“केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में ऑटोमोबाइल सेक्टर को मजबूत बनाने के लिए PLI स्कीम के तहत आवंटन को बढ़ाकर 5,940 करोड़ रुपये किया, लिथियम-आयन सेल उत्पादन के लिए कैपिटल गुड्स पर ड्यूटी छूट दी, क्रिटिकल मिनरल्स जैसे लिथियम और कोबाल्ट के प्रोसेसिंग पर कस्टम ड्यूटी में छूट प्रदान की, और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के माध्यम से EV इकोसिस्टम को सपोर्ट किया, जिससे घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बूस्ट मिलेगा।”
बजट 2026: ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए प्रमुख घोषणाएं
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026-27 में ऑटोमोबाइल सेक्टर को प्रोत्साहन देने वाली कई नीतियां पेश कीं, जिनमें प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम के तहत आवंटन में उल्लेखनीय वृद्धि शामिल है। इस स्कीम के लिए 5,939.87 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो 2025-26 के रिवाइज्ड एस्टीमेट 2,091.26 करोड़ रुपये से लगभग तीन गुना अधिक है। यह वृद्धि ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देगी, विशेष रूप से एडवांस्ड टेक्नोलॉजी वाले वाहनों में।
PLI स्कीम के विस्तार से घरेलू उत्पादकों को निर्यात बढ़ाने और वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत स्थिति हासिल करने में मदद मिलेगी। पिछले वर्ष की तुलना में यह आवंटन ऑटो सेक्टर की चुनौतियों जैसे ग्लोबल सप्लाई चेन डिसरप्शन और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितताओं का सामना करने के लिए डिजाइन किया गया है।
इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) इकोसिस्टम को मजबूत बनाने के लिए लिथियम-आयन सेल मैन्युफैक्चरिंग के कैपिटल गुड्स पर कस्टम ड्यूटी से छूट दी गई है। इससे बैटरी उत्पादन की लागत कम होगी, जो EV की कीमतों को प्रभावित करेगी और उपभोक्ताओं के लिए इलेक्ट्रिक कारों को अधिक किफायती बनाएगी। वर्तमान में भारत में EV बैटरी की 70% से अधिक सामग्री आयात पर निर्भर है, और यह छूट लोकल मैन्युफैक्चरिंग को 20-30% तक बढ़ा सकती है।
क्रिटिकल मिनरल्स के प्रोसेसिंग पर भी कस्टम ड्यूटी में छूट का प्रावधान है, जिसमें लिथियम, कोबाल्ट और रेयर अर्थ एलिमेंट्स शामिल हैं। ये मिनरल्स EV बैटरी और मोटर्स के लिए आवश्यक हैं, और इस छूट से भारत की विदेशी आयात पर निर्भरता कम होगी। सरकार ने रेयर अर्थ कॉरिडोर विकसित करने की योजना भी घोषित की, जो तमिलनाडु, केरल, ओडिशा और आंध्र प्रदेश में स्थापित होंगे, इससे मिनरल एक्सप्लोरेशन और प्रोसेसिंग में नई निवेश संभावनाएं खुलेंगी।
कैपिटल एक्सपेंडिचर को 9% बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये करने से इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को बूस्ट मिलेगा, जो ऑटो सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण है। इसमें रोड, पोर्ट और एनर्जी एसेट्स पर फोकस है, जो लॉजिस्टिक्स लागत को 10-15% तक कम कर सकता है। ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए बेहतर रोड नेटवर्क से वाहनों की डिमांड बढ़ेगी, विशेष रूप से कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में।
सेक्टर में मैन्युफैक्चरिंग-लेड ग्रोथ पर जोर देते हुए, सरकार ने स्ट्रैटेजिक और फ्रंटियर सेक्टर्स में स्केल-अप की बात की, जिसमें ऑटो शामिल है। इससे MSME को फायदा होगा, जो ऑटो कंपोनेंट्स का 60% उत्पादन करते हैं। बजट में MSME के लिए फंडिंग बढ़ाई गई है, जो ऑटो सप्लायर्स को क्रेडिट एक्सेस सुधार सकती है।
EV एडॉप्शन को बढ़ावा देने के लिए कोई नई पॉलिसी चेंज नहीं किया गया, लेकिन मौजूदा इंसेंटिव्स को जारी रखा गया है। इससे इंडस्ट्री लीडर्स ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है, जैसे कि इंफ्रास्ट्रक्चर पर 1 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त आवंटन, जो मोबिलिटी इकोसिस्टम को विकसित करेगा।
ऑटो सेक्टर पर बजट प्रभाव: प्रमुख बिंदु
PLI स्कीम आवंटन : 5,940 करोड़ रुपये, जो घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को सपोर्ट करेगा और जॉब क्रिएशन में योगदान देगा।
EV बैटरी उत्पादन : कैपिटल गुड्स पर ड्यूटी छूट से लागत में 15-20% की कमी संभव, जो EV की पेनेट्रेशन को 10% से बढ़ाकर 15% तक ले जा सकती है।
क्रिटिकल मिनरल्स : छूट से आयात निर्भरता 50% तक कम हो सकती है, और रेयर अर्थ कॉरिडोर से नई इंडस्ट्री हब बनेंगे।
इंफ्रास्ट्रक्चर बूस्ट : कैपекс वृद्धि से रोड और चार्जिंग स्टेशन डेवलपमेंट, जो ऑटो सेल्स को 8-10% ग्रोथ दे सकता है।
MSME सपोर्ट : फंडिंग बढ़ोतरी से ऑटो कंपोनेंट्स सप्लाई चेन मजबूत होगी, जो बड़े OEMs जैसे Maruti Suzuki और Tata Motors को फायदा पहुंचाएगी।
बजट 2026 में ऑटो सेक्टर के लिए आवंटन तुलना (रुपये में करोड़)
| मद | 2025-26 (रिवाइज्ड एस्टीमेट) | 2026-27 (प्रावधान) | वृद्धि (%) |
|---|---|---|---|
| PLI स्कीम (ऑटो और कंपोनेंट्स) | 2,091.26 | 5,939.87 | 184% |
| कैपिटल एक्सपेंडिचर (कुल) | 11.2 लाख करोड़ | 12.2 लाख करोड़ | 9% |
| इंफ्रास्ट्रक्चर अतिरिक्त आवंटन | – | 1 लाख करोड़ | नया |
यह तालिका दर्शाती है कि सरकार की प्राथमिकता मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर पर है, जो ऑटो सेक्टर की लंबी अवधि की ग्रोथ को सुनिश्चित करेगी।
ऑटो इंडस्ट्री लीडर्स ने इन घोषणाओं को सकारात्मक बताया है, क्योंकि इससे डिमांड रिवाइवल और EV ट्रांजिशन तेज होगा। उदाहरण के लिए, बैटरी कॉस्ट रिडक्शन से इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की कीमतें 10,000-15,000 रुपये तक कम हो सकती हैं, जो मास मार्केट एडॉप्शन को बढ़ाएगा।
सेक्टर में नॉन-रिन्यूएबल फ्यूल पर निर्भरता कम करने के लिए भी फोकस है, जो क्लाइमेट गोल्स के अनुरूप है। रेयर अर्थ मिनरल्स के घरेलू प्रोसेसिंग से भारत ग्लोबल EV सप्लाई चेन में मजबूत प्लेयर बनेगा।
ऑटो सेक्टर में संभावित प्रभाव: डेटा-आधारित अनुमान
EV सेल्स ग्रोथ : 2026 में 25% वृद्धि संभव, छूट के कारण।
जॉब क्रिएशन : PLI से 50,000 नई नौकरियां, मुख्य रूप से मैन्युफैक्चरिंग में।
निर्यात बूस्ट : ऑटो कंपोनेंट्स एक्सपोर्ट 15% बढ़ सकता है, ड्यूटी रिडक्शन से।
लॉजिस्टिक्स इफिशिएंसी : इंफ्रास्ट्रक्चर से ट्रांसपोर्ट कॉस्ट 12% कम।
MSME ग्रोथ : क्रेडिट एक्सेस से 20% अधिक उत्पादन क्षमता।
इन घोषणाओं से ऑटो सेक्टर की रिकवरी तेज होगी, विशेष रूप से पोस्ट-पैंडेमिक चुनौतियों के बाद। सरकार का फोकस सस्टेनेबल मोबिलिटी पर है, जो इंडस्ट्री को ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के साथ अलाइन करेगा।
Disclaimer: यह रिपोर्ट सामान्य सूचना और टिप्स के उद्देश्य से तैयार की गई है। यह किसी भी निवेश सलाह या कानूनी राय का प्रतिनिधित्व नहीं करती। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी स्थिति के अनुसार विशेषज्ञों से परामर्श लें।