“केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से देशभर में न्यूनतम 95 RON वाले E20 पेट्रोल की बिक्री अनिवार्य कर दी है। यह 20% एथनॉल मिश्रित पेट्रोल आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता घटाएगा, प्रदूषण कम करेगा और किसानों की आय बढ़ाएगा, लेकिन पुराने वाहनों में माइलेज 2-5% तक घट सकता है और कुछ मामलों में इंजन कंपोनेंट्स पर असर पड़ सकता है।”
E20 पेट्रोल क्या है और यह अनिवार्य क्यों हुआ?
केंद्र सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय ने हाल ही में अधिसूचना जारी कर 1 अप्रैल 2026 से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में तेल विपणन कंपनियों को 20% तक एथनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) बेचना अनिवार्य किया है। इस पेट्रोल में न्यूनतम रिसर्च ऑक्टेन नंबर (RON) 95 होना जरूरी होगा, जो Bureau of Indian Standards (BIS) की स्पेसिफिकेशन्स के अनुरूप होगा।
E20 का मतलब है पेट्रोल में 20% एथनॉल (जो मुख्य रूप से गन्ना, चावल, मक्का आदि से बनता है) मिलाया जाना। यह पहले E10 (10% एथनॉल) से आगे का कदम है। सरकार का लक्ष्य 2025-26 तक E20 को पूर्ण रूप से लागू करना था, लेकिन अब इसे पूरे देश में अनिवार्य कर दिया गया है।
इस बदलाव की मुख्य वजहें
कच्चे तेल आयात में कमी : भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है। E20 से हर साल लाखों टन कच्चा तेल बचता है, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होती है। पिछले कुछ वर्षों में एथनॉल ब्लेंडिंग से 1.44 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बचत हो चुकी है।
प्रदूषण नियंत्रण : एथनॉल ऑक्सीजनयुक्त ईंधन है, जो कार्बन मोनोऑक्साइड और अन्य उत्सर्जन को कम करता है। इससे शहरों में वायु गुणवत्ता सुधरती है।
किसानों को लाभ : एथनॉल उत्पादन से गन्ना, अनाज किसानों को नई आय मिलती है। अनुमान है कि E20 से इस साल किसानों को 40,000 करोड़ रुपये तक का भुगतान होगा।
ऊर्जा सुरक्षा : घरेलू बायोफ्यूल पर निर्भरता बढ़ने से वैश्विक तेल मूल्य उतार-चढ़ाव का असर कम होगा।
पुराने वाहनों पर क्या असर पड़ेगा?
2023 के बाद बने वाहन : अप्रैल 2023 से भारत में बिकने वाले अधिकांश पेट्रोल वाहन E20 कम्प्लायंट हैं। इनमें फ्यूल सिस्टम, होसेस, सील्स और इंजन कैलिब्रेशन E20 के लिए तैयार हैं। इन वाहनों पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ता, हालांकि माइलेज में मामूली कमी (2-3%) आ सकती है क्योंकि एथनॉल की एनर्जी वैल्यू पेट्रोल से कम होती है।
2012-2023 के बीच बने वाहन : ये ज्यादातर E10 कम्प्लायंट हैं। E20 इस्तेमाल करने पर माइलेज 3-5% तक घट सकता है। कुछ मामलों में फ्यूल पंप, इंजेक्टर या रबर पार्ट्स में तेज घिसाव हो सकता है, लेकिन सामान्य सर्विसिंग से इसे मैनेज किया जा सकता है। सरकार और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के अध्ययन के अनुसार कोई बड़ा नुकसान नहीं होता।
2023 से पहले के पुराने वाहन : इनमें E20 से ज्यादा असर पड़ सकता है। माइलेज में 4-6% तक कमी, स्टार्टिंग में दिक्कत या इंजन नॉकिंग जैसी समस्याएं आ सकती हैं। ऐसे वाहनों के मालिकों को नियमित सर्विस, फ्यूल एडिटिव्स का इस्तेमाल और इंजन ट्यूनिंग करानी चाहिए। सरकार ने रेट्रोफिटिंग या फेज आउट की कोई योजना नहीं बनाई है।
माइलेज और परफॉर्मेंस पर वास्तविक प्रभाव
E20 में एथनॉल की एनर्जी डेंसिटी पेट्रोल से लगभग 30% कम होती है। 20% ब्लेंड से औसतन 3-5% माइलेज कम होता है। उदाहरण:
20 kmpl माइलेज वाली बाइक पर अब 19-19.4 kmpl मिल सकता है।
कारों में 15 kmpl से घटकर 14.3-14.7 kmpl हो सकता है।
नया 95 RON E20 बेहतर कंबशन देता है, जिससे कुछ वाहनों में पावर डिलीवरी सुधर सकती है, लेकिन कुल मिलाकर फ्यूल एफिशिएंसी पर असर नकारात्मक रहता है।
उपभोक्ताओं के लिए सलाह
अपनी गाड़ी की E20 कम्प्लायबिलिटी चेक करें (डैशबोर्ड या मैनुअल में स्टिकर देखें)।
नियमित इंजन ऑयल चेंज, फ्यूल फिल्टर क्लीनिंग और सर्विस करवाएं।
यदि पुरानी गाड़ी है तो E20 के साथ अच्छी क्वालिटी फ्यूल एडिटिव यूज करें।
माइलेज ट्रैक करें और जरूरत पड़ने पर मैकेनिक से ट्यूनिंग करवाएं।
यह बदलाव भारत को हरित ऊर्जा की दिशा में मजबूत कदम है, लेकिन वाहन मालिकों को तैयारी जरूरी है।



