महाभारत का छिपा रहस्य: युधिष्ठिर की दूसरी पत्नी देविका और यौधेय की अनसुनी कहानी, क्या जानते हैं आप?

महाभारत में युधिष्ठिर की मुख्य पत्नी द्रौपदी के अलावा एक दूसरी पत्नी देविका का उल्लेख मिलता है, जो शिवि राज्य की राजकुमारी थीं। स्वयंवर में उन्होंने युधिष्ठिर को चुना और उनसे यौधेय नामक पुत्र हुआ। देविका रहस्यमयी क्यों कही जाती हैं? क्योंकि वनवास और युद्ध के दौरान वे पांडवों के साथ नहीं रहीं, बल्कि कुंती के पास हस्तिनापुर या इंद्रप्रस्थ में रहीं। महाभारत में उनका जिक्र सिर्फ एक-दो स्थानों पर है, फिर भी वे पवित्र और रत्न जैसी स्त्री मानी गई हैं। यौधेय ने युद्ध में भाग लिया लेकिन अन्य उपपांडवों की तरह वे भी नहीं बचे।

महाभारत का रहस्य: युधिष्ठिर की दूसरी पत्नी देविका अनसुना सच! क्या आप जानते हैं यौधेय की मां के बारे में?

महाभारत में धर्मराज युधिष्ठिर को मुख्य रूप से द्रौपदी के पति के रूप में जाना जाता है, लेकिन मूल ग्रंथ में उनकी एक अन्य पत्नी का स्पष्ट उल्लेख है। यह पत्नी हैं देविका, जो शिवि राज्य (शिवि या सैव्य वंश) के राजा गोवासन की पुत्री थीं। यह विवाह स्वयंवर के माध्यम से हुआ, जहां देविका ने स्वयं युधिष्ठिर को वर के रूप में चुना। यह घटना इंद्रप्रस्थ स्थापना के बाद की मानी जाती है, जब पांडव अपना राज्य मजबूत कर रहे थे।

देविका क्षत्रिय कुल की राजकुमारी थीं और महाभारत उन्हें स्त्रियों में रत्न के समान बताया गया है। वे पवित्र, धर्मपरायण और सती-साध्वी के रूप में वर्णित हैं। युधिष्ठिर ने उनके साथ पूर्ण सम्मान और स्नेह बनाए रखा, लेकिन उनकी भूमिका अन्य पात्रों की तुलना में बहुत कम दिखाई गई है। इसका मुख्य कारण महाभारत की कथा का फोकस द्रौपदी, पांचों पांडवों की साझा पत्नी और केंद्रीय महिला चरित्र पर रहना है।

इस विवाह से युधिष्ठिर को एक पुत्र प्राप्त हुआ, जिसका नाम यौधेय रखा गया। यौधेय का नाम उनके मातृवंश से जुड़ा माना जाता है, क्योंकि यौधेय जनजाति प्राचीन काल में शिवि क्षेत्र से संबंधित थी। यौधेय महाभारत युद्ध में शामिल हुए थे और उन्होंने पांडव पक्ष से युद्ध लड़ा, लेकिन कुरुक्षेत्र के महासंग्राम में अन्य उपपांडवों (द्रौपदी के पुत्रों) की तरह वे भी वीरगति को प्राप्त हुए।

देविका की रहस्यमयी छवि का सबसे बड़ा कारण उनका वनवास के दौरान साथ न जाना है। जब पांडवों को जुआ हारने के बाद 13 वर्ष का वनवास मिला, तब देविका ने युधिष्ठिर के साथ जंगल नहीं जाने का निर्णय लिया। वे कुंती के साथ हस्तिनापुर या इंद्रप्रस्थ में ही रहीं। यह निर्णय कई विद्वानों द्वारा अलग-अलग तरीके से देखा जाता है – कुछ इसे उनकी पारिवारिक जिम्मेदारियों से जोड़ते हैं, तो कुछ इसे महाभारत की कथा में उनकी सीमित भूमिका का हिस्सा मानते हैं।

महाभारत के आदि पर्व में इस विवाह का संक्षिप्त वर्णन है, जहां कहा गया है कि गोवासन की पुत्री देविका ने स्वयंवर में युधिष्ठिर को चुना और उनसे यौधेय उत्पन्न हुआ। इसके अलावा ग्रंथ में उनका ज्यादा विस्तार नहीं है, जो उन्हें और भी रहस्यमयी बनाता है। कई टीकाकारों का मानना है कि देविका जैसी पत्नियां पांडवों के राजकीय गठबंधनों को मजबूत करने के लिए थीं, क्योंकि शिवि राज्य एक शक्तिशाली क्षत्रिय क्षेत्र था।

यौधेय के बारे में भी ज्यादा विस्तृत जानकारी नहीं मिलती, लेकिन उनका उल्लेख उपपांडवों की सूची में आता है। वे युद्ध में बहादुरी से लड़े और पांडव वंश की रक्षा में योगदान दिया। कुछ परंपराओं में यौधेय को शिवि राज्य का उत्तराधिकारी भी माना जाता है, हालांकि युद्ध के बाद पांडव वंश की अधिकांश अगली पीढ़ी समाप्त हो गई थी।

देविका की कहानी महाभारत के उन कई पहलुओं को उजागर करती है जो मुख्य कथा की छाया में रह जाते हैं। वे दर्शाती हैं कि द्रौपदी के अलावा भी पांडवों के जीवन में अन्य स्त्रियां थीं, जिनकी भूमिका महत्वपूर्ण लेकिन कम चर्चित रही। यह अनसुना सच हमें महाकाव्य की गहराई समझने में मदद करता है, जहां हर चरित्र का अपना महत्व है, चाहे वह कितना ही कम उल्लेखित क्यों न हो।

Disclaimer: यह लेख महाभारत महाकाव्य पर आधारित सूचनाओं, पौराणिक वर्णनों और प्रचलित व्याख्याओं पर तैयार किया गया है। इसमें किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत राय या अतिरिक्त स्रोतों का उल्लेख नहीं है। पाठक इसे धार्मिक-ऐतिहासिक संदर्भ में समझें।

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