“18 फरवरी 2026 को राख बुधवार के साथ ईसाई समुदाय में लेंट का पवित्र 40-दिवसीय काल शुरू हो गया है। यह अवधि यीशु मसीह के 40 दिनों के निर्जन उपवास की याद में मनाई जाती है, जिसमें उपवास, प्रार्थना, दान और पश्चाताप के माध्यम से आत्म-शुद्धि और ईश्वर से निकटता की खोज की जाती है। राख लगवाने की परंपरा मनुष्य की नश्वरता की याद दिलाती है और गुनाहों से मुक्ति का संदेश देती है।”
राख बुधवार 2026: विस्तृत जानकारी
राख बुधवार (Ash Wednesday) ईसाई धर्म में लेंट (Lent) मौसम की शुरुआत का प्रतीक है। यह दिन विशेष रूप से कैथोलिक, एंग्लिकन, लूथरन और अन्य पश्चिमी ईसाई संप्रदायों में महत्वपूर्ण होता है। 2026 में यह बुधवार, 18 फरवरी को पड़ रहा है, जो ईस्टर संडे (5 अप्रैल 2026) से ठीक 46 दिन पहले है। लेंट की अवधि 40 दिन की होती है (रविवार को छोड़कर, क्योंकि रविवार उत्सव का दिन माना जाता है), जो होली थर्सडे (2 अप्रैल 2026) तक चलती है।
राख बुधवार का नाम ‘राख’ (Ashes) से जुड़ा है। चर्च में पुजारी या पादरी पिछले साल के पाम संडे (Palm Sunday) पर इस्तेमाल हुए पाम की पत्तियों को जलाकर राख बनाते हैं। इस राख को भक्तों के माथे पर क्रॉस के चिह्न के रूप में लगाया जाता है। यह क्रिया दो मुख्य वाक्यों के साथ की जाती है:
“धूल से तू बना है और धूल में मिल जाएगा” (Remember you are dust, and to dust you shall return) – यह पुराने नियम की किताब जेनेसिस से लिया गया है।
या “पश्चाताप करो और सुसमाचार पर विश्वास करो” (Repent and believe in the Gospel)।
यह राख लगवाना मनुष्य की नश्वरता, पाप और ईश्वर के सामने विनम्रता की याद दिलाता है। भारत में कैथोलिक चर्चों, जैसे मुंबई, दिल्ली, गोवा, केरल और पूर्वोत्तर राज्यों के गिरजाघरों में बड़ी संख्या में लोग राख बुधवार की मिस्सा (Mass) में शामिल होते हैं और राख प्राप्त करते हैं।
लेंट काल क्यों 40 दिन का होता है?
ईसाई परंपरा में 40 की संख्या बाइबल में कई महत्वपूर्ण घटनाओं से जुड़ी है:
यीशु मसीह ने निर्जन स्थान में 40 दिन और 40 रात उपवास किया और शैतान के प्रलोभनों का सामना किया (मैथ्यू 4:1-11)।
नूह के समय में बाढ़ के दौरान 40 दिन और 40 रात बारिश हुई।
मूसा पर्वत सीनाई पर 40 दिन रहे।
इस्राएलियों ने मिस्र से निकलकर वादे की भूमि तक पहुंचने में 40 वर्ष लगाए।
इसलिए लेंट 40 दिनों का होता है, जो यीशु के उपवास और परीक्षा की नकल करता है। यह अवधि ईस्टर (यीशु के पुनरुत्थान) की तैयारी है।
लेंट के दौरान क्या करते हैं ईसाई?
लेंट तीन मुख्य स्तंभों पर टिका होता है:
उपवास (Fasting) : राख बुधवार और गुड फ्राइडे पर 18-59 वर्ष के स्वस्थ कैथोलिक केवल एक पूरा भोजन और दो हल्के भोजन ले सकते हैं। मांसाहार से परहेज अनिवार्य है।
परहेज (Abstinence) : 14 वर्ष से अधिक उम्र के सभी कैथोलिक लेंट की हर शुक्रवार को मांस नहीं खाते। कई लोग अन्य चीजों जैसे शराब, सिगरेट, सोशल मीडिया या मनोरंजन से परहेज करते हैं।
दान और सेवा (Almsgiving) : जरूरतमंदों की मदद, दान देना और स्वयंसेवा। यह दूसरों के प्रति प्रेम और करुणा दिखाता है।
प्रार्थना (Prayer) : रोजाना अधिक प्रार्थना, बाइबल पढ़ना, रोजरी, स्टेशन्स ऑफ द क्रॉस (Stations of the Cross) और कन्फेशन (पाप स्वीकारोक्ति)।
भारत में राख बुधवार की खासियत
भारत में ईसाई समुदाय (करीब 2.8 करोड़) मुख्य रूप से केरल, गोवा, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, दिल्ली-NCR और पूर्वोत्तर में केंद्रित है। यहां राख बुधवार को चर्चों में विशेष मिस्सा होती है। गोवा और केरल में यह त्योहार बड़े स्तर पर मनाया जाता है, जहां परिवार एक साथ चर्च जाते हैं। कई भारतीय ईसाई लेंट में मछली के बजाय शाकाहारी भोजन अपनाते हैं और सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं।
2026 के प्रमुख तिथियां लेंट और ईस्टर की
राख बुधवार: 18 फरवरी 2026
पहला लेंट संडे: 22 फरवरी 2026
पाम संडे: 29 मार्च 2026
होली थर्सडे (Maundy Thursday): 2 अप्रैल 2026
गुड फ्राइडे: 3 अप्रैल 2026
ईस्टर संडे: 5 अप्रैल 2026
यह मौसम आत्म-निरीक्षण, नवीनीकरण और ईश्वर से गहरा जुड़ाव का अवसर प्रदान करता है। कई लोग लेंट में कोई बुरी आदत छोड़कर नई शुरुआत करते हैं।
Disclaimer: यह लेख सामान्य सूचना और धार्मिक परंपराओं पर आधारित है। व्यक्तिगत धार्मिक अभ्यास के लिए अपने चर्च या पादरी से मार्गदर्शन लें।



