“रंगभरी एकादशी के पावन अवसर पर राजस्थान के खाटू धाम में बाबा श्याम ने 125 किलो शुद्ध चांदी से बने डेढ़ करोड़ रुपये मूल्य के भव्य रथ पर सवार होकर खाटू नगरी का नगर भ्रमण किया। नीले घोड़े पर विराजमान बाबा के दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालु उमड़े, जहां फूलों की बरसात, रंग-गुलाल और भजन-कीर्तन के साथ 350 साल पुरानी परंपरा जीवंत हुई। यह यात्रा सुबह करीब 11:15 बजे शुरू होकर प्रमुख मार्गों से गुजरी, जिसमें भक्तों ने नाचते-गाते बाबा का स्वागत किया।”
खाटू श्याम: रंगभरी एकादशी पर बाबा श्याम का भव्य नगर भ्रमण
फाल्गुनी लक्खी मेले के मुख्य दिन रंगभरी एकादशी पर खाटू श्याम जी मंदिर में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। सीकर जिले के खाटू कस्बे में स्थित इस प्रसिद्ध धाम में बाबा श्याम नीले घोड़े पर सवार होकर चांदी के रथ पर विराजमान हुए और नगर भ्रमण पर निकले। यह परंपरा पिछले 350 वर्षों से चली आ रही है, जिसमें बाबा अपने भक्तों को आशीर्वाद देने के लिए शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हैं।
रथयात्रा सुबह लगभग 11:15 बजे मंदिर प्रांगण से शुरू हुई। रथ को 125 किलो शुद्ध चांदी से निर्मित किया गया है, जिसकी अनुमानित कीमत डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक बताई जाती है। रथ पर फूलों की भारी सजावट की गई थी और भक्तों ने रास्ते भर पुष्पवर्षा की। यात्रा के दौरान हजारों श्रद्धालु रथ के साथ चलते हुए जय श्री श्याम के उद्घोष लगाते रहे। कई स्थानों पर भजन मंडलियों ने कीर्तन प्रस्तुत किए, जबकि भक्त रंग और गुलाल उड़ाकर होली का आगाज कर रहे थे।
बाबा श्याम के इस भव्य शोभायात्रा में शामिल होने के लिए देशभर से पैदल यात्रा कर पहुंचे भक्तों की संख्या लाखों में रही। खाटू धाम में फाल्गुनी लक्खी मेला 21 फरवरी से शुरू होकर 28 फरवरी तक चला, जिसमें रंगभरी एकादशी सबसे महत्वपूर्ण दिन साबित हुआ। मेले के दौरान मंदिर के पट 24 घंटे खुले रहे ताकि सभी भक्त आसानी से दर्शन कर सकें।
रथयात्रा करीब दो किलोमीटर लंबे मार्ग से गुजरी, जिसमें मुख्य बाजार, मंदिर परिसर के आसपास के इलाके और अन्य प्रमुख स्थल शामिल थे। सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखा गया था ताकि किसी भी तरह की असुविधा न हो। भक्तों ने बताया कि बाबा के दर्शन मात्र से ही मन को शांति मिलती है और यह यात्रा उनकी आस्था को और मजबूत करती है।
रथयात्रा के प्रमुख आकर्षण
रथ की विशेषताएं : 125 किलो चांदी से निर्मित, डेढ़ करोड़ से अधिक मूल्य, भव्य सजावट।
सवारी : नीला घोड़ा, बाबा श्याम नीले वस्त्रों में विराजमान।
परंपरा की आयु : लगभग 350 वर्ष पुरानी।
यात्रा की शुरुआत : सुबह 11:15 बजे मंदिर से।
भक्तों की भागीदारी : लाखों श्रद्धालु, नाच-गाना, रंग-गुलाल, फूलों की बरसात।
मेले की अवधि : 21 फरवरी से 28 फरवरी 2026 तक।
इस अवसर पर भक्तों ने बाबा से मनोकामनाएं मांगीं और कई ने कहा कि रथयात्रा में शामिल होना उनके जीवन की सबसे बड़ी खुशी है। खाटू श्याम जी की यह यात्रा न केवल धार्मिक महत्व रखती है बल्कि सामाजिक एकता और भक्ति की भावना को भी मजबूत करती है।
Disclaimer : यह समाचार धार्मिक आयोजन पर आधारित है और श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए तैयार किया गया है।



