Budget 2026 से पहले एक और खुशखबरी, EU के बाद इस देश के साथ FTA करेगा भारत; ट्रंप को फिर लगेगी मिर्ची

“भारत ने EU के साथ हालिया FTA के बाद कनाडा के साथ नया व्यापार समझौता करने की दिशा में तेजी दिखाई है, जो द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर सकता है। यह डील कनाडा की ऊर्जा और खनिज संसाधनों तक पहुंच बढ़ाएगी, जबकि भारत के निर्यात में वृद्धि होगी। ट्रंप प्रशासन को इससे झटका लग सकता है, क्योंकि कनाडा पर पहले से ही अमेरिकी टैरिफ का दबाव है।”

भारत ने यूरोपीय संघ (EU) के साथ हाल ही में संपन्न हुए ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के बाद अब कनाडा के साथ एक नया व्यापार समझौता करने की तैयारी कर ली है। यह डील दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देगी, जहां भारत को कनाडा के यूरेनियम, ऊर्जा और खनिज संसाधनों तक बेहतर पहुंच मिलेगी, जबकि कनाडा भारत के आईटी सर्विसेज, फार्मास्यूटिकल्स और टेक्सटाइल्स से लाभ उठा सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता ट्रंप प्रशासन को असहज कर सकता है, क्योंकि अमेरिका पहले से ही कनाडा पर टैरिफ दबाव बना रहा है और किसी भी नए अंतरराष्ट्रीय डील को अपनी नीतियों के खिलाफ देखता है।

यह FTA भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति का हिस्सा है, जहां EU डील के बाद कनाडा के साथ समझौता अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा। दोनों देशों के बीच वर्तमान व्यापार मात्रा लगभग 12 बिलियन USD है, जो इस समझौते से 25 बिलियन USD तक पहुंच सकती है। भारत कनाडा से आयातित यूरेनियम पर टैरिफ में 50% तक कटौती की उम्मीद कर रहा है, जो न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर को बूस्ट देगा। वहीं, कनाडा भारत के सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट्स पर लगने वाले शुल्कों में कमी लाएगा।

प्रमुख लाभ और प्रभाव

भारत के लिए लाभ : कनाडा के खनिज संसाधनों जैसे पोटाश और निकेल तक सस्ती पहुंच, जो भारतीय कृषि और EV बैटरी इंडस्ट्री को सपोर्ट करेगा। आईटी प्रोफेशनल्स के लिए वीजा नियमों में ढील, जिससे सालाना 10,000 से अधिक स्किल्ड वर्कर्स कनाडा जा सकेंगे।

कनाडा के लिए लाभ : भारतीय बाजार में ऑयलसीड्स और लकड़ी उत्पादों के निर्यात में वृद्धि, जहां टैरिफ 30% से घटकर 5% हो सकता है। दोनों देशों के बीच निवेश बढ़ेगा, विशेष रूप से रिन्यूएबल एनर्जी में।

ट्रंप पर प्रभाव : अमेरिका ने कनाडा पर पहले ही 25% टैरिफ लगाए हैं, और भारत-कनाडा डील से कनाडा की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, जो ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति को चुनौती देगी। ट्रंप ने हाल ही में कनाडा को ‘सुरक्षा खतरा’ बताया था, और किसी भी नए FTA को अमेरिकी हितों के खिलाफ देखा जा सकता है।

यह समझौता दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही बातचीत का नतीजा है, जो 2022 में रुकी थी लेकिन 2025 में फिर शुरू हुई। अब, बजट 2026 से पहले इसकी घोषणा से भारतीय अर्थव्यवस्था में आत्मविश्वास बढ़ेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह डील भारत को उत्तरी अमेरिकी बाजार में मजबूत स्थिति देगी, जहां कनाडा के माध्यम से अमेरिकी सप्लाई चेन तक पहुंच आसान हो जाएगी।

आर्थिक आंकड़ों पर नजर

क्षेत्रवर्तमान व्यापार (USD बिलियन)अनुमानित वृद्धि पोस्ट-FTAप्रमुख उत्पाद
ऊर्जा और खनिज4.510यूरेनियम, पोटाश
आईटी और सर्विसेज3.28सॉफ्टवेयर, डिजिटल सर्विसेज
कृषि और फूड2.15ऑयलसीड्स, डेयरी
मैन्युफैक्चरिंग2.22ऑटो पार्ट्स, टेक्सटाइल्स

इस टेबल से साफ है कि FTA से ऊर्जा सेक्टर में सबसे अधिक वृद्धि होगी, जो भारत की एनर्जी सिक्योरिटी को मजबूत करेगा। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की आगामी भारत यात्रा में इस समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना है, जो खनिज और एनर्जी डील्स पर फोकस करेगी।

चुनौतियां और रणनीतिक महत्व

हालांकि, यह डील बिना चुनौतियों के नहीं है। कनाडा में भारतीय छात्रों और प्रोफेशनल्स पर बढ़ते हमलों से वीजा नियम प्रभावित हो सकते हैं। साथ ही, ट्रंप प्रशासन की प्रतिक्रिया से वैश्विक व्यापार में तनाव बढ़ सकता है। फिर भी, यह समझौता भारत की मल्टी-अलाइनमेंट पॉलिसी को मजबूत करता है, जहां EU के बाद कनाडा जैसे देशों से रिश्ते गहराए जा रहे हैं।

भारत के निर्यातकों के लिए यह नई संभावनाएं खोलेगा, विशेष रूप से फार्मा और टेक सेक्टर में। कनाडा की तरफ से, यह डील चीन पर निर्भरता कम करने में मदद करेगी, जो ट्रंप को और चिढ़ा सकता है। कुल मिलाकर, यह FTA भारत की अर्थव्यवस्था को वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति देगा, जहां बजट 2026 में ऐसी डील्स से प्रेरित नीतियां शामिल हो सकती हैं।

Disclaimer: This news report is based on tips from sources.

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