मार्च 2026 में हिंदू पंचांग के अनुसार विवाह के कुल 8 शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं। महीने की शुरुआत में मघा, पूर्वाफाल्गुनी, उत्तराफाल्गुनी, स्वाती और अनुराधा जैसे शुभ नक्षत्रों में विवाह संभव हैं, लेकिन 14 मार्च से सूर्य मीन राशि में प्रवेश के साथ खरमास शुरू हो जाएगा, जिसके कारण महीने के अंतिम भाग में कोई मांगलिक कार्य नहीं हो पाएगा। जोड़े जल्दी से तिथियां बुक करें क्योंकि उपलब्ध मुहूर्त सीमित हैं और वसंत ऋतु की खुशियां शादियों के लिए अनुकूल माहौल दे रही हैं।
मार्च 2026 में विवाह मुहूर्त: सीमित लेकिन शुभ अवसर
हिंदू परंपरा में विवाह सबसे महत्वपूर्ण संस्कार माना जाता है और इसके लिए शुभ मुहूर्त का चयन कुंडली मिलान के साथ ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति पर आधारित होता है। मार्च 2026 फाल्गुन-चैत्र संक्रमण का महीना है, जहां वसंत का आगमन जोड़ों के लिए उत्साहजनक होता है, लेकिन इस बार मुहूर्त केवल 8 दिनों तक सीमित हैं।
पंचांग के अनुसार मार्च में विवाह के लिए मुख्य शुभ तिथियां इस प्रकार हैं:
2 मार्च 2026 (सोमवार) : मघा नक्षत्र में दोपहर 1:46 से शाम 5:53 तक मुहूर्त। चतुर्दशी तिथि पर यह समय स्थिरता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। कई परिवार इस तिथि को प्राथमिकता देते हैं क्योंकि नक्षत्र मजबूत है।
3 मार्च 2026 (मंगलवार) : पूर्वाफाल्गुनी और मघा नक्षत्र में सुबह 7:00 से 7:30 तक छोटा लेकिन प्रभावी मुहूर्त। पूर्णिमा तिथि पर विवाह सौभाग्य बढ़ाने वाला होता है।
4 मार्च 2026 (बुधवार) : उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में सुबह 7:39 से 8:50 तक। प्रतिपदा तिथि नई शुरुआत के लिए उत्तम है।
7 मार्च 2026 (शनिवार) : स्वाती नक्षत्र में सुबह 11:16 से अगले दिन सुबह 6:53 तक लंबा मुहूर्त। चतुर्थी-पंचमी तिथि पर यह अवधि विस्तृत समारोह के लिए आदर्श।
8 मार्च 2026 (रविवार) : स्वाती नक्षत्र में सुबह 6:55 से 7:04 तक। पंचमी तिथि पर छोटा मुहूर्त लेकिन उच्च गुणवत्ता वाला।
9 मार्च 2026 (सोमवार) : अनुराधा नक्षत्र में शाम 4:14 से रात 11:27 तक। षष्ठी तिथि पर यह समय दांपत्य सुख के लिए जाना जाता है।
11 मार्च 2026 (बुधवार) : मूल नक्षत्र में सुबह 4:41 से अगले दिन सुबह 6:51 तक। नवमी तिथि मजबूत आधार प्रदान करती है।
12 मार्च 2026 (गुरुवार) : मूल नक्षत्र में सुबह 6:54 से 9:59 तक। नवमी तिथि पर यह अंतिम प्रमुख मुहूर्त है।
ये मुहूर्त दिल्ली-एनसीआर और उत्तरी भारत के लिए सामान्य समय पर आधारित हैं। स्थानीय पंचांग या ज्योतिषी से लग्न शुद्धि और कुंडली के अनुसार सटीक समय की पुष्टि जरूरी है।
खरमास का प्रभाव और सावधानियां
मार्च 2026 में खरमास 14 मार्च से शुरू हो जाएगा, जब सूर्य मीन राशि में प्रवेश करेंगे। यह अवधि अप्रैल मध्य तक चलेगी। खरमास में विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं क्योंकि सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण की स्थिति में बदलाव के कारण अशुभ माने जाते हैं। इसलिए 13 मार्च के बाद कोई विवाह नहीं हो सकेगा।
मार्च में उपलब्ध मुहूर्त मुख्यतः महीने के पहले दो सप्ताह में केंद्रित हैं। जोड़े और परिवारों को सलाह है कि वे वेन्यू, पंडित और अन्य व्यवस्थाएं जल्दी फाइनल करें क्योंकि सीजन की डिमांड अधिक है।
विवाह मुहूर्त तालिका (मार्च 2026)
| तारीख | दिन | नक्षत्र | मुख्य मुहूर्त समय | तिथि |
|---|---|---|---|---|
| 2 मार्च | सोमवार | मघा | दोपहर 1:46 – शाम 5:53 | चतुर्दशी |
| 3 मार्च | मंगलवार | पूर्वाफाल्गुनी/मघा | सुबह 7:00 – 7:30 | पूर्णिमा |
| 4 मार्च | बुधवार | उत्तराफाल्गुनी | सुबह 7:39 – 8:50 | प्रतिपदा |
| 7 मार्च | शनिवार | स्वाती | सुबह 11:16 – अगले दिन सुबह 6:53 | चतुर्थी/पंचमी |
| 8 मार्च | रविवार | स्वाती | सुबह 6:55 – 7:04 | पंचमी |
| 9 मार्च | सोमवार | अनुराधा | शाम 4:14 – रात 11:27 | षष्ठी |
| 11 मार्च | बुधवार | मूल | सुबह 4:41 – अगले दिन सुबह 6:51 | नवमी |
| 12 मार्च | गुरुवार | मूल | सुबह 6:54 – 9:59 | नवमी |
ये तिथियां जोड़ों के लिए सुखद वैवाहिक जीवन की नींव रख सकती हैं। अंत में, व्यक्तिगत कुंडली मिलान और पंडित जी की सलाह से अंतिम निर्णय लें।
Disclaimer: यह लेख ज्योतिषीय गणनाओं और पंचांग पर आधारित सामान्य जानकारी है। व्यक्तिगत कुंडली और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।



