“2026 में होलिका दहन का मुहूर्त बेहद सीमित है, सिर्फ 14 मिनट का, जो 2 मार्च रात 11:58 से 3 मार्च सुबह 12:12 तक चलेगा। भद्रा काल की वजह से मुहूर्त देर रात शुरू होता है, जबकि 3 मार्च को चंद्र ग्रहण हоли उत्सव को प्रभावित करेगा, जिससे सूतक काल में पूजा-पाठ पर रोक लगेगी। श्रद्धालु भद्रा मुक्त समय में ही दहन करें, और ग्रहण के दौरान सावधानियां बरतें।”
होलिका दहन का शुभ मुहूर्त और समय 2026 में होलिका दहन का मुहूर्त अत्यंत संक्षिप्त है। पंचांग के अनुसार, यह 2 मार्च 2026 को रात 11:58 बजे से शुरू होकर 3 मार्च को सुबह 12:12 बजे तक चलेगा। कुल अवधि मात्र 14 मिनट की है, जो सामान्य वर्षों से काफी कम है। इस दौरान प्रदोष काल में भद्रा मुक्त समय उपलब्ध होता है, लेकिन देरी से शुरू होने के कारण श्रद्धालुओं को रात जागकर इंतजार करना पड़ सकता है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और अन्य प्रमुख शहरों में स्थानीय समय के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है, लेकिन सामान्यतः यह मुहूर्त पूरे भारत में लागू होता है।
भद्रा काल का प्रभाव भद्रा काल होलिका दहन की सबसे बड़ी बाधा है। पंचांग में भद्रा पंचहा 2 मार्च शाम 7:55 बजे से 9:05 बजे तक और भद्रा मुख 9:05 बजे से 11:00 बजे तक रहेगा। भद्रा काल में कोई शुभ कार्य नहीं किया जाता, क्योंकि यह अशुभ माना जाता है। इसलिए दहन केवल भद्रा समाप्ति के बाद ही संभव है, जो मुहूर्त को सीमित कर देता है। यदि भद्रा पूर्णिमा तिथि पर हावी हो, तो दहन का समय और भी कम हो जाता है। इस वर्ष भद्रा की वजह से कई परिवारों को पारंपरिक समय पर दहन न कर पाने की समस्या आएगी, जिससे उत्सव की तैयारी में बदलाव जरूरी हो जाता है।
चंद्र ग्रहण की जानकारी और असर 3 मार्च 2026 को पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा, जो भारत में दृश्य होगा। ग्रहण दोपहर 2:14 बजे से शुरू होकर शाम 7:52 बजे तक चलेगा, जिसमें आंशिक चरण 3:20 बजे से 6:46 बजे तक और पूर्ण चरण 4:34 बजे से 5:32 बजे तक रहेगा। यह ग्रहण फाल्गुन पूर्णिमा पर पड़ रहा है, जो हoli के रंग खेलने वाले दिन को प्रभावित करेगा। सूतक काल ग्रहण से 9 घंटे पहले, यानी सुबह 5:14 बजे से शुरू हो जाएगा, जिस दौरान मंदिरों में पूजा बंद रहेगी, खाना बनाना वर्जित होगा और गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी होगी। ग्रहण के दौरान नेगेटिव एनर्जी बढ़ती है, इसलिए होलिका दहन पहले ही कर लेना बेहतर है। यदि कोई ग्रहण के बाद दहन करने की सोच रहा है, तो मुहूर्त उपलब्ध नहीं होगा, क्योंकि प्रदोष काल समाप्त हो चुका होगा।
| घटना | तिथिऔरसमय(IST) | अवधि | प्रभाव |
|---|---|---|---|
| पूर्णिमातिथिप्रारंभ | 2मार्च,शाम5:55बजे | – | दहनकीतिथिनिर्धारण |
| भद्रापंचहा | 2मार्च,शाम7:55से9:05बजे | 1घंटा10मिनट | शुभकार्यवर्जित |
| भद्रामुख | 2मार्च,शाम9:05से11:00बजे | 1घंटा55मिनट | दहनमेंदेरी |
| होलिकादहनमुहूर्त | 2मार्च,रात11:58से3मार्च,सुबह12:12बजे | 14मिनट | सीमितसमयउपलब्ध |
| चंद्रग्रहणप्रारंभ(पेनुमbral) | 3मार्च,दोपहर2:14बजे | – | सूतककालशुरू |
| आंशिकग्रहण | 3मार्च,दोपहर3:20सेशाम6:46बजे | 3घंटे26मिनट | पूजाबंद |
| पूर्णग्रहण | 3मार्च,शाम4:34से5:32बजे | 58मिनट | अधिकतमअशुभप्रभाव |
| ग्रहणसमाप्ति | 3मार्च,शाम7:52बजे | कुल5घंटे38मिनट | हoliउत्सवप्रभावित |
होलिका दहन की पूजा विधि होलिका दहन से पहले लकड़ी, गोबर के उपले और सूखी घास से होलिका तैयार करें। मुहूर्त में सबसे पहले होलिका की परिक्रमा करें, जिसमें रोली, अक्षत, फूल, गुड़, हल्दी और नारियल चढ़ाएं। मंत्र जपते हुए “ॐ होलिकायै नमः” का उच्चारण करें। दहन के समय परिवार के सभी सदस्य एकत्र हों और प्रह्लाद-होलिका की कथा सुनें। आग जलाने से पहले गंगा जल छिड़कें और दीपक जलाएं। यदि मुहूर्त कम है, तो पहले से सामग्री तैयार रखें ताकि समय बर्बाद न हो। ग्रहण के प्रभाव से बचने के लिए दहन के बाद घर में तुलसी पत्र रखें। विशेष रूप से बच्चों को दहन के दौरान सुरक्षित दूरी पर रखें, क्योंकि आग की तीव्रता बढ़ सकती है।
होलिका दहन का महत्व और परंपराएं होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। पौराणिक कथा के अनुसार, हिरण्यकशिपु की बहन होलिका भक्त प्रह्लाद को जलाने की कोशिश में खुद जल गई। इस वर्ष भद्रा और ग्रहण के कारण महत्व और बढ़ जाता है, क्योंकि श्रद्धालु कठिनाइयों के बीच परंपरा निभाते हैं। उत्तर भारत में होलिका में अनाज की बालियां डालकर समृद्धि की कामना की जाती है, जबकि दक्षिण भारत में इसे छोटी होली के रूप में मनाते हैं। ग्रहण के दौरान नेत्र दान या जल संरक्षण जैसे कार्यों पर जोर दें, क्योंकि ज्योतिष में चंद्र ग्रहण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं ला सकता है। मुहूर्त की कमी से कई समुदाय सामूहिक दहन आयोजित करेंगे, जहां सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य है।
ग्रहण के दौरान सावधानियां चंद्र ग्रहण में बाहर न निकलें, खासकर गर्भवती महिलाएं चाकू या तेज वस्तुओं से दूर रहें। सूतक काल में भोजन न बनाएं, पहले से तैयार रखें। ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान करें और दान दें, जैसे अन्न या वस्त्र। ज्योतिष अनुसार, इस ग्रहण में चंद्रमा वृष राशि में होगा, जो मानसिक तनाव बढ़ा सकता है, इसलिए ध्यान या जप करें। यदि होलिका दहन ग्रहण से प्रभावित लगे, तो वैकल्पिक रूप से घर में छोटी होलिका जलाएं।
क्षेत्रीय विविधताएं दिल्ली और उत्तर प्रदेश में मुहूर्त सख्ती से पालन किया जाता है, जबकि महाराष्ट्र में भद्रा के कारण दहन को अगले दिन शिफ्ट करने की परंपरा नहीं है। बंगाल में ग्रहण के प्रभाव से हoli के रंग खेलने में देरी हो सकती है। पंजाब और हरियाणा में किसान होलिका में फसल के अवशेष डालकर नई फसल की कामना करते हैं। गुजरात में सामुदायिक कार्यक्रमों में सुरक्षा बढ़ाई जाएगी, क्योंकि कम समय में भीड़ प्रबंधन चुनौतीपूर्ण होगा।
ज्योतिषीय दृष्टिकोण इस वर्ष होलिका दहन पर शनि और राहु का प्रभाव मजबूत है, जो भद्रा को बढ़ावा देता है। चंद्र ग्रहण कर्क राशि वालों के लिए स्वास्थ्य संबंधी चेतावनी है। कुंडली में यदि चंद्र कमजोर हो, तो दहन के बाद चंद्र यंत्र स्थापित करें। भद्रा काल में जन्मे लोगों को विशेष पूजा की सलाह दी जाती है। कुल मिलाकर, 2026 का उत्सव परीक्षा की तरह है, जहां श्रद्धा की जीत होगी।
Disclaimer: यह समाचार रिपोर्ट ज्योतिषीय गणनाओं और पंचांग पर आधारित है। सलाह और टिप्स सामान्य हैं, व्यक्तिगत ज्योतिष परामर्श लें। स्रोतों का उल्लेख नहीं किया गया है।