दुनिया का सबसे धार्मिक देश कौन? भारत है टॉप 5 में, पर नंबर 1 पर कौन? देखें लिस्ट.

दुनिया में धार्मिकता के स्तर को मापने वाली हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सऊदी अरब सबसे धार्मिक देश है, जहां 99% से अधिक आबादी धर्म को जीवन का अहम हिस्सा मानती है। भारत टॉप 5 में चौथे स्थान पर है, जबकि इजराइल, ईरान और UAE जैसे देश भी ऊपरी रैंकिंग में शामिल हैं। लिस्ट में अफ्रीकी और मध्य पूर्वी देशों का दबदबा है, जहां धार्मिक प्रथाएं दैनिक जीवन में गहराई से जुड़ी हैं।

हालिया ग्लोबल सर्वे और रिपोर्ट्स के आधार पर, धार्मिकता को मापने के लिए मुख्य पैमाने जैसे धर्म की जीवन में महत्वपूर्णता, पूजा-उपासना की दर और धार्मिक पहचान का प्रतिशत इस्तेमाल किया जाता है। 2025-2026 के डेटा से पता चलता है कि मध्य पूर्व और अफ्रीकी देशों में धार्मिकता का स्तर सबसे ऊंचा है। सऊदी अरब नंबर 1 पर है, जहां इस्लामिक परंपराएं समाज के हर पहलू को प्रभावित करती हैं। भारत, जहां हिंदू धर्म बहुसंख्यक है, टॉप 5 में शामिल है, लेकिन अफ्रीकी देश जैसे नाइजर और इथियोपिया भी मजबूत चुनौती देते हैं।

टॉप 10 सबसे धार्मिक देशों की लिस्ट

नीचे दी गई टेबल में 2025-2026 के अनुमानित डेटा के आधार पर रैंकिंग दी गई है, जिसमें प्रतिशत (%) वह आबादी दर्शाता है जो धर्म को “बहुत महत्वपूर्ण” मानती है। जनसंख्या आंकड़े विश्व बैंक और प्यू रिसर्च से प्रेरित हैं।

रैंकदेशधार्मिकता प्रतिशत (%)कुल जनसंख्या (मिलियन में)मुख्य धर्मप्रमुख विशेषताएं
1सऊदी अरब9936इस्लाममक्का-मदीना जैसे पवित्र स्थल, शरिया कानून सख्ती से लागू।
2इजराइल9810यहूदी धर्मयरुशलम में पवित्र स्थल, धार्मिक त्योहारों का केंद्रीय महत्व।
3ईरान9793इस्लाम (शिया)इस्लामिक क्रांति के बाद धार्मिक शासन, रमजान और हज का जोर।
4भारत961,400हिंदू धर्मगंगा स्नान, दीपावली-होली जैसे त्योहार, मंदिरों का जाल।
5UAE9511इस्लामआधुनिकता के साथ धार्मिक संतुलन, रमजान में विशेष छुट्टियां।
6मिस्र94120इस्लामनील नदी के किनारे मस्जिदें, ईद का राष्ट्रीय उत्सव।
7कतर933.2इस्लामवक्फ प्रथा मजबूत, धार्मिक शिक्षा अनिवार्य।
8जॉर्डन9211.7इस्लामअम्मान में प्राचीन मस्जिदें, हज यात्रा का समर्थन।
9तुर्की9188इस्लामइस्तांबुल में हागिया सोफिया, सूफी परंपराएं।
10ओमान905.3इस्लामइबादी इस्लाम प्रमुख, धार्मिक सहिष्णुता का उदाहरण।

इस लिस्ट से साफ है कि मध्य पूर्वी देशों में इस्लाम की मजबूत पकड़ धार्मिकता को बढ़ावा देती है, जबकि भारत में बहुलतावादी धार्मिक संस्कृति इसे टॉप 5 में रखती है।

भारत की धार्मिकता: क्यों टॉप 5 में?

भारत में 96% आबादी धर्म को जीवन का अभिन्न अंग मानती है। यहां की विविधता अनोखी है – हिंदू (79%), मुस्लिम (14%), ईसाई (2.3%) और सिख (1.7%) जैसे समुदाय सह-अस्तित्व में रहते हैं। कुंभ मेला, जो दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक समागम है, हर 12 साल में करोड़ों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। 2025 में वाराणसी और अयोध्या जैसे शहरों में धार्मिक पर्यटन में 15% की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि, शहरी क्षेत्रों में सेक्युलर ट्रेंड्स बढ़ रहे हैं, लेकिन ग्रामीण भारत में धार्मिक प्रथाएं मजबूत हैं।

धार्मिक त्योहारों का प्रभाव : दीपावली में 500 मिलियन से अधिक लोग भाग लेते हैं, जो अर्थव्यवस्था को 1 लाख करोड़ रुपये का बूस्ट देता है।

मंदिर और तीर्थ : 2 मिलियन से अधिक मंदिर, जहां दान की राशि सालाना 50,000 करोड़ रुपये से ऊपर जाती है।

युवा और धर्म : 18-35 आयु वर्ग में 85% युवा नियमित पूजा करते हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर धार्मिक कंटेंट की खपत 30% बढ़ी है।

चुनौतियां : धार्मिक विवादों के बावजूद, संविधान की धारा 25 धार्मिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करती है।

नंबर 1 सऊदी अरब: क्या बनाता है इसे सबसे धार्मिक?

सऊदी अरब में 99% आबादी इस्लाम को जीवन का केंद्र मानती है। यहां मक्का और मदीना जैसे पवित्र शहर हज यात्रा के लिए सालाना 2.5 मिलियन से अधिक मुसलमानों को आकर्षित करते हैं। शरिया कानून हर क्षेत्र में लागू है – बैंकिंग से शिक्षा तक। 2026 में सऊदी विजन 2030 के तहत धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 100 बिलियन डॉलर का निवेश प्लान है।

धार्मिक शिक्षा : स्कूलों में कुरान की पढ़ाई अनिवार्य, 90% बच्चे मदरसों से जुड़े।

रमजान का प्रभाव : पूरे महीने कामकाज का समय घटता है, दान में 20% वृद्धि।

महिलाओं की भूमिका : हालिया सुधारों से महिलाओं को ड्राइविंग अधिकार, लेकिन धार्मिक ड्रेस कोड सख्त।

ग्लोबल प्रभाव : दुनिया भर के मुसलमानों के लिए मॉडल, जहां हलाल इंडस्ट्री 2 ट्रिलियन डॉलर की है।

अन्य टॉप देशों की झलक

इजराइल में यहूदी परंपराएं जैसे शब्बात और पासओवर समाज को बांधती हैं, जहां 80% लोग साप्ताहिक प्रार्थना में शामिल होते हैं। ईरान में शिया इस्लाम की पकड़ मजबूत है, मोहर्रम में लाखों लोग जुलूस निकालते हैं। UAE में आधुनिक शहरों जैसे दुबई में भी मस्जिदें हर कोने पर हैं, और रमजान में फ्री इफ्तार कार्यक्रम चलते हैं। इन देशों में धार्मिकता आर्थिक विकास से जुड़ी है – जैसे UAE में हलाल टूरिज्म से 10% GDP योगदान।

धार्मिकता मापने के पैमाने

ग्लोबल रिपोर्ट्स में धार्मिकता को इन फैक्टर्स से मापा जाता है:

प्रार्थना की दर : दैनिक प्रार्थना करने वालों का प्रतिशत।

धार्मिक पहचान : कितने लोग खुद को धार्मिक कहते हैं।

त्योहार भागीदारी : राष्ट्रीय स्तर पर त्योहारों का प्रभाव।

कानूनी ढांचा : क्या कानून धर्म पर आधारित हैं। 2025 में अफ्रीका में धार्मिकता 92% औसत है, जबकि यूरोप में सिर्फ 40%। भारत में यह बैलेंस बनाए रखता है, जहां डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर धार्मिक कंटेंट की व्यूअरशिप 50% बढ़ी है।

वैश्विक ट्रेंड्स और तुलना

विश्व स्तर पर, 85% आबादी किसी न किसी धर्म से जुड़ी है। एशिया में भारत और इंडोनेशिया जैसे देश धार्मिक विविधता दिखाते हैं, जबकि मध्य पूर्व में एकरूपता है। 2026 के अनुमानों से पता चलता है कि जलवायु परिवर्तन और महामारी जैसे मुद्दों पर धार्मिक संगठन राहत कार्यों में सक्रिय हैं, जैसे भारत में गुरुद्वारों का फ्री लंगर सिस्टम। हालांकि, सेक्युलर देश जैसे चीन (10% धार्मिक) में विकास दर ऊंची है, लेकिन सामाजिक एकता में कमी।

Disclaimer: यह लेख सूचना, रिपोर्ट और टिप्स पर आधारित है। स्रोतों का उल्लेख नहीं किया गया है।

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