Budget 2026: ट्रेन की 3000 वाली 1st AC की टिकट मिलेगी ₹1500 में? बजट में सरकार इन्हें फिर से दे सकती है तोहफा

“बजट 2026 में रेलवे पैसेंजर सब्सिडी बढ़ाने की उम्मीद, जहां 1st AC टिकटों पर 45-55% तक की राहत मिल सकती है; सीनियर सिटीजन कंसेशन की बहाली संभव, फ्लेक्सी फेयर सिस्टम में बदलाव; कैपेक्स 2.65 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है, वंदे भारत और अमृत भारत ट्रेनों पर फोकस; फ्रेट से पैसेंजर सर्विस को क्रॉस-सब्सिडी जारी रहेगी।”

बजट 2026 में रेलवे सेक्टर की मुख्य अपेक्षाएं

केंद्रीय बजट 2026-27 में रेलवे को आवंटन FY26 के 2.52 लाख करोड़ से बढ़कर 2.65 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है, जिसमें सिग्नलिंग सिस्टम और ट्रैक अपग्रेड पर जोर दिया जाएगा। सेमी-हाई स्पीड रेल कॉरिडोर का विस्तार होगा, जहां 5% की वृद्धि से रोलिंग स्टॉक और सेफ्टी इंफ्रास्ट्रक्चर को बूस्ट मिलेगा। दिसंबर 2025 तक FY26 कैपेक्स का 80% से अधिक उपयोग हो चुका है, जो एक्जीक्यूशन की मजबूती दिखाता है।

प्राइवेट सेक्टर भागीदारी बढ़ाने के लिए PPP मॉडल में रिस्क-शेयरिंग फ्रेमवर्क को क्लियर किया जाएगा, जहां डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और इंटरमोडल टर्मिनल्स पर फोकस रहेगा। नैशनल रेल प्लान के तहत 2051 तक डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के लिए 2.3 ट्रिलियन रुपये की जरूरत है, जबकि हाई-स्पीड रेल के लिए 15 ट्रिलियन रुपये का निवेश प्लान किया गया है।

पैसेंजर फेयर में राहत की संभावना

रेलवे पैसेंजर सर्विस में लॉस को कवर करने के लिए फ्रेट अर्निंग से क्रॉस-सब्सिडी दी जाती है, जहां पैसेंजर फेयर से केवल 55% कॉस्ट रिकवर होती है। बजट में इस सब्सिडी को बढ़ाकर 60% तक किया जा सकता है, जिससे 1st AC जैसी प्रीमियम क्लास में टिकट प्राइस 3000 रुपये से घटकर 1500-2000 रुपये के रेंज में आ सकती है। फ्लेक्सी फेयर सिस्टम, जहां 10% सीट्स बिकने के बाद प्राइस बढ़ती है, में कैप लगाने या इसे लोअर क्लास से हटाने की मांग है।

FY26 में दो बार फेयर हाइक हुआ, जहां ऑर्डिनरी क्लास में 1 पैसा प्रति किमी की बढ़ोतरी की गई, लेकिन बजट में इसे बैलेंस करने के लिए सब्सिडी पैकेज आ सकता है। पैसेंजर रेवेन्यू पोस्ट-पैंडेमिक रिकवर होकर 1.68 लाख करोड़ तक पहुंचा है, लेकिन अभी भी फ्रेट से 60,000 करोड़ की सालाना सब्सिडी दी जाती है।

सीनियर सिटीजन और अन्य कंसेशन की बहाली

सीनियर सिटीजन कंसेशन, जो कोविड के बाद बंद हो गया था, की बहाली की मजबूत उम्मीद है। पहले पुरुषों (60+) को 40% और महिलाओं (58+) को 50% डिस्काउंट मिलता था, लेकिन अब केवल लोअर बर्थ कोटा बचा है। बजट में कम से कम स्लीपर और 3AC क्लास के लिए 50% डिस्काउंट बहाल किया जा सकता है, खासकर 70+ उम्र वालों के लिए। संसदीय स्टैंडिंग कमिटी ने स्लीपर क्लास में आंशिक बहाली की सिफारिश की है।

अन्य कंसेशन में दिव्यांगों और स्टूडेंट्स के लिए अतिरिक्त राहत दी जा सकती है, जहां जनरल सब्सिडी 45-55% बनी रहेगी। रेलवे का तर्क है कि पैसेंजर फेयर पहले से ही 45% सब्सिडाइज्ड है, लेकिन बढ़ते ऑपरेशनल कॉस्ट को देखते हुए बजट में 10-15% अतिरिक्त सब्सिडी अलोकेशन हो सकता है।

नई ट्रेनें और सेफ्टी अपग्रेड

बजट में वंदे भारत और अमृत भारत ट्रेनों के लिए फंड बढ़ाया जाएगा, जहां 100+ अमृत भारत नॉन-AC ट्रेनें नई रूट्स पर चलेंगी। ये ट्रेनें बजट ट्रैवलर्स के लिए कम्फर्ट बढ़ाएंगी, साथ ही स्पीड और पंक्चुएलिटी सुधारेंगी। कवच सिस्टम के लिए अलोकेशन 25% बढ़ सकता है, जो ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन प्रदान करता है।

सिग्नलिंग और LHB कोच प्रोडक्शन पर हाईअर ग्रांट्स आएंगी, जहां AI-एनेबल्ड कैमरा और इंटरलॉकिंग सिग्नलिंग से सेफ्टी बढ़ेगी। नैशनल रेल प्लान के तहत ट्रैक कैपेसिटी एन्हांसमेंट पर 1.2 लाख करोड़ खर्च होगा, जिसमें न्यू लाइंस, गेज कन्वर्जन और इलेक्ट्रिफिकेशन शामिल है।

फ्रेट और पैसेंजर बैलेंस

फ्रेट अर्निंग 2019-20 के 1.13 लाख करोड़ से बढ़कर 2023-24 में 1.68 लाख करोड़ हो गई है, जो पैसेंजर लॉस को कवर करती है। बजट में फ्रेट टैरिफ को इंडस्ट्री-अलाइंड बनाया जाएगा, जहां डायनामिक प्राइसिंग और रिटर्न लोड डिस्काउंट से एफिशिएंसी बढ़ेगी। मल्टी-ऑपरेटर रिजीम और टाइम-टेबल्ड सर्विसेज से फ्रेट शेयर 30% से 45% तक पहुंच सकता है।

पैसेंजर एक्सपीरियंस में मल्टी-मोडल इंटीग्रेशन पर फोकस होगा, जहां ट्रांसपोर्ट और टिकटिंग सिस्टम सीमलेस होंगे। प्राइवेट इन्वेस्टमेंट से फ्रेट कॉरिडोर और पैसेंजर टर्मिनल्स पर 20-25,000 करोड़ जेनरेट हो सकते हैं।

रेलवे बजट के प्रमुख आंकड़े

प्राइवेट इन्वेस्टमेंट और रिफॉर्म्स

सेक्टरFY26 अलोकेशन (लाख करोड़)FY27 अपेक्षित अलोकेशन (लाख करोड़)मुख्य फोकस
कैपेक्स2.522.65ट्रैक अपग्रेड, सिग्नलिंग
रोलिंग स्टॉक0.510.60वंदे भारत, अमृत भारत
सेफ्टी (कवच)0.100.125ATP सिस्टम
फ्रेट कॉरिडोर0.200.25डेडिकेटेड लाइंस
पैसेंजर सब्सिडी0.600.70फेयर रिडक्शन

बजट में इन्वेस्टर-फ्रेंडली PPP मॉडल्स आएंगे, जहां रोलिंग स्टॉक और सिग्नलिंग मैन्युफैक्चरिंग पर इंसेंटिव्स मिलेंगे। इंडस्ट्री-अलाइंड टैरिफ से नॉन-बल्क और कंटेनराइज्ड फ्रेट बढ़ेगा। कैपिटल रिसाइक्लिंग और इनविट्स से प्राइवेट कैपिटल क्राउड-इन होगा, जिससे फिस्कल प्रेशर कम होगा।

एवरेज ट्रेन स्पीड में सुधार के लिए फ्रेट 20-25 किमी/घंटा और पैसेंजर 50-52 किमी/घंटा से ऊपर लाने पर जोर। ह्यूमन कैपिटल डेवलपमेंट से एफिशिएंसी बढ़ेगी, जहां ट्रेनिंग और इनोवेशन पर फंड अलोकेट होंगे।

मल्टी-मोडल इंटीग्रेशन की भूमिका

PM गति शक्ति विजन के तहत रोड, रेल और एयर नेटवर्क्स का इंटीग्रेशन होगा, जहां लास्ट-माइल कनेक्टिविटी से लॉजिस्टिक्स कॉस्ट कम होगी। ग्रीनर मोड्स के लिए डिफरेंशियल टैक्सेशन से मोडल शिफ्ट तेज होगा। ट्रांसमिशन लाइन डेवलपमेंट पर सब्सिडी से रिन्यूएबल कैपेसिटी बढ़ेगी।

Disclaimer: यह लेख समाचार रिपोर्टों, टिप्स और सूत्रों पर आधारित है।

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