“कल जारी होने वाले नए GDP आंकड़े भारत की आर्थिक गति को नया आयाम देंगे। 2022-23 को बेस ईयर बनाकर जारी होने वाली इस नई सीरीज में GST डेटा, EV सेक्टर की तेजी, मेड इन इंडिया मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर की मजबूती जैसे फैक्टर शामिल होंगे, जो अर्थव्यवस्था में असंगठित क्षेत्र से संगठित सेक्टर की ओर शिफ्ट और रोजगार सृजन को बेहतर तरीके से कैप्चर करेंगे।”
नई GDP गणना: क्या बदलेगा और क्यों महत्वपूर्ण है
कल यानी 27 फरवरी 2026 को मिनिस्ट्री ऑफ स्टैटिस्टिक्स एंड प्रोग्राम इम्प्लीमेंटेशन (MoSPI) द्वारा नई GDP सीरीज जारी की जाएगी, जिसमें बेस ईयर 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया गया है। यह बदलाव 11 साल बाद हो रहा है और इसमें कई नई डेटा सोर्स शामिल किए गए हैं, जैसे GST रिटर्न्स, MCA-21 से कंपनी फाइनेंशियल्स, PLFS लेबर फोर्स डेटा और ASUSE सर्वे।
इस नई सीरीज के साथ Q3 FY 2025-26 (अक्टूबर-दिसंबर 2025) के तिमाही आंकड़े, FY 2025-26 के लिए सेकंड एडवांस एस्टिमेट्स और पिछले चार सालों (2022-23 से 2024-25) के बैक सीरीज डेटा भी जारी होंगे।
मुख्य बदलाव और उनके प्रभाव
GST डेटा का समावेश : पुरानी सीरीज में GST का पूरा प्रभाव नहीं दिखता था। नई सीरीज में GST कलेक्शन, इनपुट टैक्स क्रेडिट और सप्लाई चेन डेटा से ट्रेड, ट्रांसपोर्ट और सर्विस सेक्टर की ग्रोथ ज्यादा सटीक दिखेगी। इससे अर्थव्यवस्था की असल रफ्तार ज्यादा क्लियर होगी, खासकर जहां अनऑर्गनाइज्ड से ऑर्गनाइज्ड शिफ्ट हो रहा है।
EV और ऑटो सेक्टर की तेजी : इलेक्ट्रिक व्हीकल सेगमेंट में 2025 में 50% से ज्यादा ग्रोथ दर्ज की गई है। नई सीरीज में मैन्युफैक्चरिंग और ऑटो कंपोनेंट्स का बेहतर कैप्चर होगा, जिससे सेकंडरी सेक्टर (मैन्युफैक्चरिंग + कंस्ट्रक्शन) की ग्रोथ 8% के आसपास दिख सकती है।
मेड इन इंडिया और मैन्युफैक्चरिंग : PLI स्कीम्स से इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, टेक्सटाइल और फूड प्रोसेसिंग में प्रोडक्शन बढ़ा है। नई बेस ईयर से इन सेक्टर्स का वेटेज बढ़ेगा, जिससे इंडस्ट्रियल ग्रोथ ज्यादा रिफ्लेक्ट होगी।
सर्विस सेक्टर और डिजिटल इकोनॉमी : फाइनेंशियल, रियल एस्टेट, प्रोफेशनल सर्विसेज और IT में 9-10% ग्रोथ बनी हुई है। UPI ट्रांजेक्शंस, डिजिटल पेमेंट्स और ई-कॉमर्स का डेटा अब बेहतर तरीके से शामिल होगा।
रोजगार और ड्राइवर क्लास का योगदान : ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और गिग इकोनॉमी (ड्राइवर, डिलीवरी पर्सन) में बढ़ती एक्टिविटी GST और बैंकिंग डेटा से कैप्चर होगी। इससे टर्शियरी सेक्टर की ग्रोथ में रोजगार आधारित योगदान ज्यादा दिखेगा।
सेक्टर-वाइज अनुमानित प्रभाव
क्यों महत्वपूर्ण है यह रिवीजन
| सेक्टर | पुरानी सीरीज में ग्रोथ (अनुमानित) | नई सीरीज में संभावित प्रभाव | प्रमुख वजहें |
|---|---|---|---|
| एग्रीकल्चर एंड एलाइड | 3.1% | मामूली बदलाव | मौसम आधारित, कम बदलाव |
| मैन्युफैक्चरिंग | 7.0% | 8%+ तक ऊपर | EV, PLI, GST डेटा |
| कंस्ट्रक्शन | 7-8% | मजबूत | इंफ्रास्ट्रक्चर स्पेंडिंग |
| ट्रेड, होटल्स, ट्रांसपोर्ट | 7.5% | 8-9% | GST, लॉजिस्टिक्स बूम |
| फाइनेंशियल सर्विसेज | 9.9% | स्थिर या ऊपर | बैंकिंग, इंश्योरेंस, डिजिटल |
| पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन | 9%+ | स्थिर | गवर्नमेंट स्पेंडिंग |
यह रिवीजन अर्थव्यवस्था की स्ट्रक्चरल शिफ्ट को दिखाएगा – जहां अनऑर्गनाइज्ड से ऑर्गनाइज्ड की ओर मूवमेंट तेज हुआ है। इससे GDP साइज में भी इजाफा हो सकता है, जिससे भारत जापान को पीछे छोड़ चौथी सबसे बड़ी इकोनॉमी बन सकता है।
फुल ईयर आउटलुक
FY 2025-26 के लिए फर्स्ट एडवांस एस्टिमेट में रियल GDP ग्रोथ 7.4% अनुमानित है (पुरानी सीरीज में), जबकि FY 2024-25 में 6.5% रही। नई सीरीज में Q3 FY26 में 8%+ ग्रोथ की उम्मीद है, जो फेस्टिव सीजन, रूरल डिमांड और कैपिटल फॉर्मेशन से सपोर्टेड है।
नई सीरीज से डेटा ज्यादा ट्रांसपेरेंट और एक्यूरेट होगा, जो पॉलिसी मेकिंग, इन्वेस्टमेंट डिसीजन और ग्लोबल कंपैरिजन के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा।
Disclaimer: यह न्यूज रिपोर्ट विभिन्न हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स, सेक्टोरल ट्रेंड्स और सरकारी रिलीज पर आधारित है। आंकड़े आधिकारिक रिलीज के बाद अपडेट हो सकते हैं।



