“2026 में इंटरनेट पर अधिकांश नया कंटेंट AI से बन रहा है, जिससे फेक न्यूज, डीपफेक और भ्रामक जानकारी का खतरा बढ़ गया है। भारत सरकार ने नए नियमों से AI-जनरेटेड सामग्री पर लेबल अनिवार्य किया है और प्लेटफॉर्म्स को 3 घंटे में आपत्तिजनक कंटेंट हटाना होगा। AI डिटेक्शन टूल्स जैसे Originality.AI, GPTZero और Vastav.AI अब आपकी ऑनलाइन सुरक्षा की पहली लाइन बन गए हैं, जो टेक्स्ट, इमेज और वीडियो की असलियत बताते हैं।”
एआई जनरेटेड कंटेंट अब इंटरनेट का प्रमुख हिस्सा बन चुका है। विशेषज्ञों के अनुसार, 2026 में ऑनलाइन सामग्री का बड़ा हिस्सा सिंथेटिक हो गया है, जहां AI टूल्स टेक्स्ट, इमेज, वीडियो और ऑडियो सब कुछ सेकंडों में तैयार कर देते हैं। वैश्विक स्तर पर जनरेटिव AI मार्केट 2024 में 14.8 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2030 तक 80 बिलियन डॉलर पहुंचने का अनुमान है, जिसमें AI वीडियो जेनरेशन सेगमेंट अकेले 2024 में 665 मिलियन डॉलर का था और 2034 तक 2.84 बिलियन तक पहुंचेगा।
भारत में स्थिति और गंभीर है, क्योंकि सोशल मीडिया पर डीपफेक वीडियो, फर्जी तस्वीरें और भ्रामक पोस्ट तेजी से फैल रहे हैं। हाल ही में केंद्र सरकार ने IT (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules में संशोधन किया है, जो 20 फरवरी 2026 से लागू हो गए हैं। इन नियमों के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को AI-जनरेटेड या सिंथेटिक कंटेंट को स्पष्ट रूप से लेबल करना अनिवार्य है। लेबल में ‘AI-Generated’ या ‘Synthetic Content’ जैसे शब्द दिखने चाहिए, और ये मेटाडेटा या वॉटरमार्क के जरिए परमानेंट रहेंगे।
सरकार ने सिंथेटिक कंटेंट की परिभाषा भी दी है – ऐसे ऑडियो, वीडियो या विजुअल्स जो कंप्यूटर से बनाए गए हों लेकिन असली लगें। सामान्य एडिटिंग, एक्सेसिबिलिटी फीचर्स या शिक्षा/डिजाइन से जुड़े काम इससे अलग हैं। प्लेटफॉर्म्स को ऑटोमेटेड टूल्स इस्तेमाल कर गैरकानूनी AI कंटेंट जैसे डीपफेक, चाइल्ड एक्सप्लॉइटेशन मैटेरियल, फेक डॉक्यूमेंट्स या इंपर्सोनेशन को रोकना होगा।
अगर सरकार या कोर्ट द्वारा चिह्नित किया जाए तो आपत्तिजनक AI कंटेंट को अब सिर्फ 3 घंटे में हटाना अनिवार्य है, पहले यह समय 36 घंटे था। यूजर्स को भी AI इस्तेमाल की घोषणा करनी होगी, और प्लेटफॉर्म्स को यूजर्स को AI के दुरुपयोग के बारे में वार्निंग देनी होगी। यह बदलाव डीपफेक से जुड़े बढ़ते मामलों को रोकने के लिए है, जहां फर्जी वीडियो से व्यक्तिगत और सामाजिक नुकसान हो रहा है।
AI कंटेंट की पहचान अब जरूरी हो गई है, क्योंकि सिंथेटिक सामग्री से ट्रस्ट कम हो रहा है। कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि 2026 में ऑनलाइन कंटेंट का 90% तक सिंथेटिक हो सकता है, जिससे ‘AI स्लॉप’ यानी कम वैल्यू वाली जनरेटेड सामग्री इंटरनेट को भर रही है।
AI कंटेंट की पहचान कैसे करें? प्रमुख तरीके और टूल्स
टेक्स्ट डिटेक्शन – AI लिखित टेक्स्ट में पैटर्न जैसे दोहराव, कम विविधता वाले वाक्य और प्रेडिक्टेबल स्ट्रक्चर होते हैं। टूल्स स्टैटिस्टिकल एनालिसिस, मशीन लर्निंग और वॉटरमार्किंग का इस्तेमाल करते हैं।
Originality.AI – GPT-4 जैसे मॉडल्स के लिए 90%+ एक्यूरेसी, प्लेजियरिज्म चेक के साथ।
GPTZero – एजुकेशन और प्रोफेशनल यूज के लिए लोकप्रिय, फॉल्स पॉजिटिव कम।
Copyleaks और Winston AI – हाई एक्यूरेसी के साथ बैच स्कैनिंग।
इमेज और वीडियो डिटेक्शन – डीपफेक में पिक्सल पैटर्न, लाइटिंग इनकंसिस्टेंसी या फेशियल मूवमेंट्स से पता चलता है।
Vastav.AI – भारत में डेवलप्ड, क्लाउड-बेस्ड टूल जो वीडियो, इमेज और ऑडियो को रीयल-टाइम में चेक करता है। मीडिया और साइबरसिक्योरिटी में इस्तेमाल।
अन्य टूल्स मल्टीमॉडल एनालिसिस से सिंथेटिक मीडिया को स्पॉट करते हैं।
वॉटरमार्किंग और मेटाडेटा – कई AI टूल्स अब इनविजिबल वॉटरमार्क एम्बेड करते हैं, जो डिटेक्शन को आसान बनाते हैं।
भारत में AI कंटेंट के खतरे और सुरक्षा टिप्स
फेक न्यूज और इलेक्शन प्रभाव – AI से बने फर्जी पोस्ट से अफवाहें फैलती हैं।
पर्सनल सेफ्टी – डीपफेक से ब्लैकमेल या रेपुटेशन डैमेज।
प्राइवेसी – AI टूल्स से डेटा मिसयूज।
सुरक्षा के लिए क्या करें?
संदिग्ध कंटेंट को AI डिटेक्टर से चेक करें।
लेबल वाली सामग्री पर भरोसा कम करें अगर सोर्स वेरिफाई न हो।
प्लेटफॉर्म्स पर रिपोर्ट करें।
ऑथेंटिक सोर्स से जानकारी लें।
बच्चों को AI के बारे में बताएं और यूज लिमिट करें।
एआई ने कंटेंट क्रिएशन को तेज और सस्ता बना दिया है, लेकिन असलियत की पहचान ही अब सबसे बड़ी चुनौती है। नए नियम और टूल्स से यूजर्स को सुरक्षित रखने की कोशिश हो रही है, लेकिन जागरूकता सबसे मजबूत हथियार है।
Disclaimer: यह एक न्यूज रिपोर्ट है। इसमें दी गई जानकारी उपलब्ध ट्रेंड्स और नियमों पर आधारित है।



