HUL के Q3 रिजल्ट: मुनाफा दोगुना हुआ फिर भी शेयर क्यों गिरे? एक्सपर्ट्स बताते हैं असली वजह

“हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) ने Q3 FY26 में आईसक्रीम बिजनेस डीमर्जर से एक बारगी लाभ के चलते कुल नेट प्रॉफिट 121% बढ़कर ₹6,603 करोड़ किया, लेकिन कोर बिजनेस (कंटिन्यूइंग ऑपरेशंस) का प्रॉफिट 30% गिरकर ₹2,118 करोड़ रहा। रेवेन्यू 5-6% बढ़ा, वॉल्यूम ग्रोथ 4% रही, लेकिन मार्जिन पर दबाव और इन्वेस्टरों की उम्मीदों से कम कोर परफॉर्मेंस के कारण शेयर 3-5% तक गिर गए।”

HUL Q3 रिजल्ट में मुनाफे के बावजूद शेयरों में गिरावट क्यों?

हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) ने 12 फरवरी 2026 को जारी किए गए Q3 FY26 (अक्टूबर-दिसंबर 2025) के नतीजों में कुल मिलाकर मजबूत दिखाई देने वाले आंकड़े पेश किए, लेकिन बाजार की प्रतिक्रिया नकारात्मक रही। कंपनी का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट 121% उछलकर ₹6,603 करोड़ हो गया, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹2,989 करोड़ था। यह उछाल मुख्य रूप से आईसक्रीम बिजनेस (Kwality Wall’s) के डीमर्जर से आए एक बारगी लाभ (लगभग ₹4,611 करोड़) की वजह से हुआ।

हालांकि, जब इन एक-बारगी आइटम्स को हटाकर कोर बिजनेस (कंटिन्यूइंग ऑपरेशंस) देखें तो तस्वीर अलग है। कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट 30% गिरकर ₹2,118 करोड़ रह गया, जबकि पिछले साल यह ₹3,027 करोड़ था। स्टैंडअलोन आधार पर भी प्रॉफिट ₹7,075 करोड़ दिखा, लेकिन एक्सेप्शनल गेन हटाने पर ग्रोथ सिर्फ 1% रही।

रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस में 5-6% की बढ़ोतरी हुई। अलग-अलग रिपोर्ट्स के अनुसार, यह ₹16,441 करोड़ से ₹16,580 करोड़ तक रही, पिछले साल के ₹15,556-15,788 करोड़ से ऊपर। अंडरलाइंग वॉल्यूम ग्रोथ (UVG) 4% रही, जो अनुमानों (2-3%) से बेहतर थी, जबकि सेल्स ग्रोथ भी 5% के आसपास दर्ज की गई। EBITDA 2-3% बढ़कर ₹3,640-3,788 करोड़ हुआ, लेकिन मार्जिन 23.3% पर सिमट गया, जो पिछले साल के 24% से 70 bps कम है।

शेयर प्राइस पर असर तुरंत दिखा। रिजल्ट के बाद HUL के शेयर 3-5% तक गिरे, इंट्राडे लो ₹2,350-2,368 तक छुआ। ट्रेडिंग में यह 1.7-2% नीचे ₹2,416-2,425 के आसपास बंद हुआ।

गिरावट की मुख्य वजहें क्या रहीं?

कोर प्रॉफिट में गिरावट : इन्वेस्टर हेडलाइन प्रॉफिट (एक बारगी गेन से बढ़ा) से ज्यादा कोर परफॉर्मेंस देखते हैं। 30% की गिरावट ने निराश किया, क्योंकि FMCG सेक्टर में डिमांड रिकवरी की उम्मीद थी।

मार्जिन प्रेशर : इनपुट कॉस्ट, नए लेबर कोड्स के लागू होने से ₹576 करोड़ का एक्सेप्शनल लॉस, और कॉम्पिटिटिव प्राइसिंग से मार्जिन 70 bps सिकुड़ा। EBITDA मार्जिन पिछले साल से कम रहा।

उम्मीदों से कम ग्रोथ : हालांकि वॉल्यूम 4% बढ़ा, लेकिन ओवरऑल ग्रोथ मॉडेस्ट रही। पिछले क्वार्टर्स में भी ग्रोथ सुस्त थी, और इन्वेस्टर मजबूत रिकवरी चाहते थे।

पोर्टफोलियो ट्रांसफॉर्मेशन : आईसक्रीम डीमर्जर के अलावा कंपनी ने Zywie Ventures में 49% स्टेक ₹824 करोड़ में खरीदा (हेल्थ एंड वेलबीइंग बिजनेस मजबूत करने के लिए) और Nutritionalab से बाहर निकली। ये स्ट्रैटेजिक हैं, लेकिन शॉर्ट टर्म में अनसर्टेन्टी बढ़ाते हैं।

एक्सपर्ट्स की राय

मार्केट एनालिस्ट्स का मानना है कि HUL का फोकस वॉल्यूम-लेड ग्रोथ पर है, जो रूरल और अर्बन दोनों में सुधार दिखा रहा है। लेकिन हाई वैल्यूएशन (PE 52x के आसपास) और सेक्टर में कॉम्पिटिशन के चलते प्रीमियम डिमांड नहीं मिल रही। कुछ ब्रोकरेजेज का कहना है कि डिमांड रिकवरी जारी रहेगी, लेकिन मार्जिन रेंज में रहेंगे। लॉन्ग टर्म में हेल्थ बिजनेस और इनोवेशन से ग्रोथ आएगी, लेकिन शॉर्ट टर्म में वोलेटिलिटी रह सकती है।

मुख्य फाइनेंशियल हाइलाइट्स (तालिका)

पैरामीटरQ3 FY26Q3 FY25YoY बदलाव
कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट (रिपोर्टेड)₹6,603 करोड़₹2,989 करोड़+121%
कोर नेट प्रॉफिट (एक्स-एक्सेप्शनल)₹2,118 करोड़₹3,027 करोड़-30%
रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस₹16,441-16,580 करोड़₹15,556-15,788 करोड़+5-6%
EBITDA₹3,640-3,788 करोड़₹3,570-3,689 करोड़+2-3%
EBITDA मार्जिन23.3%24.0%-70 bps
अंडरलाइंग वॉल्यूम ग्रोथ4%

HUL का फोकस अब वॉल्यूम रिकवरी, इनोवेशन और न्यूट्रिशन/हेल्थ सेगमेंट पर है। इन्वेस्टरों को कोर बिजनेस की मजबूती पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि एक बारगी गेन से ज्यादा सस्टेनेबल ग्रोथ मायने रखती है।

Disclaimer : यह न्यूज रिपोर्ट और एनालिसिस वर्तमान बाजार डेटा पर आधारित है। निवेश से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लें।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top