तमिलनाडु में ₹15,000 करोड़ का मेगा आउटर हार्बर प्रोजेक्ट! श्रीलंका-सिंगापुर को टक्कर देने की तैयारी, समुद्र में बनेगी गहरा ड्राफ्ट वाली नई सुविधा

“तमिलनाडु का वीओ चिदंबरनार बंदरगाह ₹15,000 करोड़ के आउटर हार्बर प्रोजेक्ट से दक्षिण भारत का प्रमुख ट्रांसशिपमेंट हब बनने की ओर अग्रसर है। यह परियोजना 2027 और 2030 तक अतिरिक्त क्षमता जोड़ेगी, बड़े कंटेनर जहाजों को आकर्षित करेगी और क्षेत्रीय व्यापार को मजबूत करेगी, जिससे श्रीलंका के कोलंबो और सिंगापुर जैसे वैश्विक बंदरगाहों को कड़ी टक्कर मिलेगी।”

तमिलनाडु में ₹15,000 करोड़ का मेगा प्रोजेक्ट

तमिलनाडु के थूथुकुडी स्थित वीओ चिदंबरनार बंदरगाह (VOC Port) ने आउटर हार्बर परियोजना के लिए ₹15,000 करोड़ के निवेश की योजना बनाई है। यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट बंदरगाह की कुल कार्गो हैंडलिंग क्षमता में भारी इजाफा करेगा और तमिलनाडु को दक्षिण भारत का प्रमुख ट्रांसशिपमेंट केंद्र बनाने का लक्ष्य रखता है।

प्रोजेक्ट के तहत दो गहरे बर्थ विकसित किए जाएंगे, जिनका ड्राफ्ट 18 मीटर होगा। इससे 2.5 लाख DWT तक के बड़े जहाज आसानी से आ सकेंगे। वर्तमान में कई भारतीय बंदरगाहों में बड़े जहाजों के लिए गहराई की कमी है, जिसके कारण कंटेनरों का ट्रांसशिपमेंट श्रीलंका के कोलंबो पोर्ट या सिंगापुर जैसे विदेशी बंदरगाहों पर होता है। आउटर हार्बर इस निर्भरता को कम करेगा और भारत के विदेशी मुद्रा व्यय में बचत करेगा।

प्रोजेक्ट दो चरणों में पूरा होगा। पहले चरण में 2027 तक 4 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) अतिरिक्त क्षमता जुड़ेगी। दूसरे चरण में 2030 तक और वृद्धि होगी। कुल मिलाकर बंदरगाह की क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी, जो मौजूदा स्तर से काफी ऊपर जाएगी।

बंदरगाह ने हाल के महीनों में शानदार प्रदर्शन किया है। अप्रैल-जनवरी अवधि में कार्गो हैंडलिंग में 6% और कंटेनर वॉल्यूम में 9.40% की वृद्धि दर्ज की गई। यह विकास प्रोजेक्ट की आवश्यकता को और मजबूत करता है।

यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की Maritime Vision 2047 और Sagarmala Programme से जुड़ी हुई है। इन योजनाओं के तहत भारत समुद्री क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना चाहता है और वैश्विक व्यापार मार्गों में मजबूत स्थिति हासिल करना चाहता है।

आर्थिक और रोजगार प्रभाव

आउटर हार्बर प्रोजेक्ट से हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। बंदरगाह संचालन, लॉजिस्टिक्स, शिपिंग एजेंट्स, ट्रकिंग और संबंधित सेवाओं में नौकरियां बढ़ेंगी। तमिलनाडु सरकार ने राज्य में समुद्री बुनियादी ढांचे के लिए ₹1.2 लाख करोड़ की रोडमैप तैयार की है, जिसमें यह प्रोजेक्ट प्रमुख हिस्सा है।

बड़े जहाजों के आगमन से परिवहन लागत कम होगी, जिससे निर्यातकों को फायदा होगा। दक्षिण भारत के राज्य जैसे केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के कार्गो का हिस्सा VOC Port पर शिफ्ट हो सकता है। इससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा।

तकनीकी विशेषताएं और चुनौतियां

ड्राफ्ट : 18 मीटर (बड़े मेगा कंटेनर जहाजों के लिए उपयुक्त)

क्षमता वृद्धि : चरणबद्ध तरीके से 4 MTPA+

जलवायु अनुकूलन : आधुनिक इंजीनियरिंग से समुद्री स्तर वृद्धि और चक्रवातों का सामना करने योग्य

निवेश : ₹15,000 करोड़ (बंदरगाह प्राधिकरण द्वारा वित्तपोषित, संभावित PPP मॉडल)

प्रोजेक्ट में लागत वृद्धि, पर्यावरण मंजूरी और निर्माण समयसीमा जैसी चुनौतियां हैं, लेकिन बंदरगाह प्राधिकरण ने वित्तीय व्यवस्था पूरी कर ली है।

तमिलनाडु के अन्य समुद्री प्रोजेक्ट्स जैसे कोचीन शिपयार्ड का ₹15,000 करोड़ का शिपयार्ड और कुल ₹45,000 करोड़ के थूथुकुडी विकास से राज्य समुद्री क्षेत्र में अग्रणी बन रहा है।

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