“इस साल होलिका दहन को लेकर भ्रम है क्योंकि भद्रा काल, चंद्रग्रहण और पूर्णिमा तिथि का ओवरलैप हो रहा है। ज्यादातर पंचांगों के अनुसार 3 मार्च शाम 6:22 बजे से 8:50 बजे तक का मुहूर्त सबसे शुभ माना जा रहा है, जबकि कुछ जगहों पर 2 मार्च शाम या 3 मार्च सुबह का विकल्प भी अपनाया जा सकता है।”
होलिका दहन 2026: शुभ मुहूर्त और शहरवार समय
इस साल फाल्गुन पूर्णिमा 2 मार्च 2026 शाम 5:55 बजे से शुरू हो रही है और 3 मार्च शाम 5:07 बजे तक रहेगी। होलिका दहन प्रदोष काल में भद्रा रहित समय पर करना शास्त्र सम्मत है। भद्रा काल 2 मार्च शाम से शुरू होकर 3 मार्च सुबह तक चल रहा है, जिस कारण 2 मार्च शाम का प्रदोष काल भद्रा प्रभावित है। चंद्रग्रहण 3 मार्च दोपहर 3:21 बजे से शाम 6:47 बजे तक रहेगा, इसलिए ग्रहण समाप्ति के बाद का समय शुभ होता है।
अधिकांश प्रमुख पंचांग और ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार होलिका दहन 3 मार्च 2026 (मंगलवार) को प्रदोष काल में किया जाएगा। दिल्ली-एनसीआर के लिए मुख्य मुहूर्त शाम 6:22 बजे से 8:50 बजे तक (कुल 2 घंटे 28 मिनट) है। यह समय चंद्रग्रहण समाप्त होने के बाद शुरू होता है और नकारात्मक ऊर्जा नष्ट करने के लिए आदर्श माना जाता है।
विभिन्न शहरों में होलिका दहन का अनुमानित मुहूर्त (स्थानीय सूर्यास्त के आधार पर, ±5-10 मिनट अंतर संभव):
दिल्ली/एनसीआर: शाम 6:22 बजे से 8:50 बजे
मुंबई: शाम 6:45 बजे से 9:10 बजे के आसपास
कोलकाता: शाम 6:00 बजे से 8:30 बजे
चेन्नई: शाम 6:30 बजे से 8:55 बजे
बेंगलुरु: शाम 6:40 बजे से 9:05 बजे
जयपुर: शाम 6:30 बजे से 8:55 बजे
लखनऊ/कानपुर: शाम 6:15 बजे से 8:45 बजे
पटना: शाम 6:05 बजे से 8:35 बजे
भोपाल: शाम 6:35 बजे से 9:00 बजे
अहमदाबाद: शाम 6:50 बजे से 9:15 बजे
नोट: ये समय दिल्ली आधारित पंचांग से अनुमानित हैं। सटीक मुहूर्त के लिए स्थानीय पंचांग या ज्योतिषी से परामर्श लें क्योंकि सूर्यास्त समय शहर अनुसार बदलता है।
भद्रा और ग्रहण का प्रभाव
भद्रा पूंछ: 3 मार्च सुबह 1:25 बजे से 2:35 बजे तक भद्रा मुख: 2:35 बजे से 4:30 बजे तक (कुछ स्रोतों में थोड़ा अंतर)
भद्रा काल में होलिका दहन वर्जित है, इसलिए 2 मार्च शाम का प्रदोष काल (भद्रा शुरू होने के कारण) कई जगहों पर टाला जा रहा है। कुछ परंपराओं में 3 मार्च सुबह 5:30 बजे से 6:23 बजे (सूतक शुरू होने से पहले) का छोटा मुहूर्त भी अपनाया जा सकता है, लेकिन मुख्य रूप से शाम का समय प्रचलित है।
होलिका दहन की पूजा विधि और महत्वपूर्ण नियम
होलिका की स्थापना: गोबर से बनी होलिका में आम, गुड़, हवन सामग्री, फूल, गुग्गल, लकड़ी और अनाज डालें।
परिक्रमा: 3 या 5 परिक्रमा करें, मन में बुराई से मुक्ति की कामना करें।
पूजा सामग्री: गाय का गोबर, लकड़ी, हवन सामग्री, रोली, अक्षत, फूल, धूप, दीप, फल, मिठाई, गुड़-चने की दाल।
अग्नि प्रज्वलन: प्रदोष काल में दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके अग्नि जलाएं।
नियम: नशा, मांसाहार से दूर रहें। पूजा के दौरान मौन या भजन गाएं।
रंग वाली होली कब?
रंगों की होली 4 मार्च 2026 (बुधवार) को मनाई जाएगी। ग्रहण के सूतक प्रभाव के कारण कुछ लोग 4 मार्च सुबह से रंग खेलना शुरू करेंगे, लेकिन मुख्य उत्सव दिनभर चलेगा।
सावधानियां और सलाह
बच्चों और बुजुर्गों के साथ सुरक्षित तरीके से उत्सव मनाएं।
पर्यावरण अनुकूल रंगों का प्रयोग करें, पानी की बर्बादी से बचें।
होलिका में प्लास्टिक या जहरीली वस्तुएं न डालें।
स्थानीय परंपराओं का सम्मान करें, क्योंकि कुछ क्षेत्रों में 2 मार्च को भी दहन हो सकता है।
यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, इसलिए श्रद्धा और सावधानी से मनाएं।



