“संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने अमेरिका के साथ क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ पर एक महत्वपूर्ण फ्रेमवर्क साइन किया है, जो सप्लाई चेन को मजबूत करने और निवेश को बढ़ावा देने पर फोकस करता है। यह कदम भारत की रेयर अर्थ कॉरिडोर पहल के बाद आया है, जो चीन की मोनोपॉली को चुनौती देगा और ग्लोबल टेक्नोलॉजी तथा डिफेंस सेक्टर में विविधता लाएगा। फ्रेमवर्क में जॉइंट इन्वेस्टमेंट, प्रोसेसिंग और रिसाइक्लिंग शामिल हैं, जिससे UAE और US दोनों को फायदा होगा।”
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने अमेरिका के साथ क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ सप्लाई को सुरक्षित करने के लिए एक फ्रेमवर्क पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता दोनों देशों के बीच समन्वित दृष्टिकोण स्थापित करता है, जो माइनिंग, सेपरेशन, प्रोसेसिंग और रिसाइक्लिंग जैसे क्षेत्रों में निवेश को तेज करेगा। UAE के निवेश मंत्री मोहम्मद हसन अलसुवैदी और US के अंडर सेक्रेटरी ऑफ स्टेट जैकब हेलबर्ग ने इस पर साइन किए।
यह फ्रेमवर्क UAE की स्ट्रैटेजिक रिजर्व्स और US की इंडस्ट्रियल डिमांड को जोड़ता है, जिससे डिफेंस, एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और इंडस्ट्रियल ग्रोथ के लिए जरूरी मटेरियल्स की सप्लाई चेन मजबूत होगी। दोनों देश प्राइवेट और पब्लिक इन्वेस्टमेंट को मोबिलाइज करेंगे, जिसमें फाइनेंसिंग, गारंटीज, इक्विटी इन्वेस्टमेंट, ऑफटेक अरेंजमेंट्स और इंश्योरेंस शामिल हैं। प्रायोरिटी प्रोजेक्ट्स की पहचान की जाएगी, जो सप्लाई चेन गैप्स को भरेंगे।
UAE और US छह महीनों के अंदर ऐसे प्रोजेक्ट्स को फाइनेंस प्रदान करेंगे, जो दोनों मार्केट्स के लिए एंड प्रोडक्ट्स तैयार करेंगे। परमिटिंग प्रोसेस को तेज किया जाएगा, जो कानूनी रूप से सुसंगत होगा। मार्केट रेजिलिएंस को मजबूत करने के लिए नॉन-मार्केट पॉलिसीज और अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिसेज का सामना किया जाएगा। ट्रांसपेरेंट ट्रेड के लिए हाई-स्टैंडर्ड मैकेनिज्म्स एक्सप्लोर किए जाएंगे।
रिसाइक्लिंग टेक्नोलॉजीज में निवेश, स्क्रैप मैनेजमेंट में सुधार, UAE, US और अन्य लोकेशन्स में जियोलॉजिकल मैपिंग को बढ़ावा दिया जाएगा। नेशनल सिक्योरिटी ग्राउंड्स पर एसेट सेल्स की रिव्यू को मजबूत किया जाएगा। थर्ड पार्टीज के साथ कोलैबरेशन भी शामिल है।
यह कदम भारत की रेयर अर्थ पहलों के बाद आया है, जहां भारत ने ओडिशा, तमिलनाडु, केरल और आंध्र प्रदेश में रेयर अर्थ कॉरिडोर की घोषणा की है। भारत US-लीडेड अलायंस में शामिल है, जो 50 से अधिक देशों को जोड़ता है और चीन की डोमिनेंस को चैलेंज करता है। चीन वर्तमान में दुनिया की 70 प्रतिशत रेयर अर्थ माइनिंग और 90 प्रतिशत प्रोसेसिंग कंट्रोल करता है।
UAE का यह स्टेप चीन की मोनोपॉली को तोड़ने में मदद करेगा, क्योंकि UAE की स्ट्रैटेजिक रिजर्व्स अब US के साथ शेयर होंगी। इससे इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, स्मार्टफोन्स, जेट इंजन्स और सेमीकंडक्टर जैसे प्रोडक्ट्स की प्रोडक्शन चेन डाइवर्सिफाई होगी। UAE ने US में अगले दशक में 1.4 ट्रिलियन डॉलर इन्वेस्टमेंट कमिट किया है, जो इस फ्रेमवर्क को सपोर्ट करेगा।
क्रिटिकल मिनरल्स की डिमांड 2030 तक ट्रिपल और 2040 तक क्वाड्रूपल होने की उम्मीद है। यह फ्रेमवर्क ग्लोबल इकोनॉमिक स्टेबिलिटी के लिए इन्वेस्टमेंट-लीडेड पार्टनरशिप्स को बढ़ावा देगा। UAE मिनिस्ट्री ऑफ इन्वेस्टमेंट ने 50 से अधिक ग्लोबल काउंटरपार्ट्स के साथ एंगेजमेंट किया है।
क्रिटिकल मिनरल्स की मुख्य चुनौतियां और समाधान
चीन की डोमिनेंस : चीन रेयर अर्थ एक्सपोर्ट पर कंट्रोल्स लगाता है, जो ग्लोबल ट्रेड वॉर्स में इस्तेमाल होता है। UAE-US फ्रेमवर्क इससे वैकल्पिक सप्लाई चेन बनाएगा।
सप्लाई चेन गैप्स : माइनिंग से प्रोसेसिंग तक की कमी। फ्रेमवर्क जॉइंट प्रोजेक्ट्स से इसे भरने का प्लान करता है।
इन्वेस्टमेंट जरूरत : ट्रिपल डिमांड के लिए सस्टेनेबल फंडिंग। UAE की फाइनेंशियल स्ट्रेंथ और US की टेक्नोलॉजी इसे सपोर्ट करेगी।
रिसाइक्लिंग फोकस : स्क्रैप मैनेजमेंट से रिसोर्स रिकवरी। दोनों देश नई टेक्नोलॉजीज में इन्वेस्ट करेंगे।
ग्लोबल कोऑपरेशन : थर्ड कंट्रीज के साथ पार्टनरशिप, जैसे वियतनाम और लाओस, जो साउथ कोरिया जैसी कंट्रीज भी फॉलो कर रही हैं।
UAE-US फ्रेमवर्क के प्रमुख क्षेत्र
| क्षेत्र | विवरण | प्रभाव |
|---|---|---|
| माइनिंग और सेपरेशन | प्रायोरिटी प्रोजेक्ट्स की पहचान और फाइनेंसिंग | सप्लाई चेन को मजबूत करेगा, चीन पर निर्भरता कम |
| प्रोसेसिंग और डाउनस्ट्रीम | ऑफटेक अरेंजमेंट्स और इक्विटी इन्वेस्टमेंट | एडवांस्ड टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स के लिए स्टेबल सप्लाई |
| रिसाइक्लिंग | टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट और स्क्रैप मैनेजमेंट | एनवायरनमेंट फ्रेंडली और सस्टेनेबल रिसोर्स यूज |
| रेगुलेटरी सपोर्ट | परमिटिंग प्रोसेस को तेज करना | प्रोजेक्ट्स की स्पीड बढ़ेगी, इन्वेस्टर्स को आकर्षित करेगा |
| मार्केट रेजिलिएंस | अनफेयर प्रैक्टिसेज का सामना | ट्रांसपेरेंट ट्रेड प्रमोट करेगा, प्राइस चैलेंजेस सॉल्व |
यह फ्रेमवर्क UAE और US के बीच मल्टी-लेयर्ड पार्टनरशिप को मजबूत करता है, जो इकोनॉमिक और नेशनल सिक्योरिटी को बढ़ावा देगा। UAE की ग्लोबल इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी इससे जुड़ती है, जहां यह क्रिटिकल सेक्टर्स में लीडरशिप ले रहा है।
भारत की भूमिका और तुलना
भारत ने रेयर अर्थ कॉरिडोर के जरिए घरेलू प्रोडक्शन को बूस्ट किया है, जो US-लीडेड अलायंस से जुड़ा है। UAE का स्टेप इससे मिलता-जुलता है, लेकिन UAE की फोकस मिडल ईस्ट रिजर्व्स पर है। दोनों देशों की पहलें मिलकर चीन की 90 प्रतिशत प्रोसेसिंग मोनोपॉली को चैलेंज करेंगी। भारत के एक्सटर्नल अफेयर्स मिनिस्टर एस जयशंकर ने US समिट में हिस्सा लिया, जो इंडिकेट करता है कि भारत इस ग्लोबल इनिशिएटिव का हिस्सा है।
रणनीतिक प्रभाव
यह समझौता चीन के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि US अब अलायंस के जरिए 55 देशों को जोड़ रहा है। चीन ने रेयर अर्थ पर एक्सपोर्ट रेस्ट्रिक्शन्स लगाए थे, जो ट्रेड वॉर्स में इस्तेमाल हुए। UAE-US डील से वैकल्पिक सोर्सेज बढ़ेंगे, जो EV मैन्युफैक्चरिंग और डिफेंस इंडस्ट्री को सपोर्ट करेगा। साउथ कोरिया जैसी कंट्रीज भी चीन के साथ कोऑपरेशन सर्च कर रही हैं, लेकिन US ब्लॉक में शामिल हो गई हैं।
आगे की संभावनाएं
फ्रेमवर्क में थर्ड पार्टीज के साथ कोलैबरेशन शामिल है, जो अफ्रीका और एशिया के देशों को इन्वॉल्व कर सकता है। UAE की इन्वेस्टमेंट कमिटमेंट US में जॉब्स क्रिएट करेगी और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को बढ़ावा देगी। क्रिटिकल मिनरल्स अलायंस से प्राइस फ्लोर्स और कोऑर्डिनेटेड ट्रेड जोन बनेंगे, जो चीन की ग्रिप को कमजोर करेंगे।
Disclaimer: यह लेख समाचार रिपोर्टों, विशेषज्ञ विश्लेषणों और उद्योग रुझानों पर आधारित है। इसमें दिए गए विचार और डेटा सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए हैं और निवेश सलाह नहीं माने जाएं।