ब्राजील, दुनिया का सबसे बड़ा चिकन निर्यातक, भारत में अपने पोल्ट्री उत्पादों के लिए बाजार खोलने की जोरदार कोशिश कर रहा है। भारतीय टैरिफ 100% (कट्स पर) और 30% (पूरे चिकन पर) होने से आयात लगभग असंभव है, जिसके कारण ब्राजील ने शून्य या कम टैरिफ वाली विशेष कोटा की मांग की है। बदले में ब्राजील भारतीय अनार और मैकाडेमिया नट्स के लिए अपना बाजार खोलने को तैयार है। भारतीय पोल्ट्री उद्योग इस कदम का विरोध कर सकता है क्योंकि सस्ता ब्राजीलियन चिकन स्थानीय किसानों और करोड़ों रोजगार को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल भारत में ब्राजील से चिकन आयात नगण्य है, लेकिन द्विपक्षीय व्यापार वार्ता तेज होने से भविष्य में बदलाव संभव।
ब्राजील का एक उच्चस्तरीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल हाल ही में भारत पहुंचा है, जहां उसने चिकन और चिकन उत्पादों के आयात पर लगे ऊंचे टैरिफ को कम करने की मांग रखी है। ब्राजीलियन एसोसिएशन ऑफ एनीमल प्रोटीन (ABPA) ने स्पष्ट किया कि भारत में चिकन कट्स पर 100% और पूरे चिकन पर 30% आयात शुल्क लगा हुआ है, जिससे ब्राजील का दुनिया का सबसे बड़ा पोल्ट्री निर्यातक होने के बावजूद भारत में उसका निर्यात लगभग शून्य है।
ABPA ने प्रस्ताव दिया है कि ब्राजीलियन चिकन के लिए एक विशेष कोटा बनाया जाए, जिसमें शून्य या बहुत कम टैरिफ लागू हो। यह प्रस्ताव द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए रखा गया है। ब्राजील ने बदले में भारतीय फलों और मेवों के लिए अपना बाजार खोलने की पेशकश की है, खासकर अनार (पोमेग्रेनेट) और मैकाडेमिया नट्स के लिए। ब्राजील के कृषि मंत्री ने इस दौरान कहा कि दोनों देशों के बीच कृषि व्यापार में ठोस प्रगति हो रही है और कुल द्विपक्षीय व्यापार को 15 अरब डॉलर से बढ़ाकर 20 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य है।
भारत में पोल्ट्री सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है। देश दुनिया के सबसे बड़े अंडा और चिकन उत्पादकों में शामिल है, जहां छोटे-मध्यम किसान और संगठित फार्म करोड़ों लोगों को रोजगार देते हैं। ब्राजील से सस्ता चिकन आने पर स्थानीय उत्पादकों पर दबाव बढ़ सकता है, क्योंकि ब्राजील की उत्पादन लागत कम है और वह बड़े पैमाने पर निर्यात करता है। जनवरी 2026 में ब्राजील ने रिकॉर्ड 4.59 लाख टन चिकन निर्यात किया, जिसमें राजस्व 874.2 मिलियन डॉलर रहा, जो पिछले साल की तुलना में 3.6% अधिक है। लेकिन भारत में उसका निर्यात महज 2.47 टन रहा, जो कुल निर्यात का नगण्य हिस्सा है।
भारतीय बाजार में ब्राजीलियन चिकन के प्रवेश की संभावना पर पोल्ट्री उद्योग सतर्क है। उच्च टैरिफ स्थानीय किसानों की सुरक्षा करता है, क्योंकि सस्ते आयात से कीमतें गिर सकती हैं और छोटे फार्म बंद हो सकते हैं। हालांकि, कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि सीमित कोटा और सख्त गुणवत्ता मानकों के साथ आयात होता है, तो उपभोक्ताओं को विविध विकल्प और संभवतः कम कीमतें मिल सकती हैं। लेकिन फिलहाल सरकार किसानों के हितों को प्राथमिकता देती दिख रही है।
ब्राजील दुनिया का प्रमुख हलाल प्रमाणित चिकन निर्यातक है, और एशिया के कई बाजारों में उसकी मजबूत पकड़ है। भारत में बढ़ती आय और शहरीकरण से प्रोटीन की मांग बढ़ रही है, लेकिन स्थानीय उत्पादन पर्याप्त है। यदि टैरिफ कम हुए तो ब्राजीलियन चिकन मुख्य रूप से प्रोसेस्ड या फ्रोजन सेगमेंट में प्रवेश कर सकता है, जहां मांग बढ़ रही है।
दोनों देशों के बीच यह वार्ता व्यापक व्यापार समझौते का हिस्सा है। ब्राजील अन्य एशियाई बाजारों में भी विस्तार कर रहा है, लेकिन भारत जैसे बड़े बाजार में प्रवेश उसके लिए रणनीतिक महत्व रखता है। भारतीय पक्ष से अभी कोई आधिकारिक फैसला नहीं आया है, लेकिन किसान संगठन पहले से ही उच्च टैरिफ बनाए रखने की मांग कर रहे हैं।
टैरिफ तुलना
चिकन कट्स (Cuts): भारत में 100% टैरिफ
पूरे चिकन (Whole Chicken): भारत में 30% टैरिफ
प्रस्तावित: विशेष कोटा में 0% या न्यूनतम टैरिफ
यह प्रस्ताव यदि मंजूर हुआ तो भारतीय बाजार में ब्राजीलियन चिकन की एंट्री संभव हो सकती है, लेकिन किसानों की सुरक्षा के लिए सख्त शर्तें लगाई जा सकती हैं।



