एनएसई के बोर्ड ने आईपीओ को मंजूरी दी, जो मौजूदा शेयरधारकों द्वारा ऑफर फॉर सेल (OFS) के माध्यम से होगा; आईपीओ कमिटी का पुनर्गठन किया गया, जिसकी अध्यक्षता ताबलेश पांडे करेंगे; एसईबीआई से एनओसी मिलने के बाद दशक भर की देरी समाप्त; ग्रे मार्केट में वैल्यूएशन 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक; 1.77 लाख शेयरधारक प्रभावित होंगे; डीआरएचपी फाइलिंग 4 महीनों में संभव, आईपीओ 7-8 महीनों में लॉन्च हो सकता है।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के गवर्निंग बोर्ड ने आईपीओ लाने के लिए औपचारिक मंजूरी प्रदान कर दी है, जो मौजूदा शेयरधारकों द्वारा ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए होगा। इस फैसले से एनएसई का लिस्टिंग का रास्ता साफ हो गया है, और अब एक्सचेंज एक या अधिक मान्यता प्राप्त भारतीय स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट हो सकेगा। आईपीओ में इक्विटी शेयरों का फेस वैल्यू 1 रुपये रखा जाएगा, जिससे छोटे निवेशकों के लिए आकर्षक अवसर पैदा होंगे। बोर्ड ने आईपीओ से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं को ध्यान में रखते हुए बाजार की स्थितियों और रेगुलेटरी अप्रूवल्स पर जोर दिया है।
आईपीओ कमिटी का पुनर्गठन और भूमिका
बोर्ड ने आईपीओ कमिटी का पुनर्गठन किया है, जो लिस्टिंग प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए जिम्मेदार होगी। यह कमिटी गवर्निंग बोर्ड द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारियों को निभाएगी, जिसमें मर्चेंट बैंकर्स और लीगल एडवाइजर्स की नियुक्ति, ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) तैयार करना और अन्य प्रक्रियाएं शामिल हैं। कमिटी की संरचना इस प्रकार है:
| सदस्य का नाम | पदनाम |
|---|---|
| ताबलेश पांडे | चेयरपर्सन (नॉन-इंडिपेंडेंट डायरेक्टर) |
| श्रीनिवास इंजेती | पब्लिक इंटरेस्ट डायरेक्टर |
| प्रोफेसर ममता बिस्वाल | पब्लिक इंटरेस्ट डायरेक्टर |
| जस्टिस (रिटायर्ड) अभिलाषा कुमारी | पब्लिक इंटरेस्ट डायरेक्टर |
| प्रोफेसर जी. शिवकुमार | पब्लिक इंटरेस्ट डायरेक्टर |
| आशीषकुमार चौहान | मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ |
यह कमिटी गवर्नेंस और कंप्लायंस पर विशेष ध्यान देगी, ताकि आईपीओ प्रक्रिया में कोई रुकावट न आए। कमिटी के सदस्यों का अनुभव, जैसे पूर्व एलआईसी एमडी ताबलेश पांडे का फाइनेंशियल सेक्टर का बैकग्राउंड, प्रक्रिया को मजबूती प्रदान करेगा।
दशक भर की देरी का इतिहास और एसईबीआई की भूमिका
एनएसई के आईपीओ प्लान्स 2016 से रुके हुए थे, जब एक्सचेंज ने पहली बार ड्राफ्ट ऑफर डॉक्यूमेंट्स फाइल किए थे। तब योजना लगभग 10,000 करोड़ रुपये की OFS के जरिए थी, लेकिन गवर्नेंस लैप्स और को-लोकेशन कंट्रोवर्सी के कारण एसईबीआई ने अप्रूवल रोक दिया। को-लोकेशन मामले में कुछ ब्रोकर्स को ट्रेडिंग सिस्टम्स तक प्रेफरेंशियल एक्सेस मिलने के आरोप लगे, जिससे बाजार की निष्पक्षता पर सवाल उठे। जून 2025 में एनएसई ने अनफेयर मार्केट एक्सेस मामले में सेटलमेंट प्लिया दाखिल की, जिसमें 1,388 करोड़ रुपये का भुगतान करने पर सहमति बनी। एसईबीआई ने इस सेटलमेंट को इन-प्रिंसिपल अप्रूवल दिया, जिसके बाद एनओसी जारी हुई। इस एनओसी ने दशक भर की रुकावट को खत्म कर दिया, और अब एनएसई लिस्टिंग की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
वित्तीय प्रदर्शन और वैल्यूएशन
एनएसई का वित्तीय प्रदर्शन मजबूत रहा है, जो आईपीओ के लिए सकारात्मक संकेत है। हालिया क्वार्टर में नेट प्रॉफिट 2,408 करोड़ रुपये रहा, जो सालाना आधार पर 15% की वृद्धि दर्शाता है। टोटल इनकम में 6% की QoQ ग्रोथ दर्ज की गई। एनएसई घरेलू इक्विटी डेरिवेटिव्स मार्केट में प्रमुख प्लेयर है, जहां उसका वॉल्यूम्स में दबदबा है। ग्रे मार्केट में एनएसई की वैल्यूएशन 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही है, जो बाजार विशेषज्ञों के अनुसार है। बजट में एसटीटी बढ़ोतरी के बावजूद अनलिस्टेड शेयरों की कीमतें स्थिर रहीं, क्योंकि आईपीओ टाइमलाइन क्लियर होने से निवेशकों का विश्वास बढ़ा। एनएसई के पास 1.77 लाख शेयरधारक हैं, जिनमें संस्थागत और रिटेल निवेशक शामिल हैं, और आईपीओ से उन्हें लिक्विडिटी मिलेगी।
अपेक्षित टाइमलाइन और प्रक्रिया
एनओसी मिलने के बाद डीआरएचपी फाइलिंग में अधिकतम 4 महीने लग सकते हैं, जिसमें एसईबीआई की क्लियरेंस जरूरी होगी। आईपीओ मार्केट में हिट होने में 7-8 महीने का समय लग सकता है, जो रेगुलेटरी अप्रूवल्स और बाजार कंडीशंस पर निर्भर करेगा। यह आईपीओ भारत के कैपिटल मार्केट्स में सबसे बड़ा होने की उम्मीद है, जो एनएसई की स्केल और डोमिनेंस को देखते हुए है। प्रक्रिया में मर्चेंट बैंकर्स की नियुक्ति जल्द होगी, जो वैल्यूएशन और ऑफर साइज तय करने में मदद करेंगे।
निवेशकों और बाजार पर प्रभाव
यह आईपीओ निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे एनएसई के शेयरों को ट्रेडेबल बनाया जाएगा, जिससे लिक्विडिटी बढ़ेगी। मौजूदा शेयरधारकों को एग्जिट ऑप्शन मिलेगा, जबकि नए निवेशक भारत के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज में हिस्सेदारी ले सकेंगे। बाजार पर प्रभाव के रूप में, एनएसई की लिस्टिंग से कैपिटल मार्केट इकोसिस्टम मजबूत होगा, और बीएसई के साथ प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। एनएसई की सेंट्रल पोजिशन से फाइनेंशियल मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर में पारदर्शिता आएगी। रिटेल निवेशकों के लिए 1 रुपये फेस वैल्यू वाले शेयर आकर्षक होंगे, जो छोटी रकम से भागीदारी संभव बनाएंगे। कुल मिलाकर, यह कदम भारतीय शेयर बाजार की परिपक्वता को दर्शाता है, जहां रेगुलेटरी इश्यूज सॉल्व होने से ग्रोथ के नए द्वार खुलेंगे।
प्रमुख बिंदु: आईपीओ के फायदे और चुनौतियां
फायदे : बढ़ती लिक्विडिटी, निवेशकों के लिए नए अवसर, बाजार में पारदर्शिता, एनएसई की ग्रोथ से जुड़ना।
चुनौतियां : बाजार की अस्थिरता, रेगुलेटरी स्क्रूटिनी, वैल्यूएशन की सटीकता।
निवेश टिप्स : निवेश से पहले वैल्यूएशन चेक करें, बाजार ट्रेंड्स पर नजर रखें, डाइवर्सिफिकेशन अपनाएं।
यह विकास भारतीय कैपिटल मार्केट्स के लिए मील का पत्थर है, जो एनएसई को ग्लोबल स्टैंडर्ड्स की ओर ले जाएगा।
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