“ईपीएफ क्लेम रिजेक्शन के प्रमुख कारणों में गलत पर्सनल डिटेल्स, इनएक्टिव यूएएन, अपूर्ण केवाईसी और बैंक डिटेल्स में मिसमैच शामिल हैं। क्लेम प्रोसेस को सुचारू बनाने के लिए यूएएन एक्टिवेट करें, डिटेल्स वेरिफाई करें और एलिजिबिलिटी चेक करें, जिससे 25% से अधिक रिजेक्शन रेट को कम किया जा सकता है।”
ईपीएफओ द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, हर साल करोड़ों क्लेम्स में से करीब 25-30% रिजेक्ट हो जाते हैं, जिससे कर्मचारियों को अपने हक के पैसे तक पहुंचने में देरी होती है। मुख्य रूप से गलतियां क्लेम फॉर्म में भरी जाती हैं, जो आसानी से सुधारी जा सकती हैं। यहां प्रमुख कारणों और उनके समाधानों पर विस्तार से चर्चा की गई है।
क्लेम रिजेक्शन के प्रमुख कारण
क्लेम रिजेक्ट होने के पीछे तकनीकी, डॉक्यूमेंटेशन और एलिजिबिलिटी से जुड़ी गलतियां प्रमुख हैं। नीचे एक टेबल में इन कारणों को उनकी फ्रीक्वेंसी और प्रभाव के आधार पर सूचीबद्ध किया गया है, जहां फ्रीक्वेंसी हाई, मीडियम या लो के रूप में दर्शाई गई है (ईपीएफओ ट्रेंड्स पर आधारित):
| कारण | विवरण | फ्रीक्वेंसी | प्रभाव |
|---|---|---|---|
| गलत पर्सनल डिटेल्स | नाम, जन्मतिथि, पिता का नाम या जेंडर में मिसमैच, जैसे आधार कार्ड और ईपीएफ रिकॉर्ड में स्पेलिंग डिफरेंस। | हाई | क्लेम पूरी तरह रिजेक्ट, दोबारा अप्लाई करने की जरूरत। |
| इनएक्टिव यूएएन | यूएएन एक्टिव नहीं है या सिस्टम में उपलब्ध नहीं, खासकर जॉब चेंज के बाद। | हाई | क्लेम प्रोसेसिंग ही शुरू नहीं होती। |
| अपूर्ण केवाईसी | आधार, पैन या बैंक अकाउंट लिंक नहीं है, या वेरिफिकेशन पेंडिंग। | मीडियम | ईपीएफओ द्वारा ऑटोमेटिक रिजेक्शन, क्योंकि आईडेंटिटी वेरिफाई नहीं हो पाती। |
| बैंक डिटेल्स में त्रुटि | अकाउंट नंबर, IFSC कोड या बैंक नाम गलत, या अकाउंट क्लेमर के नाम पर नहीं। | हाई | फंड ट्रांसफर फेल, क्लेम रिजेक्ट। |
| ईपीएस से जुड़ी समस्या | पेंशन सर्विस हिस्ट्री में गैप, जैसे पुराने एम्प्लॉयर से ट्रांसफर नहीं हुआ या EPS कंट्रीब्यूशन मिसमैच। | मीडियम | फुल क्लेम रिजेक्ट, खासकर फाइनल सेटलमेंट में। |
| अपर्याप्त बैलेंस | क्लेम अमाउंट से ज्यादा बैलेंस नहीं है, या पार्शल विड्रॉल के लिए एलिजिबिलिटी नहीं पूरी। | लो | अमाउंट एडजस्टमेंट के बजाय रिजेक्ट। |
| डॉक्यूमेंट लिंकिंग की कमी | फॉर्म 10C या अन्य फॉर्म्स में सिग्नेचर अस्पष्ट, या जरूरी अटैचमेंट मिसिंग। | मीडियम | प्रोसेसिंग रुक जाती है। |
| एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया न पूरा होना | विड्रॉल रीजन गलत, जैसे मेडिकल क्लेम के लिए डॉक्यूमेंट्स नहीं या सर्विस पीरियड कम। | लो | ईपीएफओ रूल्स के खिलाफ होने पर रिजेक्ट। |
ये कारण ईपीएफ क्लेम्स के 80% से अधिक रिजेक्शंस के लिए जिम्मेदार हैं, जहां छोटी गलतियां बड़े नुकसान का कारण बनती हैं। उदाहरण के लिए, अगर नाम में ‘Kumar’ की जगह ‘Kumaar’ लिखा हो, तो सिस्टम इसे मिसमैच मान लेता है।
क्लेम रिजेक्ट होने से कैसे बचें: स्टेप-बाय-स्टेप गाइड
पैसा अटकने से बचने के लिए क्लेम सबमिट करने से पहले ये काम जरूर करें। ये टिप्स ईपीएफओ पोर्टल पर उपलब्ध फीचर्स का इस्तेमाल करके लागू किए जा सकते हैं:
यूएएन एक्टिवेट और वेरिफाई करें : सबसे पहले UMANG ऐप या ईपीएफओ वेबसाइट पर लॉगिन करें। अगर यूएएन इनएक्टिव है, तो ‘Activate UAN’ ऑप्शन चुनें और आधार OTP से वेरिफाई करें। जॉब चेंज के बाद पुराने यूएएन को नए से मर्ज करें, जिससे सर्विस हिस्ट्री कंटिन्यूअस रहे। इससे EPS ट्रांसफर इश्यू भी सॉल्व हो जाता है।
केवाईसी अपडेट रखें : ईपीएफओ पोर्टल पर ‘Manage’ सेक्शन में आधार, पैन और बैंक डिटेल्स लिंक करें। आधार को डिजिलॉकर से लिंक करें ताकि ऑटोमेटिक वेरिफिकेशन हो। अगर केवाईसी पेंडिंग है, तो एम्प्लॉयर से अप्रूवल लें। इससे क्लेम रिजेक्शन रेट 40% तक कम हो सकता है।
पर्सनल डिटेल्स चेक करें : ‘Modify Basic Details’ फीचर से नाम, DOB आदि सुधारें। आधार और ईपीएफ रिकॉर्ड मैच करने के बाद ही क्लेम सबमिट करें। अगर मिसमैच है, तो ईपीएफओ ऑफिस में जाकर फॉर्म 5(IF) सबमिट करें।
बैंक डिटेल्स वैलिडेट करें : क्लेम फॉर्म में बैंक अकाउंट डिटेल्स डबल-चेक करें। IFSC कोड सही हो और अकाउंट एक्टिव हो। जॉइंट अकाउंट इस्तेमाल करने से बचें, क्योंकि ईपीएफओ सिंगल नेम अकाउंट प्रेफर करता है। नेFT टेस्ट ट्रांसफर से वेरिफाई करें।
ईपीएस इश्यू सॉल्व करें : अगर क्लेम में EPS मेंशन है, तो ‘Transfer Request’ से पुरानी सर्विस ट्रांसफर करें। फॉर्म 10C अलग से सबमिट करें अगर पेंशन क्लेम है। अगर पुराने एम्प्लॉयर ने EPS नहीं काटा, तो ईपीएफओ हेल्पलाइन (1800-118-005) पर कॉन्टैक्ट करें।
एलिजिबिलिटी और डॉक्यूमेंट्स चेकलिस्ट : विड्रॉल टाइप के अनुसार एलिजिबिलिटी चेक करें – जैसे हाउसिंग के लिए 5 साल सर्विस जरूरी। सभी डॉक्यूमेंट्स (मेडिकल सर्टिफिकेट, मैरिज सर्टिफिकेट आदि) स्कैन करके अपलोड करें। सिग्नेचर क्लियर रखें।
ऑनलाइन ट्रैकिंग इस्तेमाल करें : क्लेम सबमिट करने के बाद ‘Track Claim Status’ से मॉनिटर करें। अगर रिजेक्ट होता है, तो रीजन चेक करके तुरंत री-अप्लाई करें। री-अप्लाई के लिए पुराना क्लेम ID यूज करें ताकि प्रोसेस फास्ट हो।
टेक्निकल इश्यू से बचें : क्लेम सबमिट करते समय ब्राउजर अपडेट रखें और हाई-स्पीड इंटरनेट यूज करें। अगर साइट क्रैश हो, तो ऑफलाइन फॉर्म (19 या 10C) ईपीएफओ ऑफिस में जमा करें।
इन स्टेप्स को फॉलो करने से क्लेम अप्रूवल रेट 90% तक पहुंच सकता है, और पैसा 7-10 दिनों में अकाउंट में आ जाता है। खासकर फाइनल सेटलमेंट क्लेम्स में, जहां रिजेक्शन रेट 34% तक पहुंच जाता है, ये टिप्स कारगर साबित होते हैं।
अतिरिक्त टिप्स फॉर स्पेशल केसेज
जॉब चेंज के बाद : यूएएन मर्ज करें और ट्रांसफर रिक्वेस्ट सबमिट करें। अगर EPS में गैप है, तो फॉर्म 13 से ट्रांसफर कराएं।
पार्शल विड्रॉल : मेडिकल, एजुकेशन या हाउसिंग के लिए स्पेसिफिक डॉक्यूमेंट्स जरूरी। अमाउंट लिमिट चेक करें – जैसे हाउसिंग के लिए 90% तक।
फॉर्म सेलेक्शन : फाइनल सेटलमेंट के लिए फॉर्म 19, पेंशन के लिए 10C। गलत फॉर्म चुनने से रिजेक्ट।
हेल्पलाइन और ऐप्स : UMANG या EPFiGMS पोर्टल से ग्रिवांस रजिस्टर करें अगर रिजेक्ट हो गया।
ये सभी तरीके ईपीएफओ के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं, जो क्लेम प्रोसेस को पेपरलेस बनाते हैं।
Disclaimer: यह समाचार, रिपोर्ट, टिप्स, स्रोतों पर आधारित है।