“राजस्थान के जैसलमेर में एक पुलिस कॉन्स्टेबल ने अपनी सफेद टाटा नेक्सॉन EV को सार्वजनिक ट्रांसफॉर्मर के डिस्ट्रीब्यूशन पॉइंट से सीधे चार्ज किया, जो न केवल जानलेवा खतरा पैदा करता है बल्कि बिजली चोरी का मामला भी बनता है। वीडियो के वायरल होने से सोशल मीडिया पर सुरक्षा मानकों और कानूनी उल्लंघनों की चर्चा तेज हो गई है, जिसने EV यूजर्स के लिए जागरूकता बढ़ाई है।”
राजस्थान के जैसलमेर शहर में एक पुलिस कॉन्स्टेबल ने अपनी इलेक्ट्रिक वाहन को सार्वजनिक ट्रांसफॉर्मर से चार्ज करने का प्रयास किया, जो एक व्यस्त सड़क पर कैद हो गया। वीडियो में दिखाई देता है कि कॉन्स्टेबल यूनिफॉर्म में है और सफेद रंग की टाटा नेक्सॉन EV को डिस्ट्रीब्यूशन पॉइंट (DP) से कनेक्ट कर रहा है, जहां से बिजली की सप्लाई होती है। यह स्थान शहर की मुख्य सड़क पर है, जहां से गाड़ियां, मोटरसाइकिल और पैदल यात्री गुजर रहे हैं, और पृष्ठभूमि में जैसलमेर का प्रसिद्ध किला नजर आता है। कार में कोई नंबर प्लेट नहीं दिख रही है, जो खुद में एक अलग उल्लंघन है।
इस घटना ने EV चार्जिंग की चुनौतियों को उजागर किया है, खासकर ग्रामीण और छोटे शहरों में जहां चार्जिंग स्टेशन की कमी है। टाटा नेक्सॉन EV, जो 30 kWh और 45 kWh बैटरी पैक ऑप्शन के साथ आती है, सामान्यतः घरेलू चार्जर या पब्लिक स्टेशन से चार्ज की जाती है, लेकिन यहां इस्तेमाल की गई मेकशिफ्ट वायरिंग ने शॉर्ट सर्किट का जोखिम बढ़ा दिया। विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रांसफॉर्मर से सीधे चार्जिंग हाई वोल्टेज के कारण वाहन की बैटरी को नुकसान पहुंचा सकती है और आग लगने की संभावना बढ़ाती है।
सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से फैला, जहां यूजर्स ने इसे “मेगा स्टूपिड” और “खतरनाक” करार दिया। कई पोस्ट में यूजर्स ने पुलिस अधिकारी की जिम्मेदारी पर सवाल उठाए, क्योंकि कानून प्रवर्तक खुद नियम तोड़ रहे हैं। यह घटना EV अपनाने की बढ़ती ट्रेंड के बीच आई है, जहां भारत में EV सेल्स 2025 में 40% बढ़ोतरी दर्ज की गई है, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी से ऐसे अनुचित तरीके अपनाए जा रहे हैं।
EV चार्जिंग के खतरे: एक नजर में
| खतरा | विवरण | संभावित परिणाम |
|---|---|---|
| इलेक्ट्रिक शॉक | ट्रांसफॉर्मर से सीधे कनेक्शन हाई वोल्टेज (440V) पैदा करता है, जो मानक EV चार्जर (220V) से ज्यादा है। | जानलेवा झटका, आसपास के लोगों को खतरा। |
| आग का जोखिम | अनियमित वायरिंग से स्पार्किंग हो सकती है। | वाहन या ट्रांसफॉर्मर में आग, संपत्ति नुकसान। |
| बैटरी डैमेज | ओवरवोल्टेज से बैटरी सेल्स फेल हो सकती हैं। | EV की लाइफ कम होना, महंगा रिपेयर। |
| ग्रिड ओवरलोड | अनधिकृत कनेक्शन से लोकल पावर ग्रिड पर बोझ बढ़ता है। | ब्लैकआउट या वोल्टेज फ्लक्चुएशन। |
इस तरह की घटनाएं बिजली चोरी के अंतर्गत आती हैं, जो भारतीय दंड संहिता की धारा 379 के तहत दंडनीय है, जिसमें जुर्माना या जेल की सजा हो सकती है। पुलिस विभाग ने ऐसे मामलों में जांच की बात कही है, लेकिन EV मालिकों को सलाह दी जाती है कि वे केवल प्रमाणित चार्जिंग पॉइंट्स का इस्तेमाल करें। जैसलमेर जैसे इलाकों में, जहां सोलर पावर की संभावना ज्यादा है, सरकार EV इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने पर फोकस कर रही है, लेकिन फिलहाल केवल 5-10 पब्लिक चार्जर उपलब्ध हैं।
कानूनी पहलू और सजा के प्रावधान
बिजली चोरी अधिनियम : भारत में इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 के तहत अनधिकृत कनेक्शन पर 3 साल तक की कैद या 10,000 रुपये जुर्माना।
सुरक्षा उल्लंघन : BIS स्टैंडर्ड्स के मुताबिक, EV चार्जिंग केवल IP67 रेटेड केबल से होनी चाहिए, नहीं तो इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट हो सकता है।
पुलिस की भूमिका : अधिकारी होने के कारण डबल जिम्मेदारी, विभागीय जांच से सस्पेंशन का खतरा।
EV यूजर्स के लिए टिप्स : हमेशा ऐप्स जैसे PlugShare या Google Maps से निकटतम चार्जर खोजें, घरेलू चार्जिंग के लिए 15A सॉकेट इस्तेमाल करें।
वीडियो में दिखाए गए दृश्यों से पता चलता है कि कार को दीवार के पास पार्क किया गया है, और वायर को पोल से जोड़ा गया है, जबकि आसपास गाय-बकरी और लोग गुजर रहे हैं। यह न केवल व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालता है बल्कि सार्वजनिक संपत्ति का दुरुपयोग भी है। EV इंडस्ट्री में टाटा मोटर्स जैसी कंपनियां चार्जिंग नेटवर्क विस्तार कर रही हैं, लेकिन छोटे शहरों में चुनौतियां बरकरार हैं।
EV अपनाने की चुनौतियां भारत में
इंफ्रास्ट्रक्चर गैप : देशभर में 20,000 से ज्यादा पब्लिक चार्जर हैं, लेकिन राजस्थान जैसे राज्यों में केवल 15% कवरेज।
कॉस्ट इम्प्लिकेशंस : अवैध चार्जिंग से बचने पर EV रनिंग कॉस्ट 1-2 रुपये प्रति किमी रहती है, लेकिन जोखिम से बचें।
सरकारी पहल : FAME-III स्कीम के तहत 2026 तक 50,000 नए चार्जर लगाने का लक्ष्य।
सुरक्षा प्रोटोकॉल : ARAI गाइडलाइंस के अनुसार, EV चार्जिंग स्टेशन पर अर्थिंग और ओवरकरंट प्रोटेक्शन जरूरी।
इस घटना से सबक लेते हुए, EV यूजर्स को जागरूक रहना चाहिए कि ऐसे तरीके न केवल गैरकानूनी हैं बल्कि पर्यावरणीय लाभों को भी कमजोर करते हैं। पुलिस जैसे संस्थानों से अपेक्षा है कि वे मिसाल कायम करें, न कि उल्लंघन करें।
Disclaimer: यह खबर रिपोर्ट्स, टिप्स और सूत्रों पर आधारित है।



