महाशिवरात्रि 2026 इस बार 15 फरवरी को रविवार को मनाई जाएगी, जब चंद्रमा, बुध और मंगल तीन ग्रहों का गोचर होगा। कुंभ में सूर्य, बुध, शुक्र, राहु के साथ चतुर्ग्रही योग, लक्ष्मी नारायण योग, बुधादित्य योग और रूचक महापुरुष योग जैसे दुर्लभ राजयोग बनेंगे। मेष, कन्या, कुंभ, मिथुन, धनु, मकर जैसी कई राशियों पर महादेव की विशेष कृपा बरसेगी, जिससे धन लाभ, करियर उन्नति, स्वास्थ्य सुधार और मनोकामनाएं पूरी होने की संभावना बढ़ेगी।
महाशिवरात्रि 2026: ग्रह गोचर और राशियों पर प्रभाव
महाशिवरात्रि 2026 को फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी पर 15 फरवरी रविवार को मनाया जाएगा। चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी शाम 5:04 बजे से शुरू होकर 16 फरवरी शाम 5:34 बजे तक रहेगी। निशिता काल पूजा का समय रात 12:09 बजे से 1:01 बजे तक होगा, जो शिव पूजा के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।
इस दिन तीन प्रमुख ग्रहों की चाल बदलेगी, जो ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है:
बुध शतभिषा नक्षत्र छोड़कर पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश करेगा।
मंगल श्रवण नक्षत्र से धनिष्ठा नक्षत्र में गोचर करेगा, अपनी उच्च राशि मकर में रूचक महापुरुष योग बनाएगा।
चंद्रमा मकर राशि में गोचर करेगा।
इसके अलावा कुंभ राशि में सूर्य, बुध, शुक्र और राहु का संयोग चतुर्ग्रही योग बनाएगा। बुध-सूर्य से बुधादित्य योग, बुध-शुक्र से लक्ष्मी नारायण योग, सूर्य-शुक्र से शुक्रादित्य योग और मंगल से रूचक योग का निर्माण होगा। ये योग लगभग 300 वर्ष बाद एक साथ बन रहे हैं, जो आध्यात्मिक और भौतिक उन्नति के लिए अत्यंत शुभ हैं।
इन राशियों पर बनेगी विशेष कृपा
इस दुर्लभ संयोग से कई राशियां लाभान्वित होंगी:
मेष राशि : वित्तीय स्थिति मजबूत होगी, नई नौकरी या प्रमोशन के योग बनेंगे। तनाव से मुक्ति मिलेगी और धन प्रवाह बढ़ेगा।
कन्या राशि : लंबित इच्छाएं पूरी होंगी, कार्यक्षेत्र में सफलता, निवेश से लाभ और स्वास्थ्य में सुधार होगा।
कुंभ राशि : संतुलन बनेगा, नौकरी में उन्नति, वित्तीय स्थिरता और सामाजिक मान-सम्मान बढ़ेगा।
मिथुन राशि : बुद्धि और संचार से लाभ, व्यापार में वृद्धि और रिश्तों में मधुरता आएगी।
धनु राशि : उच्च शिक्षा, यात्रा और आध्यात्मिक प्रगति के अवसर मिलेंगे।
मकर राशि : मंगल की उच्च स्थिति से ऊर्जा बढ़ेगी, करियर में स्थिरता और मेहनत का फल मिलेगा।
अन्य राशियां जैसे वृष, सिंह, तुला भी लक्ष्मी नारायण योग से धन-समृद्धि और सामाजिक लाभ पा सकती हैं।
पूजा के प्रमुख मुहूर्त और विधि
रात्रि प्रथम प्रहर पूजा : शाम 6:11 बजे से 9:23 बजे तक।
द्वितीय प्रहर : रात 9:23 बजे से 12:35 बजे तक।
तृतीय प्रहर : 12:35 बजे से 3:47 बजे तक।
चतुर्थ प्रहर : 3:47 बजे से सुबह 6:59 बजे तक।
शिवरात्रि पारण : 16 फरवरी सुबह 6:59 बजे से दोपहर 3:24 बजे तक।
पूजा में बिल्वपत्र, दूध, शहद, भांग, धतूरा और चंदन चढ़ाएं। रात्रि जागरण, महामृत्युंजय मंत्र जाप और शिवलिंग पर जलाभिषेक विशेष फलदायी होगा। व्रत रखने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और पिछले जन्म के पाप नष्ट होते हैं।
उपाय और सुझाव
शिवलिंग पर दूध और जल चढ़ाएं।
“ॐ नमः शिवाय” मंत्र का 108 बार जाप करें।
गरीबों को सफेद मिठाई या चावल दान करें।
रात्रि में चारों प्रहर पूजा करने से धन, यश, स्थिरता और संतान सुख प्राप्त होता है।
यह महाशिवरात्रि आध्यात्मिक जागृति और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का दुर्लभ अवसर है। भोलेनाथ की कृपा से सभी की मनोकामनाएं पूर्ण हों।
Disclaimer : यह लेख ज्योतिषीय गणनाओं और परंपरागत मान्यताओं पर आधारित है। व्यक्तिगत कुंडली के अनुसार प्रभाव भिन्न हो सकता है।



