“इस होलिका दहन 2026 में सूखा नारियल, सरसों के दाने और लौंग होलिका की पवित्र अग्नि में अर्पित करने से संतान प्राप्ति में बाधाएं, देरी, स्वास्थ्य समस्याएं, बुरी नजर और पारिवारिक क्लेश जैसी प्रमुख परेशानियां दूर हो सकती हैं। पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ये सरल उपाय संतान सुख बढ़ाने में सहायक सिद्ध होते हैं।”
होलिका दहन 2026 में संतान संबंधी बाधाओं को दूर करने के खास उपाय
होलिका दहन का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस साल होलिका दहन 3 मार्च 2026 (मंगलवार) को शाम के शुभ मुहूर्त में मनाया जाएगा, जबकि रंग वाली होली 4 मार्च 2026 (बुधवार) को होगी। पारंपरिक मान्यताओं में होलिका की अग्नि को अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है, जो न केवल नकारात्मक ऊर्जा को भस्म करती है बल्कि विशेष सामग्री अर्पित करने से संतान सुख में आने वाली बाधाओं को भी दूर कर सकती है।
खासकर जो दंपति संतान प्राप्ति की इच्छा रखते हैं या पहले से संतान संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, उनके लिए होलिका दहन में सूखा नारियल , सरसों के दाने और लौंग अर्पित करना एक प्राचीन और प्रभावी उपाय माना जाता है। ये तीनों चीजें मिलकर पांच प्रमुख संतान संबंधी समस्याओं पर असरदार साबित होती हैं।
संतान की प्रमुख समस्याएं जो इन उपायों से दूर हो सकती हैं
संतान प्राप्ति में देरी या बाधा कई दंपतियों को वर्षों प्रयास के बाद भी संतान नहीं होती। होलिका की अग्नि में सूखा नारियल (बिना पानी वाला) डालने से ग्रह-नक्षत्रों की बाधाएं कम होती हैं। नारियल को प्रजनन शक्ति और पूर्णता का प्रतीक माना जाता है। इसे होलिका में अर्पित करते समय “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें। यह उपाय संतान प्राप्ति की राह में आने वाली रुकावटों को जलाकर भस्म कर देता है।
संतान के स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे यदि संतान हो लेकिन बार-बार बीमारी, कमजोरी या विकास में कमी हो रही हो, तो सरसों के दाने अर्पित करना लाभकारी है। सरसों (राई) को नकारात्मक ऊर्जा और रोगाणुओं को दूर करने वाली माना जाता है। होलिका में मुट्ठी भर सरसों डालते समय संतान के स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना करें। यह उपाय बच्चों में बार-बार होने वाली सर्दी-खांसी, कमजोरी और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को कम करने में सहायक होता है।
बुरी नजर या ऊपरी प्रभाव से संतान को खतरा कई परिवारों में संतान पर बुरी नजर या तंत्र-मंत्र का प्रभाव पड़ने की शिकायत रहती है। लौंग (क्लोव्स) को होलिका में डालने से यह प्रभाव दूर होता है। लौंग शुद्धिकरण और सुरक्षा का प्रतीक है। 5 या 7 लौंग लेकर उन्हें होलिका की अग्नि में अर्पित करें। इससे संतान पर पड़ने वाली नकारात्मक दृष्टि या ऊपरी बाधा समाप्त हो जाती है और बच्चे का मानसिक व शारीरिक विकास बेहतर होता है।
पुत्र प्राप्ति में विशेष कठिनाई कुछ दंपतियों को विशेष रूप से पुत्र की इच्छा होती है लेकिन प्रयास विफल रहते हैं। होलिका दहन में नारियल के साथ सरसों और लौंग का संयोजन पुत्र प्राप्ति के लिए अचूक माना जाता है। सूखे नारियल में थोड़ी हल्दी और कुमकुम डालकर उसे अग्नि में डालें। यह उपाय संतान सुख में वृद्धि करता है और परिवार में पुत्र रत्न की प्राप्ति की संभावना बढ़ाता है।
पारिवारिक कलह से संतान पर असर घर में झगड़े, तनाव या वैवाहिक असंतुलन से संतान की मानसिक स्थिति प्रभावित होती है। होलिका में इन तीनों चीजों को एक साथ अर्पित करने से परिवार में शांति आती है। लौंग और सरसों मिलाकर डालने से वातावरण शुद्ध होता है, जबकि नारियल पूर्णता लाता है। इससे संतान का भावनात्मक विकास बेहतर होता है और परिवार में सुख-शांति बढ़ती है।
इन उपायों को कैसे करें – सरल विधि
होलिका दहन के शुभ मुहूर्त (3 मार्च 2026 शाम 6:22 से 8:50 बजे तक) में जाएं।
सूखा नारियल लें, उसमें थोड़ी सरसों के दाने और 5-7 लौंग रखें।
इसे सात बार सिर के चारों ओर घुमाकर होलिका की अग्नि में अर्पित करें।
अर्पण के समय संतान सुख की कामना करें और “ॐ ह्रीं क्लीं संतान गौरवाय नमः” या “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जाप करें।
होलिका की राख को घर लाकर तिजोरी या पूजा स्थल में रखें, यह संतान सुख का प्रतीक बनी रहती है।
ये उपाय पारंपरिक ज्योतिष और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। होलिका दहन की अग्नि में विश्वास और श्रद्धा के साथ ये सामग्री अर्पित करने से संतान संबंधी चुनौतियां कम हो सकती हैं और परिवार में खुशियां बढ़ सकती हैं।



