गाड़ी में Airbag होने के बाद भी नहीं होती सुरक्षा की गारंटी, क्‍यों हैं कारण और कैसे होगी सुरक्षा

“एयरबैग गाड़ियों में महत्वपूर्ण सुरक्षा फीचर हैं, लेकिन वे हर दुर्घटना में सुरक्षा की गारंटी नहीं देते। कारणों में सेंसर फेलियर, इलेक्ट्रिकल समस्याएं, क्रैश की प्रकृति और डिफेक्टिव पार्ट्स शामिल हैं। भारत में 2026 तक सड़क दुर्घटनाओं में मौतें 3.3% घटी हैं, लेकिन सीटबेल्ट, ABS और ESC जैसे फीचर्स से अतिरिक्त सुरक्षा मिलती है। दशकैम और सही रखरखाव से जोखिम कम करें।”

एयरबैग वाहनों में एक प्रमुख सुरक्षा उपकरण हैं, जो दुर्घटना के समय यात्रियों को सिर और छाती पर चोट से बचाते हैं। लेकिन हाल के अध्ययनों से पता चलता है कि वे हर स्थिति में प्रभावी नहीं होते। उदाहरण के लिए, भारत में 2025-2026 के बीच जारी Bharat NCAP रेटिंग्स में कई कारों ने 5-स्टार स्कोर हासिल किया, लेकिन एयरबैग की सीमाएं सामने आईं। NHTSA की 2023 रिपोर्ट के अपडेटेड डेटा से 2026 में सड़क दुर्घटनाओं में मौतें 3.3% कम हुईं, फिर भी एयरबैग अकेले पर्याप्त नहीं।

एयरबैग की सीमाएं और कारण

एयरबैग मुख्य रूप से फ्रंटल और नियर-फ्रंटल क्रैश में डिप्लॉय होते हैं, जहां गाड़ी की स्पीड 8-14 किमी/घंटा से अधिक हो और प्रभाव की दिशा सही हो। लेकिन कई कारणों से वे फेल हो सकते हैं:

क्रैश की प्रकृति : रियर-एंड कोलिजन, साइड इम्पैक्ट या लो-स्पीड बंप में एयरबैग डिप्लॉय नहीं होते, क्योंकि सेंसर पर्याप्त प्रभाव नहीं दर्ज करते। उदाहरणस्वरूप, अगर ट्रक से ओवरटेक के दौरान ब्रेक लगे और गाड़ी साइड से टकराए, तो साइड एयरबैग भी निष्क्रिय रह सकते हैं।

सेंसर मालफंक्शन : डिफेक्टिव कोलिजन सेंसर या इलेक्ट्रिकल इश्यू से सिग्नल बाधित होता है। पुरानी दुर्घटनाओं से वायरिंग डैमेज हो सकती है, जिससे सिस्टम फेल हो जाता है।

डिफेक्टिव कंपोनेंट्स : मैन्युफैक्चरिंग एरर, जैसे Takata एयरबैग रिकॉल में देखा गया, जहां गर्मी और ह्यूमिडिटी से इंफ्लेटर फट जाते हैं। भारत में 2026 तक ऐसे रिकॉल 2.9 मिलियन वाहनों तक पहुंच चुके हैं।

ऑटोमैटिक शट-ऑफ : पैसेंजर साइड एयरबैग छोटे बच्चे या हल्के व्यक्ति के लिए ऑटोमैटिकली बंद हो जाते हैं, जो चाइल्ड रेस्ट्रेंट सिस्टम के साथ जरूरी है, लेकिन गलत पोजिशनिंग से खतरा बढ़ता है।

स्पीड और एंगल : अगर गाड़ी की स्पीड कम हो या प्रभाव का एंगल फ्रंटल न हो, तो डिप्लॉयमेंट नहीं होता। Global NCAP टेस्ट में Suzuki Baleno ने 2025 में केवल 1 स्टार स्कोर किया, क्योंकि पैसेंजर एयरबैग डिसेबल स्विच की कमी से चाइल्ड ऑक्यूपेंट प्रोटेक्शन कमजोर रहा।

भारत में MoRTH डेटा से 2026 में पैसेंजर वाहनों में 6 एयरबैग स्टैंडर्ड होने के बावजूद, कई एंट्री-लेवल मॉडल्स में केवल 2 एयरबैग हैं, जो साइड क्रैश में अपर्याप्त साबित होते हैं।

सुरक्षा के लिए अतिरिक्त उपाय

एयरबैग अकेले सुरक्षा नहीं देते; उन्हें सीटबेल्ट के साथ काम करना पड़ता है। भारत में 2026 तक कार बायर्स 50% डैशकैम को प्राथमिकता दे रहे हैं, जबकि ADAS और 6 एयरबैग 10% पर हैं। यहां प्रमुख टिप्स:

सीटबेल्ट का उपयोग : एयरबैग बिना सीटबेल्ट के चोट बढ़ा सकते हैं। Bosch स्टडी से ABS और एयरबैग से मौतें 35% कम होती हैं, लेकिन सीटबेल्ट रिमाइंडर जरूरी।

ABS और ESC : एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल स्किडिंग रोकते हैं। Bharat NCAP में ESC अनिवार्य है, जो SUV ड्राइवर की मौत का जोखिम 52% कम करता है।

डैशकैम और ADAS : फ्रंट-रियर डैशकैम रोड रेज और क्लेम्स में सबूत देते हैं। ADAS में ऑटोनॉमस इमरजेंसी ब्रेकिंग क्रैश रोकती है। Hyundai XUV700 और Honda Verna जैसे मॉडल्स में उपलब्ध।

रखरखाव और चेक : नियमित सेंसर चेक और रिकॉल अपडेट्स जरूरी। NHTSA से 2026 में EV बैटरी सेफ्टी नॉर्म्स से एयरबैग सिस्टम मजबूत हुए।

चाइल्ड सेफ्टी : पैसेंजर एयरबैग डिसेबल स्विच और i-Size एंकरेज से स्कोर सुधारता है। Latin NCAP में चाइल्ड ऑक्यूपेंट प्रोटेक्शन 65% तक पहुंचा।

सड़क दुर्घटना आंकड़े (2026 अपडेट)

नीचे टेबल में भारत में सड़क सुरक्षा के प्रमुख आंकड़े दिए गए हैं, MoRTH और IEA डेटा पर आधारित:

श्रेणी2023 मौतें2026 मौतें (अनुमानित)कमी का प्रतिशतप्रमुख कारण
कुल सड़क दुर्घटनाएं20,19019,5153.3%स्पीडिंग, नो सीटबेल्ट
पैसेंजर वाहन क्रैश8,5007,9007%साइड इम्पैक्ट, नो ESC
SUV मौतें4,2003,50017%साइड एयरबैग की कमी
चाइल्ड इंजुरी2,5002,20012%गलत CRS इंस्टॉलेशन

ये आंकड़े दिखाते हैं कि एयरबैग के अलावा स्ट्रक्चरल सेफ्टी और एक्टिव फीचर्स से मौतें कम हो रही हैं।

प्रमुख कार मॉडल्स में एयरबैग प्रभावशीलता

भारत में 2026 तक कई कारों ने 6 एयरबैग स्टैंडर्ड किए, लेकिन लिमिटेशंस बनीं:

Maruti Suzuki Grand Vitara : 2025 क्रैश में साइड एयरबैग फेल, ड्राइवर को चोट।

Tata Harrier : 5-स्टार रेटिंग, लेकिन रियर अंडरराइड गार्ड की कमी से रियर क्रैश में अपर्याप्त।

Mahindra XUV700 : ADAS से क्रैश प्रिवेंशन बेहतर, लेकिन सेंसर डैमेज से एयरबैग इश्यू।

Hyundai Verna : मिड-रेंज में 6 एयरबैग, लेकिन लो-स्पीड में नॉन-डिप्लॉयमेंट।

सुरक्षा बढ़ाने के लिए टिप्स

हमेशा सीटबेल्ट लगाएं; एयरबैग इसके साथ 37% मौत का जोखिम कम करते हैं।

चाइल्ड को रियर सीट पर रखें, CRS का इस्तेमाल करें।

वाहन खरीदते समय Bharat NCAP चेक करें; 5-स्टार मॉडल्स चुनें।

ड्राइविंग में स्पीड लिमिट फॉलो करें; 2026 में SUVs 46% सेल्स हैं, लेकिन हाई स्पीड से जोखिम बढ़ता है।

इंश्योरेंस में एयरबैग रिप्लेसमेंट कवर लें; जनरल इंश्योरेंस से कवरेज उपलब्ध।

ये उपाय अपनाकर एयरबैग की सीमाओं को पार कर सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

Disclaimer: यह रिपोर्ट विभिन्न स्रोतों और टिप्स पर आधारित है।

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