदाणी पर अमेरिकी जांच एजेंसियों का फोकस 2023 से तेज हुआ, जब अमेरिकी शॉर्ट-सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च ने अदाणी ग्रुप पर स्टॉक मैनिपुलेशन और अकाउंटिंग फ्रॉड के गंभीर आरोप लगाए। इस रिपोर्ट के बाद ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों का मार्केट वैल्यू अरबों डॉलर घट गया, लेकिन ग्रुप ने इसे भारत पर हमला बताकर खारिज किया।

2024 के अंत में अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस (DOJ) ने क्रिमिनल इंडिक्टमेंट जारी किया, जिसमें गौतम अदाणी, उनके भतीजे सागर अदाणी और अन्य executives पर आरोप लगाया कि उन्होंने भारतीय अधिकारियों को करीब 265 मिलियन डॉलर (लगभग 2200 करोड़ रुपये) की रिश्वत दी ताकि अदाणी ग्रीन एनर्जी को सोलर पावर कॉन्ट्रैक्ट्स मिल सकें। इन कॉन्ट्रैक्ट्स से 20 साल में 2 बिलियन डॉलर का मुनाफा होने का अनुमान था। आरोप है कि इस स्कीम को छिपाकर अमेरिकी निवेशकों और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस से 3 बिलियन डॉलर से ज्यादा की फंडिंग ली गई।

अलग से अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) ने सिविल चार्जेस लगाए, जिसमें कहा गया कि अदाणी ग्रीन एनर्जी के एंटी-ब्राइबरी और एंटी-करप्शन प्रैक्टिसेज के बारे में गलत जानकारी देकर निवेशकों को धोखा दिया गया। यह मामला फॉरेन करप्ट प्रैक्टिसेज एक्ट (FCPA) के उल्लंघन से जुड़ा है।

ट्रंप प्रशासन के आने के बाद अदाणी की तरफ से हाई-प्रोफाइल अमेरिकी वकीलों की टीम ने व्हाइट हाउस अधिकारियों से संपर्क किया ताकि क्रिमिनल और सिविल दोनों मामलों को ड्रॉप करवाया जा सके। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मई 2025 में अदाणी प्रतिनिधियों ने ट्रंप टीम से मुलाकात की और तर्क दिया कि ये प्रॉसीक्यूशन ट्रंप की पॉलिसी से मेल नहीं खाती। हालांकि, भारत-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव (ट्रेड, टैरिफ और अन्य मुद्दों) के कारण कोई डील नहीं हुई। सितंबर 2025 तक मामला स्टॉल हो गया, जिससे अदाणी ग्रुप की ग्लोबल एक्सपैंशन प्लान्स प्रभावित हुईं।

WSJ ने जून 2025 में रिपोर्ट की कि अमेरिकी प्रॉसीक्यूटर्स अदाणी ग्रुप की जांच कर रहे हैं कि क्या मुंद्रा पोर्ट से ईरानी लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) इंपोर्ट की गई, जो अमेरिकी सैंक्शंस का उल्लंघन हो सकता है। फरवरी 2026 में OFAC ने अदाणी एंटरप्राइजेज को रिक्वेस्ट फॉर इंफॉर्मेशन भेजा, लेकिन कंपनी ने इसे जांच का हिस्सा बताकर कोई गलती न मानते हुए सहयोग का वादा किया।

SEC की सिविल केस में सर्विस ऑफ समंस में देरी हुई क्योंकि भारत सरकार ने हैग कन्वेंशन के तहत दो बार रिक्वेस्ट ठुकराई। जनवरी 2026 में SEC ने कोर्ट से ईमेल या अमेरिकी लॉ फर्म्स के जरिए समंस भेजने की इजाजत मांगी। बाद में अदाणी पक्ष ने समंस स्वीकार करने पर सहमति जताई, जिससे केस आगे बढ़ सका। अदाणी ने सुलिवन एंड क्रॉमवेल LLP की टीम हायर की, जिसमें रॉबर्ट ग्यूफ्रा जूनियर (ट्रंप के पूर्व वकील) लीड कर रहे हैं।

मुख्य आरोप और अदाणी की प्रतिक्रिया

हिंडनबर्ग रिपोर्ट (जनवरी 2023) : स्टॉक मैनिपुलेशन, शेल कंपनियों से राउंड-ट्रिपिंग, ओवर-इनवॉइसिंग का आरोप। ग्रुप ने इसे “मैलिशियस” और “भारत पर अटैक” बताया।

DOJ क्रिमिनल इंडिक्टमेंट (नवंबर 2024) : 265 मिलियन डॉलर ब्राइबरी स्कीम, FCPA उल्लंघन।

SEC सिविल चार्जेस : फ्रॉड और मिसलीडिंग स्टेटमेंट्स।

WSJ रिपोर्ट्स : ईरान सैंक्शंस evasion, ब्राइबरी के प्रभाव पर भारत-अमेरिका संबंध।

अदाणी ग्रुप का स्टैंड: सभी आरोप बेबुनियाद, कंपनी कोई गलती नहीं मानेगी, कानूनी तौर पर लड़ाई लड़ेगी। अदाणी ग्रीन ने स्पष्ट किया कि कंपनी खुद किसी चार्ज में नहीं है।

प्रभाव और आगे क्या?

अदाणी ग्रुप की स्टॉक्स समय-समय पर गिरावट झेल रही हैं, जैसे जनवरी 2026 में SEC की समंस मूव से 5-15% तक गिरावट आई। लेकिन ग्रुप ने रिकवरी दिखाई है। ट्रंप प्रशासन के साथ लॉबिंग जारी है, लेकिन भारत-अमेरिका टेंशन्स के कारण रिजॉल्यूशन मुश्किल। यह मामला अदाणी की ग्लोबल महत्वाकांक्षाओं, खासकर अमेरिका में 10 बिलियन डॉलर इन्वेस्टमेंट प्लान्स पर असर डाल सकता है।

Disclaimer: यह एक न्यूज रिपोर्ट है। इसमें शामिल जानकारी उपलब्ध रिपोर्ट्स पर आधारित है और कानूनी मामलों में अंतिम फैसला अदालतों द्वारा होगा।

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