केंद्रीय बजट 2026-27 में फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) की बढ़ोतरी ने बाजार में हलचल मचा दी है। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने स्पष्ट किया कि यह कदम राजस्व जुटाने के लिए नहीं, बल्कि घरेलू बचत को अत्यधिक सट्टेबाजी से बचाने के लिए उठाया गया है। SEBI के आंकड़ों के अनुसार F&O ट्रेडिंग में रिटेल निवेशकों को भारी नुकसान हो रहा है, जबकि ट्रांजैक्शन वॉल्यूम GDP से 500 गुना अधिक है। इससे सिस्टेमिक रिस्क कम करने और लंबी अवधि के निवेश को प्रोत्साहन देने का लक्ष्य है।
मुख्य आर्थिक सलाहकार की सफाई: उद्देश्य राजस्व नहीं, सट्टेबाजी पर लगाम
मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने स्पष्ट किया कि बजट में घोषित STT बढ़ोतरी का मुख्य मकसद राजस्व बढ़ाना नहीं है। उन्होंने कहा कि घरेलू बचत को सट्टेबाजी से बचाना और निवेशकों की मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखना सरकार की प्राथमिकता है। F&O सेगमेंट में अत्यधिक स्पेकुलेटिव ट्रेडिंग के कारण रिटेल निवेशकों को लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा है। SEBI की रिपोर्ट्स में यह बात सामने आई है कि अधिकांश रिटेल ट्रेडर्स F&O में पैसा गंवा रहे हैं। इस बढ़ोतरी से ट्रेडिंग की लागत बढ़ेगी, जिससे हाई-फ्रीक्वेंसी और इंट्राडे स्पेकुलेशन कम होगा।
बजट 2026-27 में STT दरों के प्रस्तावित बदलाव
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में डेरिवेटिव्स पर STT बढ़ाने का ऐलान किया। यह बदलाव विशेष रूप से F&O सेगमेंट पर लागू होगा, जबकि अन्य सेगमेंट्स में STT दरें अपरिवर्तित रहेंगी।
| ट्रेडिंग प्रकार | पुरानी दर (%) | नई प्रस्तावित दर (%) | बढ़ोतरी (%) | प्रभावित क्षेत्र |
|---|---|---|---|---|
| फ्यूचर्स | 0.02 | 0.05 | 150 | फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स |
| ऑप्शंस प्रीमियम | 0.10 | 0.15 | 50 | ऑप्शंस खरीद पर |
| ऑप्शंस एक्सरसाइज | 0.125 | 0.15 | 20 | ऑप्शंस एक्सरसाइज पर |
ये बदलाव ट्रांजैक्शन-बेस्ड हैं, यानी जितनी अधिक ट्रेडिंग, उतनी अधिक टैक्स। इससे शॉर्ट-टर्म स्पेकुलेटिव स्ट्रैटेजी महंगी हो जाएंगी, जबकि लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टर्स पर न्यूनतम प्रभाव पड़ेगा।
बाजार की तत्काल प्रतिक्रिया और ब्रोकरेज फर्म्स पर असर
बजट पेश होने के तुरंत बाद शेयर बाजार में तेज गिरावट आई। सेंसेक्स 1,547 अंक टूटा और निफ्टी प्रमुख स्तरों से नीचे चला गया। ब्रोकरेज कंपनियों जैसे एंजेल वन, ग्रो और जीरोधा से जुड़े स्टॉक्स में 10% तक की गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि F&O ट्रेडिंग इनकी आय का बड़ा हिस्सा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रेडिंग वॉल्यूम में कमी आ सकती है, खासकर रिटेल और हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स के बीच। हालांकि, लंबी अवधि में यह बाजार को अधिक स्थिर और फंडामेंटल-बेस्ड बनाने में मदद करेगा।
F&O ट्रेडिंग में सिस्टेमिक रिस्क और रिटेल नुकसान
F&O सेगमेंट का ट्रांजैक्शन वॉल्यूम भारत की GDP से 500 गुना अधिक है। यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि यहां स्पेकुलेशन कितना अधिक है। रेवेन्यू सेक्रेटरी अरविंद श्रीवास्तव ने भी कहा कि यह बढ़ोतरी स्पेकुलेटिव ट्रेडिंग पर अंकुश लगाने और सिस्टेमिक रिस्क कम करने के लिए है। सरकार का कहना है कि STT दरें अभी भी वॉल्यूम की तुलना में मामूली हैं। रिटेल निवेशकों के लिए यह संदेश है कि F&O में एंट्री से पहले रिस्क समझें, क्योंकि अधिकांश ट्रेडर्स नुकसान में रहते हैं। बजट का फोकस कैश मार्केट और लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा देने पर है।
सरकार की रणनीति: स्पेकुलेशन कम, वेल्थ क्रिएशन बढ़ाएं
मुख्य आर्थिक सलाहकार ने जोर दिया कि सरकार की मंशा F&O को बंद करना नहीं है, बल्कि अत्यधिक स्पेकुलेशन को नियंत्रित करना है। इससे घरों में बचत का इस्तेमाल वेल्थ मैक्सिमाइजेशन के लिए होगा, न कि स्पेकुलेटिव बेट्स के लिए। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम फाइनेंशियल लिटरेसी बढ़ाने और निवेशकों को शिक्षित करने की दिशा में भी है। ब्रोकरेज फर्म्स को अब अपने बिजनेस मॉडल में बदलाव करना पड़ सकता है, जैसे कैश सेगमेंट या अन्य सर्विसेज पर फोकस।
निवेशकों के लिए सलाह
स्पेकुलेटिव ट्रेडिंग से बचें और फंडामेंटल एनालिसिस पर आधारित निवेश चुनें।
F&O में एंट्री से पहले ब्रोकरेज चार्जेस और STT कैलकुलेट करें।
लॉन्ग-टर्म इक्विटी या म्यूचुअल फंड्स में शिफ्ट करने पर विचार करें।
बाजार की अस्थिरता में धैर्य रखें, क्योंकि यह बदलाव लंबी अवधि में स्थिरता लाएगा।
Disclaimer: यह लेख समाचार और सूचना के उद्देश्य से तैयार किया गया है। निवेश से संबंधित कोई भी निर्णय व्यक्तिगत जोखिम पर लें।